
DDC पीयूष सिन्हा (IMG: Dynamite News)
Deoghar: देवघर में बाबा बैद्यनाथ की नगरी इन दिनों आस्था के सबसे बड़े सैलाब से गुजर रही है। श्रावणी मेला अपने अंतिम दौर में पहुंच चुका है, लेकिन कांवरियों की भीड़ कम होने के बजाय लगातार चुनौती बढ़ा रही है। पिछले 23 दिनों में 51 लाख 12 हजार 531 श्रद्धालु बाबा बैद्यनाथ मंदिर में जलार्पण कर चुके हैं। आंकड़ा अपने आप में मेले की विशालता बताने के लिए काफी है। मंदिर में बाह्य और आंतरिक अर्घा के जरिए लाखों श्रद्धालुओं ने बाबा पर जल चढ़ाया। लेकिन अब प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंतिम सोमवारी की है।
श्रावणी मेला सिर्फ आस्था का सबसे बड़ा आयोजन नहीं है, बल्कि देवघर की अर्थव्यवस्था को भी बड़े स्तर पर गति देता है। 23 दिनों में बाबा बैद्यनाथ मंदिर को विभिन्न मदों से 8 करोड़ 23 लाख 47 हजार 741 रुपये की आय हुई है। कांवरियों की भारी संख्या का असर मंदिर के साथ-साथ पूरे शहर के कारोबार पर दिखाई देता है। होटल, लॉज, पेड़ा कारोबार, पूजा सामग्री, परिवहन और छोटे-बड़े दुकानदारों के कारोबार में मेले के दौरान तेजी आती है।
श्रावणी मेले के दौरान दूसरे राज्यों से आने वाले वाहनों की संख्या भी काफी बढ़ जाती है। परिवहन विभाग को दूसरे राज्यों में पंजीकृत व्यावसायिक वाहनों से राज्य प्रवेश शुल्क के रूप में 70 लाख 09 हजार 800 रुपये की आय हुई है। वहीं पेड़ा, सिंदूर और दूसरी व्यावसायिक गतिविधियों से 3 करोड़ 10 लाख 58 हजार रुपये की प्राप्ति बताई गई है।
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मेला क्षेत्र में अस्थायी विद्युत व्यवस्था के माध्यम से भी 73 लाख 27 हजार 830 रुपये की आय दर्ज की गई है। वहीं नगर निगम को अंतरराज्यीय बस पड़ाव, शौचालय और दूसरी सुविधाओं के जरिए भी राजस्व मिला है। हालांकि इस पूरे आयोजन में प्रशासन और विभिन्न विभागों को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भारी संसाधन भी लगाने पड़ते हैं।
23 दिनों तक मेले की व्यवस्था संभालने के बाद अब पुलिस के सामने सबसे बड़ा इम्तिहान अंतिम सोमवारी का है। प्रेस ब्रीफिंग में एसपी प्रवीण पुष्कर ने सुरक्षा व्यवस्था और भीड़ नियंत्रण को लेकर जानकारी दी। पुलिस का कहना है कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुचारु व्यवस्था को लेकर जवान लगातार मुस्तैद हैं। लेकिन अंतिम सोमवारी पर भीड़ का दबाव बढ़ने की स्थिति में पुलिस के सामने चुनौती कई गुना बढ़ सकती है। बैरिकेडिंग, रूट डायवर्जन, पार्किंग, यातायात प्रबंधन और श्रद्धालुओं की सुरक्षित निकासी जैसे इंतजामों को अंतिम दिन सबसे ज्यादा दबाव झेलना पड़ सकता है।
मेले के दौरान सामने आई कमियों को चिन्हित कर उन्हें दूर करने की बात भी प्रशासन की ओर से कही गई है। अंतिम सोमवारी से पहले यह प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण मौका है। 23 दिनों के अनुभव में जो समस्याएं सामने आईं, अब उन पर तेजी से काम करना होगा। क्योंकि आखिरी सोमवार को व्यवस्था में छोटी सी चूक भी बड़ी परेशानी का कारण बन सकती है।
जैसे-जैसे मेला अंतिम चरण में पहुंच रहा है, सफाई और स्वास्थ्य सेवाओं पर भी दबाव बढ़ने की संभावना है। नगर निगम की ओर से साफ-सफाई, शौचालय, बस पड़ाव और दूसरी सुविधाओं की जानकारी दी गई है। स्वास्थ्य विभाग ने भी मेला क्षेत्र में उपलब्ध व्यवस्थाओं का ब्यौरा रखा है। लेकिन अंतिम सोमवारी में इन सुविधाओं की असली परीक्षा उस समय होगी, जब बड़ी संख्या में श्रद्धालु एक साथ मेला क्षेत्र में मौजूद होंगे।
श्रावणी मेले के 23 दिनों के आंकड़े निश्चित रूप से इसकी विशालता बताते हैं। 51 लाख से ज्यादा श्रद्धालु, 8.23 करोड़ रुपये से ज्यादा की मंदिर आय और करोड़ों रुपये की दूसरी कारोबारी गतिविधियां देवघर में आस्था और अर्थव्यवस्था के बड़े मेल की तस्वीर पेश करती हैं। लेकिन इन आंकड़ों के बीच सबसे महत्वपूर्ण सवाल श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का है।
Location : Deoghar
Published : 22 August 2026, 5:06 PM IST