राजमिस्त्री निकला चोर! मालिक के घर से लाखों के जेवर उड़ाकर हुआ फरार

जसवंतनगर के कोतवाली क्षेत्र के ग्राम केस्त में मकान निर्माण का काम कर रहे एक राजमिस्त्री ने ही अपने मालिक के घर में चोरी की वारदात को अंजाम दिया। उसके पास से बरामद सामान की कीमत करीब तीन लाख रुपये बताई गई है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 18 June 2026, 5:46 PM IST
Etawah : जसवंतनगर के  कोतवाली क्षेत्र के ग्राम केस्त में मकान निर्माण का काम कर रहे एक राजमिस्त्री ने ही अपने मालिक के घर में चोरी की वारदात को अंजाम दे दिया। पुलिस ने आरोपी को कचोरा बाईपास से गिरफ्तार कर उसके कब्जे से सोने-चांदी के जेवरात और नकदी बरामद की है। बरामद सामान की कीमत करीब तीन लाख रुपये बताई गई है।

30 हजार रुपये नकद चोरी

ग्राम केस्त निवासी अनीता देवी पत्नी रमेश चंद्र राठौर ने कोतवाली में दर्ज कराई रिपोर्ट में बताया कि उनके घर पर काफी समय से राकेश उर्फ कल्लू पुत्र मोहम्मद उमर निवासी दतावली, हाल निवासी काशीराम कॉलोनी, जसवंतनगर राजमिस्त्री का कार्य कर रहा था। आरोप है कि उसने सुबह के समय घर से सोने का मंगलसूत्र, एक जोड़ी कुंडल, अंगूठी, नाक की कील, चांदी की दो करधनी, सात जोड़ी पायल, तीन जोड़ी बिछिया, तीन खड़ुआ तथा 30 हजार रुपये नकद चोरी कर लिए।

आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेजा

कोतवाली प्रभारी निरीक्षक कमल भाटी ने बताया कि तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर पुलिस टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की। रात्रि गश्त के दौरान मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने कचोरा बाईपास स्थित बकरी बाजार के पास से आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान उसके पास से सोने का मंगलसूत्र, अंगूठी, कुंडल, नाक की कील, एक चांदी की करधनी, सात पायल, तीन जोड़ी बिछिया, तीन खड़ुआ तथा 14 हजार रुपये नकद बरामद हुए। बरामद सामान की पहचान पीड़िता के जेवरात के रूप में हुई। पूछताछ में आरोपी ने चोरी की घटना में दो अन्य साथियों के शामिल होने की जानकारी दी। पुलिस फरार आरोपियों की तलाश में जुटी है। गिरफ्तार आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया।

आरोपी की पहचान को लेकर उठे सवाल?

ग्राम केस्त में हुई चोरी के मामले में गिरफ्तार व्यक्ति की पहचान को लेकर क्षेत्र में चर्चाओं का बाजार गर्म है। ग्रामीणों के अनुसार आरोपी ने पुलिस को अपना नाम राकेश उर्फ कल्लू बताया है, जबकि कुछ लोगों का दावा है कि उसका वास्तविक नाम मंसूर अली है और वह कथित रूप से बांग्लादेशी मूल का हो सकता है।

ग्रामीणों का कहना है कि वह परिवार सहित लंबे समय से छद्म नाम से क्षेत्र में रह रहा है और मजदूरी व राजमिस्त्री का कार्य करता है। गांव के आसपास वर्षों से डेरा डाले कुछ परिवारों के बारे में भी लोगों का कहना है कि उनकी भाषा स्थानीय लोगों की समझ में नहीं आती और वे संभवतः बंगाली बोलते हैं।
चर्चा यह भी है कि विशेष सर्वेक्षण के दौरान ये लोग अचानक क्षेत्र से गायब हो गए थे और सर्वे समाप्त होने के बाद फिर दिखाई देने लगे। कुछ लोगों ने इनके पास कथित रूप से फर्जी दस्तावेज होने की आशंका भी जताई है। हालांकि इन दावों की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से आरोपी और उससे जुड़े परिवारों की वास्तविक पहचान तथा मूल निवास की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।

Location :  Etawah

Published :  18 June 2026, 5:45 PM IST