
देवघर सदर अस्पताल (सोर्स- डाइनामाइट न्यूज़)
Deoghar: श्रावणी मेला शुरू होने में अब कुछ ही दिन शेष हैं। बाबा बैद्यनाथ की नगरी एक बार फिर करोड़ों श्रद्धालुओं के स्वागत की तैयारियों में जुटी हुई है। जिला प्रशासन, पुलिस प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार समीक्षा बैठकें कर रहे हैं। जिले को हाल ही में नए उपायुक्त, नए पुलिस अधीक्षक और नए सिविल सर्जन मिले हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या नई प्रशासनिक टीम श्रावणी मेले जैसी विशाल चुनौती से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है या तैयारियों की असल तस्वीर मेले के दौरान सामने आएगी।
देवघर की स्थायी आबादी करीब 15 लाख है, लेकिन श्रावणी मेले के दौरान लाखों श्रद्धालुओं के आने से जिले पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है। सरकारी अनुमानों के अनुसार हर वर्ष 50 लाख से अधिक श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचते हैं। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी कई गुना बढ़ जाती है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सदर अस्पताल और स्वास्थ्य विभाग इस अतिरिक्त बोझ को संभालने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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स्वास्थ्य विभाग ने श्रावणी मेला 2026 को देखते हुए दवाइयों, चिकित्सा उपकरणों, मशीनों और अन्य आवश्यक संसाधनों की खरीद प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए टेंडर भी जारी किए गए हैं। इससे साफ है कि सामान्य व्यवस्था से काम नहीं चलने वाला और अतिरिक्त संसाधनों की जरूरत महसूस की गई है।
हालांकि सवाल केवल दवाइयों और उपकरणों की खरीद तक सीमित नहीं है। यदि किसी दिन बड़ी संख्या में मरीज अस्पताल पहुंचते हैं तो क्या पर्याप्त डॉक्टर उपलब्ध होंगे? क्या विशेषज्ञ चिकित्सकों की तैनाती सुनिश्चित है? क्या नर्सिंग और पैरामेडिकल स्टाफ पर्याप्त संख्या में मौजूद रहेगा? साथ ही ICU, ऑक्सीजन, ब्लड बैंक और इमरजेंसी सेवाएं बिना किसी दबाव के सुचारु रूप से संचालित हो पाएंगी या नहीं, यह भी महत्वपूर्ण सवाल है।
पिछले श्रावणी मेले के दौरान प्रशासन ने लगभग 190 डॉक्टर, 319 पैरामेडिकल कर्मी, 41 एम्बुलेंस और 32 स्वास्थ्य केंद्रों की तैनाती का दावा किया था। इस बार यह जानना जरूरी है कि क्या इन संसाधनों में बढ़ोतरी की गई है। यदि श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है तो स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार भी उसी अनुपात में होना चाहिए।
श्रावणी मेले के दौरान सड़क दुर्घटनाएं, हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, हार्ट अटैक, संक्रमण और अन्य आपातकालीन मामलों का सबसे अधिक दबाव देवघर सदर अस्पताल पर पड़ता है। ऐसे में यह जानना जरूरी है कि अस्पताल में स्वीकृत पदों के मुकाबले कितने डॉक्टर कार्यरत हैं, कितने विशेषज्ञ चिकित्सकों के पद खाली हैं, नर्सों की उपलब्धता कितनी है और कितने बेड तैयार रखे गए हैं। यदि एक साथ बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं तो अस्पताल की क्षमता की भी परीक्षा होगी।
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नए उपायुक्त, नए पुलिस अधीक्षक और नए सिविल सर्जन के लिए यह श्रावणी मेला पहली बड़ी प्रशासनिक परीक्षा माना जा रहा है। बैठकों और निर्देशों के बाद अब नजर इस बात पर होगी कि व्यवस्थाएं जमीन पर कितनी प्रभावी साबित होती हैं। क्योंकि यह केवल प्रशासनिक आयोजन नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और उनकी सुरक्षा से जुड़ा विषय है।
स्वास्थ्य विभाग लगातार बेहतर तैयारियों का दावा कर रहा है। खरीद प्रक्रिया जारी है और योजनाएं बनाई जा रही हैं। लेकिन असली सवाल यही है कि क्या ये तैयारियां कागजों से निकलकर अस्पतालों तक पहुंच चुकी हैं? क्या डॉक्टरों और विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी दूर हो गई है? क्या सदर अस्पताल किसी भी बड़े मेडिकल इमरजेंसी से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार है? इन सभी सवालों का जवाब अब श्रावणी मेले के दौरान अस्पतालों की वास्तविक व्यवस्था ही देगी।
Location : Deoghar
Published : 26 June 2026, 2:31 PM IST