महाराष्ट्र में सरकारी क्वार्टर पर कब्जा अब नहीं चलेगा, तबादले के बाद नियम हुए सख्त, देखें और क्या-क्या बदलाव हुए

महाराष्ट्र सरकार ने सरकारी आवासों को लेकर नियम सख्त कर दिए हैं। तबादले के बाद सरकारी क्वार्टर पर कब्जा बनाए रखने वालों के लिए अब मुश्किल बढ़ सकती है। हालांकि, स्कूली बच्चों की पढ़ाई को देखते हुए सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सीमित अवधि तक आवास में रहने की छूट दी गई है। जानिए नए नियमों में किसे राहत मिलेगी, कितने समय तक सरकारी आवास में रह सकेंगे कर्मचारी और पांच गुना लाइसेंस शुल्क का क्या प्रावधान है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 15 August 2026, 1:59 PM IST

Maharashtra News: सरकारी नौकरी गई या तबादला हुआ, लेकिन सरकारी क्वार्टर खाली नहीं किया? अब महाराष्ट्र में ऐसा करना आसान नहीं होगा। सरकार ने सरकारी आवासों पर लंबे समय तक कब्जा बनाए रखने की व्यवस्था को सख्त कर दिया है। हालांकि, स्कूली बच्चों वाले सेवानिवृत्त कर्मचारियों को राहत दी गई है। नए नियमों में यह साफ किया गया है कि किन परिस्थितियों में कर्मचारी रिटायरमेंट के बाद भी सरकारी आवास में रह सकेंगे और इसके लिए उन्हें कितना शुल्क देना होगा।

बच्चों की पढ़ाई के लिए मिलेगी राहत

महाराष्ट्र सरकार के नए फैसले के मुताबिक, अगर किसी सेवानिवृत्त कर्मचारी का बच्चा पहली से 12वीं कक्षा के बीच पढ़ रहा है, तो कर्मचारी बच्चे का शैक्षणिक वर्ष पूरा होने तक सरकारी आवास में रह सकता है। इसके लिए कर्मचारी को तय दस्तावेज जमा करने होंगे। साथ ही, उसे मौजूदा लाइसेंस शुल्क की दर से पांच गुना शुल्क देना होगा। यह सुविधा सिर्फ मुंबई तक सीमित नहीं है। सामान्य प्रशासन विभाग के अधीन मुंबई स्थित सरकारी आवासों के साथ-साथ राज्य के दूसरे हिस्सों में मौजूद सरकारी आवासों पर भी यह व्यवस्था लागू होगी।

तबादले के बाद आवास पर कब्जा रखने वालों पर सख्ती

सरकार ने खास तौर पर उन कर्मचारियों को लेकर नियम कड़े किए हैं, जिनका मुंबई से बाहर तबादला हो चुका है। ऐसे कर्मचारियों द्वारा सरकारी आवास खाली नहीं करने की स्थिति को रोकने के लिए नए प्रावधान किए गए हैं। यानी तबादला किसी दूसरे शहर या इलाके में हो गया है तो सरकारी क्वार्टर पर कब्जा बनाए रखना अब आसान नहीं होगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि ये नियम सिर्फ सामान्य सेवानिवृत्ति वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं हैं। अनिवार्य रूप से सेवानिवृत्त किए गए या सेवा से बर्खास्त कर्मचारियों पर भी ये प्रावधान लागू होंगे।

रिटायरमेंट की तारीख से तय होगी रहने की अवधि

नए नियमों में रिटायरमेंट के समय को भी आधार बनाया गया है। जनवरी से जून के बीच सेवानिवृत्त होने वाला कर्मचारी, अगर उसका बच्चा स्कूल में पढ़ रहा है, तो उसी साल जून के अंत तक सरकारी आवास में रह सकता है। वहीं जुलाई से दिसंबर के बीच रिटायर होने वाले कर्मचारी को अगले कैलेंडर वर्ष के जून के अंत तक रहने की अनुमति दी जा सकती है। मसलन, अगर कोई कर्मचारी जुलाई से दिसंबर 2026 के बीच रिटायर होता है और उसका बच्चा स्कूल में पढ़ रहा है, तो वह 30 जून 2027 तक सरकारी आवास में रह सकता है। इसके लिए जरूरी दस्तावेज और निर्धारित पांच गुना लाइसेंस शुल्क की शर्त पूरी करनी होगी।

सरकार का मकसद क्या है?

सरकार की इस व्यवस्था का मकसद एक तरफ स्कूली बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न होने देना है, तो दूसरी तरफ सरकारी आवासों पर अनावश्यक कब्जे को रोकना भी है। यानी जरूरतमंद परिवारों को सीमित राहत मिलेगी, लेकिन तबादले या नौकरी खत्म होने के बाद सरकारी आवास को अपनी निजी संपत्ति की तरह बनाए रखने की गुंजाइश कम होगी।

Location :  Maharashtra

Published :  15 August 2026, 1:59 PM IST