60 दिन बाद देवघर में शुरू होगा आस्था का महाकुंभ, लाखों शिवभक्तों के स्वागत के लिए सज रही बाबा नगरी

विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 के आयोजन में अब महज दो महीने का समय शेष है। बाबा बैद्यनाथ धाम में देश-विदेश से आने वाले लाखों शिवभक्तों की सुरक्षा के लिए स्वास्थ्य विभाग ने कमर तो कस ली है, लेकिन डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी किल्लत इस बार प्रशासन के लिए सबसे बड़ी अग्निपरीक्षा साबित होने वाली है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 1 June 2026, 1:30 PM IST

Deoghar: झारखंड के देवघर में विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेला 2026 को लेकर प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मेले के भव्य आयोजन में अब लगभग 60 दिन यानी दो माह का समय शेष बचा है। बाबा बैद्यनाथ धाम में देश-विदेश से आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर हैं। मेला क्षेत्र से लेकर कांवरिया पथ तक चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ बनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। हालांकि, इस बार स्वास्थ्य विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती चिकित्सकों और स्वास्थ्यकर्मियों की भारी कमी बनकर उभरी है।

सरकार से मांगी अतिरिक्त डॉक्टरों की फौज

सिविल सर्जन डॉ. रमेश कुमार ने मीडिया को बताया कि विभाग में वर्तमान में मैनपावर की भारी कमी है। इस संकट से निपटने के लिए राज्य सरकार को पत्र भेजकर अतिरिक्त डॉक्टरों, नर्सों, फार्मासिस्टों और अन्य पैरामेडिकल स्टाफ की मांग की गई है, ताकि मेले के दौरान श्रद्धालुओं को चौबीसों घंटे बेहतर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जा सके। अधिकारियों को उम्मीद है कि मेले की शुरुआत से पहले सरकार द्वारा अतिरिक्त बल तैनात कर दिया जाएगा।

पिछले वर्ष 1.75 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को मिला था उपचार

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले श्रावणी मेले के दौरान देवघर जिला स्वास्थ्य विभाग द्वारा दर्जनों अस्थायी स्वास्थ्य शिविर संचालित किए गए थे। उस दौरान मेला अवधि में लगभग 1.75 लाख से अधिक श्रद्धालुओं को प्राथमिक उपचार उपलब्ध कराया गया था। कांवरिया पथ, दुम्मा, सरासनी, बैद्यनाथ मंदिर परिसर और प्रमुख पड़ाव स्थलों पर 24 घंटे आपातकालीन चिकित्सा सेवाएं संचालित की गई थीं, जहां गंभीर मरीजों को तत्काल एम्बुलेंस से सदर अस्पताल रेफर किया गया था।

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हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन से निपटने के लिए विशेष रणनीति

कांवरिया पथ पर पैदल चलने के कारण श्रद्धालुओं में सबसे अधिक मामले हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन, पैरों में जख्म, वायरल संक्रमण और अत्यधिक थकान के देखे जाते हैं। सूत्रों की मानें तो इस बार ओआरएस पैकेट, जीवनरक्षक दवाओं, स्ट्रेचर, व्हीलचेयर और एम्बुलेंस नेटवर्क को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। साथ ही, महिला श्रद्धालुओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए अलग से विशेष चिकित्सा सहायता केंद्र स्थापित करने पर भी चर्चा चल रही है।

Location :  Deoghar

Published :  1 June 2026, 1:30 PM IST