BRICS Summit 2026: गलवान के बाद पहली बार मोदी-जिनपिंग की औपचारिक मुलाकात संभव, दुनिया की नजरें दिल्ली पर

BRICS Summit 2026 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की संभावित मुलाकात पर दुनिया की नजरें हैं। गलवान घाटी संघर्ष के बाद यह पहली औपचारिक द्विपक्षीय बैठक हो सकती है, जो भारत-चीन संबंधों के लिए अहम मानी जा रही है।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 10 September 2026, 4:07 PM IST

नई दिल्ली: साल 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के रिश्तों में आई तल्खी के बीच अब एक बड़ा कूटनीतिक घटनाक्रम सामने आ सकता है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में शामिल होने के लिए नई दिल्ली आ सकते हैं। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच पहली बार औपचारिक द्विपक्षीय बैठक होने की संभावना जताई जा रही है।

अगर यह मुलाकात होती है तो यह 2020 के सीमा विवाद और गलवान संघर्ष के बाद दोनों नेताओं की पहली आधिकारिक द्विपक्षीय वार्ता होगी। ऐसे में इस बैठक पर भारत समेत पूरी दुनिया की नजरें टिकी हुई हैं।

BRICS Summit में शामिल होने दिल्ली आ सकते हैं शी जिनपिंग

भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में 18वें BRICS शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है। इसी सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति के भारत आने की संभावना है।

शी जिनपिंग की यात्रा को लेकर चीन की ओर से आधिकारिक स्तर पर पुष्टि किए जाने की बात सामने आई है। हालांकि, दोनों नेताओं के बीच संभावित बैठक का एजेंडा अभी स्पष्ट नहीं किया गया है।

गलवान हिंसा के बाद कैसे बदले भारत-चीन संबंध?

जून 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों के बीच हिंसक टकराव हुआ था। इस घटना में दोनों देशों के सैनिकों की मौत हुई थी और इसके बाद भारत-चीन संबंध दशकों के सबसे कठिन दौर में पहुंच गए थे।

गलवान के बाद सीमा पर बड़ी संख्या में सैनिकों की तैनाती हुई। दोनों देशों के बीच सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हुई, जिसके बाद कुछ विवादित क्षेत्रों से सेनाओं के पीछे हटने की प्रक्रिया शुरू हुई।

हालांकि, सीमा विवाद पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है और कई मुद्दे अभी भी दोनों देशों के बीच चुनौती बने हुए हैं।

क्या सीमा विवाद के बीच फिर शुरू होगी उच्च स्तरीय बातचीत?

हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच संवाद बढ़ा है। कजाकिस्तान के बिश्केक में हुए SCO सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग एक मंच पर नजर आए थे और दोनों नेताओं ने हाथ भी मिलाया था।

हालांकि, उस दौरान कोई औपचारिक द्विपक्षीय बैठक नहीं हुई थी। ऐसे में दिल्ली में संभावित मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों को सामान्य बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पर्दे के पीछे चली कूटनीतिक कोशिशें

शी जिनपिंग की संभावित भारत यात्रा से पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने चीन का दौरा किया था।

इसके अलावा भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय के लिए बने वर्किंग मैकेनिज्म (WMCC) और विशेष प्रतिनिधियों के स्तर पर भी बातचीत हुई है।

माना जा रहा है कि इन्हीं कूटनीतिक प्रयासों के बाद दोनों देशों के शीर्ष नेताओं की संभावित मुलाकात का रास्ता तैयार हुआ है।

अरुणाचल प्रदेश पर जारी है विवाद

हालांकि लद्दाख में तनाव कम करने की दिशा में कुछ प्रगति हुई है, लेकिन अरुणाचल प्रदेश को लेकर विवाद अभी भी कायम है।

चीन अरुणाचल प्रदेश के बड़े हिस्से को "जंगनान" यानी दक्षिणी तिब्बत बताता है। भारत चीन के इस दावे को पूरी तरह खारिज करता है और अरुणाचल प्रदेश को अपना अभिन्न हिस्सा बताता रहा है।

Location :  New Delhi

Published :  10 September 2026, 4:07 PM IST