भारत में दशहरे पर जलता है रावण, श्रीलंका में क्या होता है? जानिए अनसुनी परंपरा

भारत में विजयादशमी आते ही रामलीलाओं, रावण दहन और आतिशबाजी की धूम दिखाई देती है। लेकिन जिस लंका के राजा रावण का पुतला भारत में जलाया जाता है, उसी श्रीलंका में दशहरे की परंपराएं कैसी हैं?

Updated : 19 October 2026, 5:09 PM IST
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New Delhi: भारत में विजयादशमी आते ही रामलीलाओं, रावण दहन और आतिशबाजी की धूम दिखाई देती है। लेकिन जिस लंका के राजा रावण का पुतला भारत में जलाया जाता है, उसी श्रीलंका में दशहरे की परंपराएं कैसी हैं? क्या वहां भी रावण दहन होता है, या रावण को देखने का नजरिया अलग है? इसकी दिलचस्प तस्वीर श्रीलंका की धार्मिक परंपराओं और स्थानीय मान्यताओं से सामने आती है।

श्रीलंका में दशहरा कैसे मनाया जाता है?
भारत में दशहरे का सबसे चर्चित दृश्य रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन है। लेकिन श्रीलंका में दशहरे के मौके पर भारत जैसी व्यापक रावण दहन परंपरा नहीं दिखाई देती। वहां हिंदू समुदाय नवरात्रि और विजयादशमी से जुड़े धार्मिक अनुष्ठान करता है। हालांकि, श्रीलंका के सभी लोगों की रावण को लेकर एक जैसी मान्यता नहीं है।

नवरात्रि में मां दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती की पूजा
श्रीलंका में तमिल हिंदू समुदाय के बीच नवरात्रि का धार्मिक महत्व है। नौ रातों के इस पर्व में मां दुर्गा, मां लक्ष्मी और मां सरस्वती की आराधना की जाती है। श्रीलंका की संसद की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, वहां संसद परिसर में भी नवरात्रि समारोह आयोजित किया जाता है। दसवें दिन विद्यारंभम की परंपरा के तहत बच्चों की शिक्षा की शुरुआत को शुभ माना जाता है।

यानी श्रीलंका में दशहरे से जुड़ी धार्मिक परंपराओं को सिर्फ रावण दहन के नजरिए से देखना सही नहीं होगा। यहां देवी पूजा और शिक्षा की शुरुआत जैसे अनुष्ठान भी महत्वपूर्ण हैं।

श्रीलंका में रावण को लेकर क्या है मान्यता?
भारत में रामायण की प्रचलित परंपरा में रावण को सीता हरण और भगवान राम के साथ युद्ध के कारण बुराई के प्रतीक के रूप में देखा जाता है। वहीं, श्रीलंका के पर्यटन विभाग की वेबसाइट पर रावण से जुड़ी स्थानीय मान्यताओं का एक अलग पहलू भी दर्ज है। इसमें रावण को शिवभक्त, विद्वान और वीणा वादन से जुड़ी कथाओं वाला राजा बताया गया है।

लेकिन यह कहना सही नहीं होगा कि पूरा श्रीलंका रावण की पूजा करता है या उसे नायक मानता है। रावण को लेकर धारणाएं धार्मिक परंपराओं और स्थानीय लोककथाओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती हैं।

मार्च में निकलता है रावण की प्रतिमा का जुलूस?
श्रीलंका में रावण से जुड़ी एक और दिलचस्प परंपरा की चर्चा होती है। आजतक की 15 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, कोलंबो के पास पन्निपिटिया स्थित श्री देव्रम विहार से जुड़े मेदिन महा पेराहेरा आयोजन में मार्च के दौरान रावण की प्रतिमा के जुलूस का उल्लेख मिलता है। रिपोर्ट में सजे हाथियों और पारंपरिक धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी जिक्र है। यह आयोजन दशहरे के दिन होने वाले रावण दहन से अलग है।

इसलिए भारत में रावण दहन और श्रीलंका में रावण से जुड़ी स्थानीय परंपराओं की तुलना करते समय दोनों देशों की विविध धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं को समझना जरूरी है।

भारत और श्रीलंका की परंपराओं में मुख्य अंतर
भारत के अनेक हिस्सों में विजयादशमी भगवान राम की रावण पर विजय के प्रतीक के रूप में मनाई जाती है, जबकि कुछ क्षेत्रों में यह मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय से जुड़ी है। श्रीलंका में हिंदू समुदाय नवरात्रि और विजयादशमी के अनुष्ठान करता है, लेकिन भारत जैसी व्यापक रावण दहन परंपरा वहां प्रमुख नहीं है।

Location :  Delhi

Published :  19 October 2026, 5:09 PM IST

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