राजनीतिक पार्टियों का इन राज्यों में होगा कड़ा इम्तिहान, 20 करोड़ मतदाता तय करेंगे दिग्गजों का भविष्य

भारत के पांच राज्यों असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, केरलम और पुडुचेरी में जल्द विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। करीब 20 करोड़ मतदाता इन चुनावों में हिस्सा लेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति और 2029 के लोकसभा चुनाव की दिशा तय कर सकते हैं।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 15 March 2026, 3:39 PM IST

New Delhi: देश में सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है। आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरु हो गया है। हर दल अपने-अपने मोर्चे तैयार कर रहा है। आने वाले कुछ हफ्तों में भारत के 4  राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं।

इन चुनावों को सिर्फ क्षेत्रीय सत्ता की लड़ाई नहीं माना जा रहा, बल्कि यह आने वाले वर्षों में राष्ट्रीय राजनीति की दिशा भी तय कर सकते हैं। करीब 20 करोड़ मतदाताओं वाले इन राज्यों में होने वाला मतदान यह तय करेगा कि देश में किस पार्टी का प्रभाव कितना बढ़ेगा और किसकी पकड़ कमजोर होगी।

इन राज्यों में होंगे चुनाव

आने वाले समय में जिन राज्यों में चुनाव होने जा रहे हैं उनमें Assam, West Bengal, Tamil Nadu, Keralam और केंद्र शासित प्रदेश Puducherry शामिल हैं। ये चार राज्य और एक केंद्र शासित प्रदेश मिलकर देश की कुल आबादी का लगभग एक पांचवां हिस्सा बनाते हैं।

इन इलाकों में करीब 20 करोड़ लोग रहते हैं, जो भारत की कुल जनसंख्या का लगभग 17 से 18 प्रतिशत है। राजनीतिक महत्व की बात करें तो इन राज्यों से लोकसभा में कुल 116 सांसद चुने जाते हैं, जो संसद की 543 सीटों का करीब 21 प्रतिशत हिस्सा है। इसके अलावा राज्यसभा में भी इन राज्यों के विधायक मिलकर लगभग 51 सदस्य भेजते हैं। यही वजह है कि इन चुनावों को राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है।

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दक्षिण और पूर्व में विस्तार चाहती है BJP

इन चुनावों को भाजपा के लिए इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि पार्टी लंबे समय से दक्षिण भारत और पूर्वी भारत में अपना आधार मजबूत करने की कोशिश कर रही है। Tamil Nadu और Kerala ऐसे राज्य हैं जहां भाजपा को अभी तक कभी सरकार बनाने का मौका नहीं मिला है।

West Bengal में 2021 के विधानसभा चुनाव में TMC ने 215 सीटें जीतकर भारी जीत दर्ज की थी जबकि भाजपा को 77 सीटों से संतोष करना पड़ा था। हालांकि 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने देशभर में बड़ी जीत हासिल की थी, लेकिन तमिलनाडु और केरल जैसे राज्यों में उसे एक भी सीट नहीं मिली थी।

डबल इंजन सरकार का नारा

भाजपा इन चुनावों में “डबल इंजन सरकार” का नारा दे रही है। पार्टी का कहना है कि अगर केंद्र और राज्य दोनों जगह एक ही गठबंधन की सरकार होगी तो विकास की रफ्तार तेज होगी। भाजपा सांसद Bhola Singh का कहना है कि जहां डबल इंजन सरकार नहीं होती वहां प्रधानमंत्री की योजनाएं पूरी तरह लोगों तक नहीं पहुंच पातीं। उनका दावा है कि अगर राज्य में भी भाजपा या NDA की सरकार बनेगी तो विकास की गति चार गुना तक बढ़ सकती है।

विपक्ष के लिए भी बड़ी चुनौती

इन चुनावों को विपक्ष के लिए भी अस्तित्व की लड़ाई माना जा रहा है। Indian National Congress और INDIA Alliance इन राज्यों में अपनी पकड़ बनाए रखना चाहते हैं। DMK नेता Dayanidhi Maran ने हाल ही में कहा कि चुनाव की तारीखों की घोषणा में देरी को लेकर कई सवाल उठे हैं। वहीं शिवसेना (यूबीटी) नेता Sanjay Raut ने चुनाव आयोग पर भी टिप्पणी की है।

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चुनाव आयोग की तैयारियां

चुनाव की तैयारियों को लेकर Election Commission of India भी सक्रिय हो गया है। आयोग के अधिकारियों ने पिछले कुछ हफ्तों में सभी राज्यों का दौरा किया और प्रशासनिक तैयारियों का जायजा लिया। फरवरी में असम, तमिलनाडु और पुडुचेरी में समीक्षा बैठकें हुईं। इसके बाद 6 और 7 मार्च को केरल और 9-10 मार्च को पश्चिम बंगाल में भी तैयारियों का निरीक्षण किया गया।

अप्रैल-मई में हो सकता है मतदान

रिपोर्ट्स के मुताबिक इस बार चुनाव के चरण कम हो सकते हैं। पिछली बार पश्चिम बंगाल में आठ चरणों में मतदान हुआ था, लेकिन इस बार संभव है कि इसे घटाकर पांच या छह चरणों में किया जाए। चुनाव आयोग के संकेतों के मुताबिक मतदान अप्रैल और मई के बीच हो सकता है और नतीजे मई की शुरुआत में सामने आ सकते हैं।

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  • New Delhi

Published : 
  • 15 March 2026, 3:39 PM IST