Deoghar Cyber Crime: पुलिस की ताबड़तोड़ छापेमारी, आधी रात देवघर में खुली ऐसी खौफनाक फाइल… दहल उठा गांव

देवघर साइबर पुलिस ने कूरियर और ई-कॉमर्स कंपनियों के नाम पर ठगी करने वाले चार शातिर अपराधियों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 5 मोबाइल और 7 सिम बरामद हुए हैं। लगातार हो रही गिरफ्तारियों के बावजूद क्षेत्र में बढ़ता साइबर अपराध पुलिस और व्यवस्था के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 21 June 2026, 3:19 PM IST

Deoghar: झारखंड का देवघर जिला एक बार फिर साइबर अपराध की वजह से देश भर में सुर्खियों में है। देवघर साइबर थाना की टीम ने एक गुप्त सूचना के आधार पर जसीडीह पुलिस के साथ मिलकर संयुक्त छापेमारी की। इस कार्रवाई में पुलिस ने चार बेहद शातिर साइबर अपराधियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोपियों के ठिकाने से पुलिस ने 5 हाई-टेक मोबाइल फोन, 7 एक्टिवेटेड सिम कार्ड और 1 विवादित 'प्रतिबिंब सिम' बरामद किया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि यह गिरोह देश के अलग-अलग राज्यों में बैठे हजारों लोगों को रोजाना अपना शिकार बना रहा था।

नामचीन कुरियर कंपनियों के नाम पर ठगी का नया ट्रेंड

साइबर पुलिस के अनुसार, इस बार अपराधियों ने ठगी का एक बिल्कुल नया और बेहद एडवांस तरीका (मोडस ऑपेरेंडी) अपनाया था। ये शातिर अपराधी खुद को देश की जानी-मानी ई-कॉमर्स और कूरियर कंपनियों जैसे Flipkart, DTDC, Bluedart और First Flight के फर्जी कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव बताते थे। गिरोह के सदस्य लोगों को कॉल करके झांसा देते थे कि उनका एक जरूरी पार्सल या कूरियर अटक गया है। डिलीवरी को दोबारा शुरू करने या केवाईसी (KYC) अपडेट करने के बहाने वे पीड़ितों के मोबाइल पर एक रिमोट एक्सेस लिंक भेजते थे और कुछ ही मिनटों में पूरा बैंक खाता साफ कर देते थे।

गिरफ्तारियों की झड़ी, लेकिन सवाल जस का तस

इस कार्रवाई ने देवघर पुलिस की मुस्तैदी को तो साबित किया है, लेकिन इसके साथ ही एक बड़ा यक्ष प्रश्न भी खड़ा कर दिया है। देवघर, जामताड़ा और इसके आसपास के इलाकों में हर महीने दर्जनों गिरफ्तारियां हो रही हैं। जनवरी 2026 में 8, फरवरी में 4 और अप्रैल 2026 में 10 बड़े साइबर अपराधियों को जेल भेजा गया था। बार-बार सिम कार्ड, मोबाइल और लाखों का कैश जब्त होने के बावजूद यह धंधा थमने का नाम नहीं ले रहा है। युवाओं का इस दलदल में लगातार धंसना पुलिस और समाज दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है।

क्या कानून से दो कदम आगे हैं असली मास्टरमाइंड?

स्थानीय स्तर पर हो रही ये गिरफ्तारियां केवल एक मोहरा मात्र नजर आती हैं। जानकारों का मानना है कि इन लड़कों के पीछे काम करने वाले असली सिंडिकेट के मुखिया और तकनीकी मास्टरमाइंड आज भी कानून की पहुंच से कोसों दूर हैं। जब तक इस पूरे रैकेट की जड़ पर प्रहार नहीं होगा, तब तक हर पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद एक नया गिरोह इसी तरह जन्म लेता रहेगा।

'प्रतिबिंब ऐप' से मिली लोकेशन

 पुलिस सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय गृह मंत्रालय के 'प्रतिबिंब पोर्टल' और ऐप की मदद से इन अपराधियों की लाइव टावर लोकेशन ट्रेस की गई थी। यह ऐप फर्जी सिम कार्ड के एक्टिवेट होते ही पुलिस को रियल-टाइम अलर्ट भेज देता है।

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फर्जी बैंक खातों का इंटरनेशनल लिंक

 पुलिस की तकनीकी टीम को जांच में पता चला है कि ठगी गई रकम को तुरंत डमी या किराए के खातों (मुले अकाउंट्स) में ट्रांसफर किया जाता था, जिसका सीधा कनेक्शन क्रिप्टो करेंसी और दुबई में बैठे कुछ बड़े सटोरियों से जुड़ा हुआ है।

Location :  Deoghar

Published :  21 June 2026, 3:19 PM IST