Gas Crisis: सिलेंडर के बढ़ते दामों ने छात्रों की जिंदगी बदली, क्या अब पढ़ाई छोड़ गैस की चिंता करेंगे युवा?

दिल्ली में बढ़ती गैस कीमतों ने छात्रों की जिंदगी को किस तरह बदल दिया है, यह कहानी सिर्फ महंगाई की नहीं बल्कि संघर्ष की भी है। सीमित बजट, देरी से मिलते सिलिंडर और बढ़ते खर्च के बीच छात्र कैसे जूझ रहे हैं और क्यों अब एक नया विकल्प तेजी से लोकप्रिय हो रहा है, इस पूरी स्थिति में कई ऐसे पहलू हैं जो आपको सोचने पर मजबूर कर देंगे।

Post Published By: Nidhi Kushwaha
Updated : 6 April 2026, 8:36 AM IST

New Delhi: दिल्ली में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के लिए एलपीजी गैस सिलेंडर अब एक बड़ी चुनौती बन गया है। सीमित बजट में जीवन यापन करने वाले इन छात्रों पर गैस की बढ़ती कीमतों और अनियमित सप्लाई ने अतिरिक्त बोझ डाल दिया है। दिल्ली के मुखर्जी नगर, लक्ष्मी नगर, कटवारिया सराय और साकेत जैसे इलाकों में रहने वाले छात्रों को सिलिंडर के लिए 5 से 7 दिन तक इंतजार करना पड़ रहा है।

देरी और महंगाई ने बिगाड़ी दिनचर्या

यूपीएससी और एसएससी की तैयारी कर रहे छात्रों के अनुसार, समय पर गैस न मिलने से उनकी दिनचर्या प्रभावित हो रही है। छात्रों का कहना है कि सिलेंडर खत्म होने के बाद उन्हें कई दिनों तक बाहर खाना खाना पड़ा, जिससे खर्च दोगुना हो गया। वहीं, कुछ स्थानीय विक्रेता इस स्थिति का फायदा उठाकर ऊंचे दामों पर सिलेंडर बेच रहे हैं।

पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर

गैस संकट केवल आर्थिक परेशानी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और पढ़ाई पर भी असर डाल रहा है। रोजमर्रा की जरूरतों को लेकर चिंता उनकी एकाग्रता को प्रभावित कर रही है। कई छात्र अब सस्ते ढाबों या टिफिन सेवाओं पर निर्भर हो गए हैं, जिससे उनकी सेहत पर भी असर पड़ रहा है।

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विकल्पों की तलाश में छात्र

स्थिति से निपटने के लिए छात्र अब इंडक्शन चूल्हा, इलेक्ट्रिक कुकर और साझा रसोई जैसे विकल्प अपना रहे हैं। हालांकि, बिजली के बढ़ते बिल और उपकरणों की लागत इन विकल्पों को भी चुनौतीपूर्ण बना रही है। कई छात्र खर्च बचाने के लिए एक ही सिलेंडर साझा कर रहे हैं।

महंगे हुए खाने-पीने के दाम

गैस की बढ़ती कीमतों का असर स्थानीय खाद्य बाजार पर भी साफ दिखाई दे रहा है। ढाबों और छोटे रेस्तरां में खाने-पीने की चीजें महंगी हो गई हैं। पहले 5 रुपये में मिलने वाली रोटी अब 10-12 रुपये तक पहुंच गई है, जबकि दाल और थाली के दामों में भी भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है।

पीएनजी की ओर बढ़ रहा रुझान

राजधानी में अब लोग एलपीजी के बजाय पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) को प्राथमिकता देने लगे हैं। जिन इलाकों में यह सुविधा उपलब्ध है, वहां उपभोक्ता सिलिंडर के झंझट से बचने के लिए पीएनजी कनेक्शन ले रहे हैं। मार्च महीने में ही 3.42 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जुड़े हैं।

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पर्यावरण के लिए भी बेहतर विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार, पीएनजी न केवल सुविधाजनक है बल्कि पर्यावरण के लिए भी बेहतर है। यह एलपीजी की तुलना में कम प्रदूषण फैलाता है और खासकर दिल्ली-एनसीआर जैसे प्रदूषण प्रभावित क्षेत्रों के लिए एक सकारात्मक विकल्प बनकर उभर रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  6 April 2026, 8:36 AM IST