इजरायल-ईरान युद्ध के बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने, युद्ध में मारे गए लोगों की खबरों की पुष्टि करने और प्रभावित देशों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने की मांग की।

सपा प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने सरकार से की बड़ी मांग (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: देश में जारी अंतरराष्ट्रीय युद्ध परिस्थितियों को लेकर विपक्ष के बड़े नेताओं ने केंद्र सरकार से अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की है। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव और कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा है कि भारत सरकार को साफ-साफ बताना चाहिए कि वह युद्ध के पक्ष में है या शांति के। दोनों नेताओं ने युद्ध से जुड़ी खबरों की पारदर्शी पुष्टि करने और सच्चाई जनता के सामने रखने की जरूरत पर जोर दिया है।
अखिलेश यादव ने अपने बयान में कहा कि देश इस समय वैश्विक स्तर पर बन रहे युद्ध जैसे हालात को लेकर चिंतित है। ऐसे समय में केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि वह संसद और देश की जनता के सामने अपना स्पष्ट दृष्टिकोण रखे। उन्होंने कहा, "भारत सरकार युद्ध के हालात पर अपना रुख साफ करे और बताए कि वह जंग के साथ है या अमन के। युद्ध में मारे जाने वालों से जुड़ी खबरों की पुष्टि करे और सच क्या है, यह जनता के सामने रखे।"
सपा प्रमुख ने यह भी कहा कि अफवाहों और अपुष्ट खबरों से भ्रम की स्थिति बनती है, जिससे आम नागरिकों में असुरक्षा की भावना पैदा होती है। इसलिए सरकार को आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
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— डाइनामाइट न्यूज़ हिंदी (@DNHindi) March 1, 2026
वहीं कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि विदेशों में युद्ध-प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अंतरराष्ट्रीय नेताओं के सामने झुकती दिख रही है। उन्होंने विशेष रूप से बेंजामिन नेतन्याहू और डोनाल्ड ट्रंप का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत को स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति अपनानी चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा, "सरकार युद्ध-प्रभावित देशों में फंसे भारतीय नागरिकों को सुरक्षित स्वदेश वापस लाने के लिए हर संभव प्रयास करे।" उन्होंने मांग की कि विदेश मंत्रालय स्थिति पर नियमित ब्रीफिंग दे और राहत एवं निकासी अभियान की प्रगति की जानकारी सार्वजनिक करे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि आने वाले सत्र में यह मुद्दा संसद में भी जोर-शोर से उठ सकता है। विपक्ष सरकार से स्पष्ट रणनीति, मानवीय दृष्टिकोण और पारदर्शिता की अपेक्षा कर रहा है। वर्तमान परिस्थितियों में सरकार की प्रतिक्रिया और कूटनीतिक कदमों पर देश-विदेश की नजरें टिकी हुई हैं।