इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा का इस्तीफा

ज्यूडिशियरी से शुक्रवार को एक बड़ी खबर सामने आयी है। विवादों में घिरे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज यशवंत वर्मा ने इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली हाईकोर्ट के जज रहते उनके घर से जले हुए नोट मिले थे।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 10 April 2026, 12:32 PM IST

Prayagraj: कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने अपना इस्तीफा सौंप दिया है। उन्होंने राष्ट्रपति को अपना इस्तीफा दिया है।

गौरतलब है कि जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली स्थित घर में कथित तौर पर जले हुए नोट मिले थे। उनके आवास पर जले हुए कैश मिलने को लेकर हुए विवाद के बाद उनका दिल्ली हाई कोर्ट से वापस इलाहाबाद तबादला कर दिया गया था। उन्होंने 5 अप्रैल, 2025 को शपथ ली थी और फिलहाल उनके खिलाफ आरोपों के संबंध में एक आंतरिक जांच चल रही है।

जस्टिस यशवंत वर्मा को न्यायिक कार्य से फिलहाल अलग किया गया था। उनके खिलाफ महाभियोग लाने के मामले में कमेटी का गठन किया गया है। कई सांसदों ने संसद में जस्टिस वर्मा को हटाने के लिए नोटिस दिया था। फिलहाल जस्टिस वर्मा के खिलाफ आतंरित जांच कमेटी जांच कर रही है।

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सीजेआई के नेतृत्व में शुरू हुई थी इंटरनल जांच

वहीं इस मामले में भारत के मुख्य न्यायाधीश ने 22 मार्च 2025 को एक आंतरिक जांच शुरू की थी। जस्टिस वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीशों का पैनल भी बनाया था। हालांकि, बाद में सुप्रीम कोर्ट के कॉलेजियम ने जस्टिस यशवंत वर्मा का तबादला इलाहाबाद हाई कोर्ट करने की सिफारिश की थी।

जांच के लिए नियुक्त की समिति

20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने प्रस्ताव दिया कि जस्टिस वर्मा का तबादला इलाहाबाद कर दिया जाए। 22 मार्च को सीजेआई ने जज के खिलाफ लगे आरोपों की जांच के लिए तीन सदस्यों वाली एक समिति का गठन किया। आंतरिक जांच पैनल ने जस्टिस वर्मा के खिलाफ लगे आरोपों को सही पाया। इसके बाद में आगे की कार्रवाई के लिए राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के पास भेज दिया गया।

इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा ने लोकसभा की ओर से नियुक्त उस समिति से कहा था कि उस दिन वे राजधानी में मौजूद नहीं थे और अगर अधिकारी उस जगह को सुरक्षित रखने में नाकाम रहे, तो इसमें उनकी कोई गलती नहीं है। ये समिति उनके खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की जांच कर रही है।

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अगस्त 2025 में लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने 146 सांसदों के हस्ताक्षर के साथ महाभियोग प्रस्ताव को मंजूरी दी और 3-सदस्यीय जांच समिति गठित की थी जो जांच कर रही है।

Location :  Prayagraj

Published :  10 April 2026, 12:32 PM IST