
CJI सूर्यकांत : अशोक देसाई श्रद्धांजलि कार्यक्रम (Source: Dynamite News)
New Delhi: चौथे ‘अशोक देसाई मेमोरियल लेक्चर’ में भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने “Reimagining Justice: The Indian Judiciary 50 Years Hence” (न्याय की पुनर्कल्पना: आज से 50 साल बाद भारतीय न्यायपालिका) विषय पर एक प्रभावशाली संबोधन दिया। एक अपरिचित लेकिन रोमांचक विषय पर विचार साझा करते हुए, उन्होंने अगले पांच दशकों में न्यायपालिका के विकास की कल्पना करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने स्वीकार किया कि भविष्य अनिश्चित है, लेकिन दूरदर्शिता के महत्व को रेखांकित किया।
सीजेआई ने साफ कहा कि कानून समय के साथ कदम से कदम मिलाकर चलता है। उन्होंने मशहूर न्यायविद कार्डोजो का जिक्र करते हुए कहा कि कानून इतिहास की सीख और भविष्य की जरूरतों का मिश्रण है। अगर समाज आगे बढ़ रहा है, तो न्याय करने के तरीके पीछे नहीं रह सकते।
आज की अदालतों के डिजिटल होने पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि AI और इंटरनेट से न्याय प्रक्रिया तेज हुई है। लेकिन उन्होंने एक जरूरी चेतावनी देते हुए कहा तकनीक केवल जजों की मदद के लिए है, वह इंसान के विवेक और निर्णय लेने की क्षमता की जगह कभी नहीं ले सकती।
अशोक देसाई को श्रद्धांजलि देते हुए, सीजेआई ने भारतीय न्यायशास्त्र में उनके अपार योगदान को याद किया। मील के पत्थर साबित होने वाले संवैधानिक मामलों से लेकर जनहित याचिकाओं (PIL) को आकार देने तक, देसाई का काम कानून के शासन, समानता और संस्थागत जवाबदेही के प्रति गहरी प्रतिबद्धता का उदाहरण है। उनकी विरासत आज भी बार और बेंच दोनों का मार्गदर्शन करती है।
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सीजेआई सूर्यकांत ने वर्ष 2076 तक न्यायपालिका के स्वरूप में आमूलचूल परिवर्तन की भविष्यवाणी की है, जहाँ अदालतों को पारंपरिक मुकदमों से इतर बिल्कुल नई और जटिल चुनौतियों का सामना करना होगा। भविष्य की इस कानूनी तस्वीर में 'इकोसाइड' एक प्रमुख मुद्दा बनकर उभरेगा, जिसके तहत प्रकृति और पर्यावरण को बड़े स्तर पर नुकसान पहुँचाने वाले कृत्यों को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखकर सख्त सुनवाई की जाएगी। इसके साथ ही, डिजिटल क्रांति के इस युग में न्यायपालिका को वर्चुअल दुनिया के विवादों और क्रिप्टोकरेंसी या विकेंद्रीकृत वित्त (DeFi) जैसी नई आर्थिक व्यवस्थाओं से जुड़ी कानूनी उलझनों को सुलझाने के लिए खुद को तकनीकी रूप से सक्षम और तैयार करना होगा।
संविधान ही रहेगा सबसे ऊपर
संबोधन के अंत में उन्होंने भरोसा दिलाया कि भविष्य चाहे कितना भी हाई-टेक हो जाए, न्यायपालिका की नींव हमेशा संविधान के मूल्यों, लोकतंत्र और मानवाधिकारों पर ही टिकी रहेगी। उन्होंने आज के वकीलों और जजों से अपील की कि वे आने वाली पीढ़ियों के लिए आज से ही एक मजबूत और आधुनिक कानूनी ढांचा तैयार करें।
Location : New Delhi
Published : 14 April 2026, 1:49 AM IST