
नाबालिग से दरिंदगी (Img : pinterest)
New Delhi : चलती प्राइवेट स्लीपर बस में 16 वर्षीय नाबालिग के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म के मामले में दिल्ली की तीस हजारी फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं। दोनों पर नाबालिग के अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत अपराधों के आरोप तय किए गए हैं। अदालत ने मामले की नियमित सुनवाई के लिए 24 अक्टूबर की तारीख तय की है। अब इसी दिन से दोनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमे की कार्यवाही शुरू होगी।
यह मामला 4 अगस्त की रात का है। पुलिस के मुताबिक, उत्तर प्रदेश के मैनपुरी की रहने वाली 11वीं कक्षा की छात्रा अपनी मां से नाराज होकर नोएडा जाने के लिए निकली थी। भारी बारिश के कारण वह रास्ते में भटक गई और ग्रेटर नोएडा के परी चौक पर उतर गई। इसके बाद वह नोएडा सेक्टर-63 जाने के लिए एक प्राइवेट स्लीपर बस के पास पहुंची।
आरोप है कि नाबालिग ने जब नोएडा सेक्टर-63 जाने के लिए मदद मांगी तो बस के कंडक्टर ने उसे वहां छोड़ने की बात कहकर बस में बैठा लिया। लेकिन आरोप के मुताबिक, उसे सेक्टर-63 ले जाने के बजाय बस दिल्ली की तरफ ले जाई गई।
पुलिस के अनुसार, ग्रेटर नोएडा के परी चौक से दिल्ली के कश्मीरी गेट तक करीब 47 किलोमीटर के सफर के दौरान बस में नाबालिग के साथ कथित तौर पर दुष्कर्म किया गया। आरोप है कि ड्राइवर और कंडक्टर ने बारी-बारी से उसके साथ अपराध किया और विरोध करने पर उसे जान से मारने की धमकी भी दी।
इसके बाद आरोपितों ने नाबालिग को कश्मीरी गेट बस टर्मिनल के पास रिंग रोड पर छोड़ दिया। घटना के बाद पीड़िता ने कश्मीरी गेट थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने मामले की जांच शुरू की।
शिकायत मिलने के बाद दिल्ली पुलिस ने घटनास्थल और आसपास के इलाकों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। जांच के दौरान पुलिस को बस की पहचान करने में मदद मिली। इसके बाद पुलिस ने बस को तिमारपुर इलाके से जब्त किया।
जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने 5 अगस्त को बस ड्राइवर कुलदीप और कंडक्टर संदीप को गिरफ्तार कर लिया। इसके बाद मामले में साक्ष्य जुटाने और आरोपों की पुष्टि के लिए पुलिस ने बस तथा पीड़िता से जुड़े वैज्ञानिक साक्ष्यों को भी जांच का हिस्सा बनाया।
मामले की जांच पूरी करने के बाद दिल्ली पुलिस ने सितंबर में अदालत के सामने 398 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। पुलिस की जांच में कई महत्वपूर्ण साक्ष्य सामने आने का दावा किया गया है।
पुलिस के मुताबिक, पीड़िता के कपड़ों और बस की सीट से लिए गए नमूनों की DNA जांच की गई। जांच में मिले DNA नमूनों का दोनों आरोपितों से मैच होने की बात चार्जशीट में कही गई है। पुलिस ने इसे मामले में महत्वपूर्ण वैज्ञानिक साक्ष्य के तौर पर पेश किया है।
अब अदालत में इन साक्ष्यों की कानूनी कसौटी पर जांच होगी। आरोप तय होने के बाद अभियोजन पक्ष को मुकदमे की सुनवाई के दौरान अपने साक्ष्य और गवाह पेश करने होंगे, जबकि आरोपितों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा।
तीस हजारी फास्ट ट्रैक कोर्ट की विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) सोनम गुप्ता ने मामले की सुनवाई के दौरान उपलब्ध सामग्री का परीक्षण किया। अदालत ने आरोपितों के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त सामग्री पाते हुए संबंधित धाराओं के तहत आरोप तय किए हैं।
अदालत की ओर से आरोप तय किए जाने का मतलब यह है कि अब मामले में नियमित ट्रायल आगे बढ़ेगा। इस दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से गवाहों के बयान और उपलब्ध साक्ष्य अदालत के सामने पेश किए जाएंगे। इसके बाद बचाव पक्ष को भी अपना पक्ष रखने का मौका मिलेगा।
अदालत ने मामले की नियमित सुनवाई और ट्रायल के लिए 24 अक्टूबर 2026 की तारीख तय की है। इसी के साथ अगस्त में सामने आए इस मामले की न्यायिक प्रक्रिया अब अगले चरण में पहुंच गई है।
फिलहाल दोनों आरोपितों के खिलाफ अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं और अब मुकदमे के दौरान पेश होने वाले साक्ष्यों पर फैसला होना बाकी है। मामले में लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि ट्रायल पूरा होने और अदालत के फैसले के बाद ही होगी।
Location : New Delhi
Published : 8 October 2026, 2:53 PM IST