DUSU Election Result 2026: भाजपा को सियासी टॉनिक,आपसी कलह और बगावत ने खुलने ही नहीं दिया एनएसयूआई का खाता

DUSU Election Result 2026: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद जीतकर तीन सीटों पर कब्जा किया। उपाध्यक्ष पद पर पूर्व NSUI सदस्य और निर्दलीय दीपांशु शौकीन विजयी रहे। NSUI चारों केंद्रीय सीटों पर चुनाव लड़ने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत सकी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 20 September 2026, 10:32 AM IST

New Delhi: दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव 2026 के नतीजे भाजपा से जुड़े छात्र संगठन ABVP के लिए राहत देने वाले रहे, जबकि कांग्रेस के छात्र संगठन NSUI के लिए परिणाम निराशाजनक रहा। ABVP ने केंद्रीय पैनल की चार में से तीन सीटों पर जीत दर्ज की, वहीं NSUI एक भी केंद्रीय सीट अपने नाम नहीं कर सकी। चुनाव में टिकट बंटवारे को लेकर सामने आई नाराजगी और बगावत भी चर्चा में रही।

ABVP की तीन सीटों पर जीत

DUSU चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष, सचिव और संयुक्त सचिव पद पर जीत दर्ज की। अध्यक्ष पद पर यश डबास ने NSUI के विजय शंकर मीणा को 2,053 वोटों से हराया। डबास को 24,576 वोट मिले, जबकि विजय शंकर मीणा को 22,523 वोट प्राप्त हुए।

सचिव पद पर रिया छाबड़ी और संयुक्त सचिव पद पर लक्ष्य राज सिंह ने जीत दर्ज की। इस तरह ABVP ने चार में से तीन केंद्रीय पद अपने नाम किए।

उपाध्यक्ष चुनाव ने बिगाड़ा NSUI का गणित

सबसे दिलचस्प मुकाबला उपाध्यक्ष पद पर देखने को मिला। पूर्व NSUI सदस्य दीपांशु शौकीन ने निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा और 30,615 वोट हासिल कर जीत दर्ज की। उन्होंने ABVP के ईशू मौर्य को हराया, जिन्हें 16,910 वोट मिले।

वहीं NSUI के अधिकृत प्रत्याशी वीर चतरथ को सिर्फ 4,313 वोट मिले। यानी जिस संगठन से जुड़े रहे दीपांशु शौकीन ने टिकट न मिलने के बाद निर्दलीय चुनाव लड़ा, उसी मुकाबले में उन्होंने NSUI के आधिकारिक प्रत्याशी से कहीं अधिक वोट हासिल किए।

टिकट को लेकर नाराजगी बनी चुनौती

चुनाव से पहले NSUI में टिकट वितरण को लेकर कई दावेदारों की नाराजगी सामने आई थी। दीपांशु शौकीन समेत कुछ अन्य दावेदारों के चुनाव मैदान में उतरने से संगठन के वोटों के बंटने की चर्चा हुई।

NSUI की ओर से भी चुनाव परिणाम के बाद संगठन के भीतर की खींचतान को हार के कारणों में गिना गया। हालांकि चुनावी नतीजे केवल एक कारण से तय नहीं होते। उम्मीदवारों की व्यक्तिगत पकड़, प्रचार, संगठन की तैयारी और छात्रों के स्थानीय मुद्दे भी परिणाम को प्रभावित कर सकते हैं।

भाजपा के लिए क्यों अहम है नतीजा?

DUSU चुनाव का परिणाम भाजपा से जुड़े छात्र संगठन के लिए ऐसे समय में आया है, जब पार्टी युवाओं के बीच अपनी पहुंच और संवाद को लेकर लगातार अभियान चला रही है। दिल्ली विश्वविद्यालय में देश के अलग-अलग हिस्सों से छात्र आते हैं, इसलिए राजनीतिक दल और छात्र संगठन इस चुनाव को युवाओं के बीच अपनी स्थिति के एक महत्वपूर्ण संकेतक के तौर पर देखते हैं।

हालांकि DUSU का परिणाम सीधे तौर पर किसी विधानसभा या लोकसभा चुनाव के परिणाम का संकेत नहीं माना जा सकता। इसके बावजूद तीन केंद्रीय पदों पर ABVP की जीत और NSUI का खाता नहीं खुलना छात्र राजनीति में चर्चा का विषय जरूर बन गया है।

बगावत ने बढ़ाई NSUI की मुश्किल

DUSU के नतीजों में सबसे बड़ा सवाल यही रहा कि NSUI का अधिकृत उम्मीदवार उपाध्यक्ष पद पर बेहद पीछे रह गया, जबकि टिकट के दावेदार रहे दीपांशु शौकीन निर्दलीय चुनाव जीत गए। इस नतीजे ने टिकट वितरण और संगठनात्मक एकजुटता को लेकर उठे सवालों को फिर चर्चा में ला दिया है।

Location :  New Delhi

Published :  20 September 2026, 10:32 AM IST