Malviya Nagar Fire: रोंगटे खड़े करने वाली वो सच्चाई, जो आलीशान अस्पतालों के पीछे छिपी थी!

मालवीय नगर की आग ने दिल्ली के मेडिकल टूरिज्म के पीछे चल रहे बिना नियम-कानून वाले गेस्ट हाउसों का खौफनाक सच सामने ला दिया है। ठीक होने की उम्मीद में आए विदेशी मरीजों के लिए ये अस्थायी ठिकाने अब जानलेवा साबित हो रहे हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 June 2026, 9:44 AM IST

New Delhi: दिल्ली का मालवीय नगर इलाका आम तौर पर अपने चहल-पहल वाले बाज़ारों, कोचिंग सेंटरों और तंग गलियों के लिए जाना जाता है। लेकिन इस इलाके की एक और पहचान है, जो बाहर से आने वाले लोगों से जुड़ी है। दरअसल, यह इलाका देश-विदेश से इलाज कराने आए हज़ारों मरीज़ों और उनके परिवारों के लिए एक 'वेटिंग रूम' की तरह काम करता है। बुधवार को मालवीय नगर के 'फ्लोरिश स्टेज़ B&B' में लगी भीषण आग ने इस छिपे हुए इकोसिस्टम की एक ऐसी डरावनी सच्चाई सामने ला दी है, जिसे अब तक नज़रअंदाज़ किया जा रहा था।

अस्पतालों के भरोसे टिकी है यहां की दुनिया

मालवीय नगर और साकेत के पास मैक्स, पीएसआरआई और अपोलो क्रेडल जैसे बड़े-बड़े अस्पताल मौजूद हैं। इन अस्पतालों की वजह से यहां की पूरी लोकल इकॉनमी बदल चुकी है। अगर आप पास के हौज़ रानी इलाके में जाएं, तो आपको हर कोने पर केमिस्ट की दुकानें, पैथोलॉजी लैब, मनी एक्सचेंज काउंटर और अफ़गानी या सोमाली रेस्तरां मिल जाएंगे। बाज़ारों में घूमते हुए अरबी, सोमाली और बांग्ला भाषा की आवाज़ें आम सुनाई देती हैं। ठीक वैसे ही जैसे एम्स के पास बिहार या यूपी के लोग दिखते हैं, यहां बस फ़र्क इतना है कि आने वाले लोग ज़्यादातर दूसरे देशों से होते हैं।

मजबूरी में चुनना पड़ता है यह रास्ता

आग लगने वाली जगह से कुछ ही दूरी पर लाठी के सहारे चल रहे सोमालिया के एक युवक ने बताया कि वह हिप रिप्लेसमेंट के लिए यहां आया है। उसने रहने के लिए मालवीय नगर को इसलिए चुना क्योंकि अस्पताल बिल्कुल पास है। उसका कहना था कि उनके देश में इलाज की अच्छी सुविधाएं नहीं हैं और जहां हैं, वहां बहुत महंगा है। यूट्यूब से इस जगह का पता लगाकर वह अपने परिवार के साथ यहां आया था। भारत का मेडिकल टूरिज्म लगातार बढ़ रहा है। साल 2024 में करीब 6.44 लाख विदेशी मरीज़ इलाज के लिए भारत आए, जिनमें बांग्लादेश के बाद सोमालिया और उज़्बेकिस्तान जैसे देशों के लोग सबसे ज़्यादा हैं।

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कम किराए के लालच में नियमों से खिलवाड़

जैसे-जैसे विदेशी मरीज़ों की मांग बढ़ी, यहां के मकान मालिकों ने बड़ा मुनाफा कमाने का नया तरीका ढूंढ लिया। जो इमारतें पहले आम किराएदारों या छात्रों के लिए पीजी के रूप में इस्तेमाल होती थीं, उन्हें रातों-रात गेस्ट हाउस और होटल बना दिया गया। यहाँ एक कमरा 1,500 से 2,000 रुपये प्रति रात में मिल जाता है, जो बड़े होटलों से बहुत सस्ता है। लंबे समय तक रुकने वालों को और छूट मिल जाती है। लेकिन इस तेज़ी से बढ़ते बिज़नेस के चक्कर में सुरक्षा नियमों को पूरी तरह ताक पर रख दिया गया। जिस B&B में आग लगी, उसमें सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम नहीं थे, जिसके कारण 12 विदेशियों और 9 भारतीयों समेत 21 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।

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हादसे के बाद इलाके में पसरा खौफ

इस दर्दनाक हादसे के बाद अब पूरे मालवीय नगर और हौज़ रानी इलाके में डर का माहौल है। प्रशासन की सख्ती और जांच के डर से कई अवैध रूप से चल रहे गेस्ट हाउसों पर शटर गिर चुके हैं। कुछ जगहों पर तो ठहरे हुए मेहमानों को तुरंत कमरा खाली करने को कह दिया गया है। होटल और गेस्ट हाउस के मालिक अब इस मामले पर कुछ भी बोलने से बच रहे हैं। यह हादसा अधिकारियों के लिए एक बड़ी चेतावनी है कि वो सोए हुए सिस्टम को जगाएं, ताकि ठीक होने की उम्मीद लेकर अनजान शहर आए बेकसूर मरीज़ों के अस्थायी ठिकाने उनकी कब्र न बन जाएं।

Location :  New Delhi

Published :  5 June 2026, 9:44 AM IST