
चुनाव आयुक्तों के चयन पर उठे सवाल (Image Source: Internet)
New Delhi: मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार और निर्वाचन आयुक्तों डॉ. सुखबीर सिंह संधू तथा डॉ. विवेक जोशी की नियुक्ति का मामला एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। बुधवार को दाखिल एक अर्जी में याचिकाकर्ता सूरी पायला ने चयन प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत मिले दस्तावेज अदालत में पेश करने की अनुमति मांगी है।
यह अर्जी इन नियुक्तियों को चुनौती देने वाली पहले से लंबित याचिका में दाखिल की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि चयन समिति ने उम्मीदवारों के चुनाव कराने के अनुभव और ईमानदारी से जुड़े मानकों का पर्याप्त मूल्यांकन नहीं किया। उनका कहना है कि निर्वाचन आयुक्त जैसे महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति के लिए इन पहलुओं की जांच जरूरी है।
याचिकाकर्ता ने अपनी रिट याचिका में संशोधन की मांग करते हुए कहा है कि विधायी विभाग से आरटीआई के जरिए मिले रिकॉर्ड में चयन प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेज शामिल हैं। उनके अनुसार, सर्च कमेटी और चयन समिति के सामने रखे गए दस्तावेजों में उम्मीदवारों की सूची, सेवा संबंधी विवरण, तारीखें और सर्विस रिकॉर्ड प्रमुख रूप से शामिल थे।
पायला का दावा है कि इन दस्तावेजों से उम्मीदवारों की ईमानदारी या चुनाव प्रबंधन और संचालन के अनुभव का कोई ठोस मूल्यांकन सामने नहीं आता। इसी आधार पर उन्होंने अदालत से रिकॉर्ड को मामले में शामिल करने और याचिका में संशोधन की अनुमति मांगी है।
याचिकाकर्ता ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त और अन्य निर्वाचन आयुक्त (नियुक्ति, सेवा की शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023 के तहत मार्च 2024 और फरवरी 2025 में हुई नियुक्तियों को चुनौती दी है। उनकी दलील कानून में तय चयन प्रक्रिया और उसके तहत उम्मीदवारों के मूल्यांकन से जुड़ी है।
अर्जी में अधिनियम की धारा 5 और धारा 6 का भी उल्लेख किया गया है। याचिकाकर्ता के अनुसार, धारा 5 के तहत सर्च कमेटी को निर्वाचन आयुक्त के पद के लिए योग्य पांच लोगों का पैनल तैयार करना होता है, जबकि धारा 6 चयन समिति की सिफारिशों से संबंधित है।
Location : New Delhi
Published : 29 October 2026, 5:35 AM IST