
BJP में राज्यसभा-MLC टिकट का फैसला कैसे होता है? (Source: Pinterest)
New Delhi: भारतीय जनता पार्टी में राज्यसभा और विधान परिषद के उम्मीदवारों का चयन पार्टी की संगठनात्मक व्यवस्था और चुनावी जरूरतों के आधार पर किया जाता है। हालांकि, पार्टी की आंतरिक टिकट चयन प्रक्रिया का हर चरण सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं होता। इसलिए उम्मीदवार चयन को लेकर सामने आने वाली जानकारियों को पार्टी की आधिकारिक घोषणाओं और उपलब्ध रिकॉर्ड के आधार पर ही समझना उचित है।
राज्यसभा या विधान परिषद की सीट खाली होने पर संबंधित राज्य संगठन में संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा होती है। प्रदेश स्तर के वरिष्ठ नेता और संगठन से जुड़े पदाधिकारी संभावित नामों पर विचार करते हैं। इसके बाद नामों को केंद्रीय नेतृत्व के सामने रखा जाता है।
भाजपा की ओर से अंतिम उम्मीदवारों की घोषणा केंद्रीय स्तर से की जाती है। यानी राज्य इकाई में चर्चा होने के बाद अंतिम फैसला पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व की मंजूरी से सामने आता है।
राज्यसभा चुनाव में आम मतदाता सीधे मतदान नहीं करता। निर्वाचन आयोग के अनुसार, राज्यों के राज्यसभा प्रतिनिधियों का चुनाव संबंधित विधानसभा के निर्वाचित सदस्य proportional representation और single transferable vote प्रणाली से करते हैं।
इसलिए भाजपा किसी राज्य में कितनी सीट जीत सकती है, इसका आकलन विधानसभा में उसके संख्या बल और चुनाव में उपलब्ध सीटों के आधार पर किया जाता है। उम्मीदवारों की संख्या तय करने में यही चुनावी गणित अहम होता है।
टिकट तय करते समय पार्टी के सामने सिर्फ संख्या बल का सवाल नहीं होता। उम्मीदवार की राजनीतिक पृष्ठभूमि, संगठन में योगदान, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और सामाजिक समीकरण जैसे पहलुओं पर भी विचार किया जा सकता है।
कई बार विधानसभा या लोकसभा चुनाव लड़ चुके वरिष्ठ नेताओं को भी राज्यसभा या विधान परिषद के जरिए संसद अथवा राज्य की राजनीति में भूमिका दी जाती है। हालांकि, किसी व्यक्ति को टिकट देने के पीछे वास्तविक कारण वही माना जा सकता है जिसकी पुष्टि पार्टी या संबंधित नेता के आधिकारिक बयान से हो।
विधान परिषद की सभी सीटों पर एक ही तरह से चुनाव नहीं होता। विधानसभा सदस्यों द्वारा चुनी जाने वाली सीटों में विधायक मतदाता होते हैं। वहीं स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग मतदाता सूची और निर्वाचन प्रक्रिया होती है। निर्वाचन आयोग के दस्तावेजों में स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों के लिए अलग पंजीकरण प्रावधान दिए गए हैं।
इसलिए भाजपा को MLC उम्मीदवार चुनते समय यह देखना पड़ता है कि संबंधित सीट का निर्वाचन क्षेत्र किस प्रकार का है और वहां किस तरह का मतदाता वर्ग है।
सपा में राज्यसभा-MLC टिकट का खेल कैसे तय होता है? इन समीकरणों पर टिकी रहती है पूरी रणनीति
कुल मिलाकर भाजपा में राज्यसभा और MLC टिकट का फैसला संगठन की चर्चा, केंद्रीय नेतृत्व का निर्णय, पार्टी के संख्या बल और संबंधित सीट के सामाजिक-क्षेत्रीय समीकरण को ध्यान में रखकर किया जाता है।
राज्यसभा में जहां विधायकों का संख्या बल अहम है, वहीं MLC की अलग-अलग श्रेणी की सीटों पर उम्मीदवार के लिए राजनीतिक और स्थानीय संगठनात्मक पकड़ भी महत्वपूर्ण हो सकती है। इसलिए दोनों चुनावों में टिकट तय करने की रणनीति एक जैसी नहीं रहती।
Location : New News
Published : 29 September 2026, 9:54 AM IST