MPSC News: आखिर पेपर में ऐसा क्या हुआ कि हजारों छात्र सड़क पर उतर आए? चेयरमैन के इस्तीफे तक पहुंचा मामला

पुणे में MPSC परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं के खिलाफ हजारों अभ्यर्थियों ने आक्रोश मार्च निकाला। छात्रों ने आयोग के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे, कथित गड़बड़ियों की जांच और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग की। सुप्रिया सुले, रोहित पवार और विश्वजीत कदम ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया।

Post Published By: Poonam Rajput
Updated : 8 September 2026, 12:09 PM IST

Mumbai: महाराष्ट्र लोक सेवा आयोग (MPSC) की परीक्षाओं में कथित पेपर लीक और अनियमितताओं को लेकर सोमवार को पुणे में हजारों अभ्यर्थियों ने जोरदार प्रदर्शन किया। छात्रों ने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और कथित गड़बड़ियों की निष्पक्ष जांच की मांग को लेकर ‘आक्रोश मार्च’ निकाला। प्रदर्शनकारियों ने MPSC के अध्यक्ष और सचिव के इस्तीफे की मांग भी उठाई।

ओंकारेश्वर मंदिर से कलेक्ट्रेट तक निकला मार्च

अभ्यर्थियों का यह मार्च ओंकारेश्वर मंदिर चौक से शुरू हुआ और पुणे जिला कलेक्ट्रेट पहुंचकर समाप्त हुआ। बड़ी संख्या में छात्र हाथों में अपनी मांगों से जुड़े पोस्टर लेकर पहुंचे। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में युवा वर्षों की मेहनत और समय लगाते हैं, ऐसे में परीक्षा प्रक्रिया में किसी भी तरह की कथित गड़बड़ी उनके भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

छात्रों ने मांग की कि आयोग के शीर्ष पदों पर तत्काल साफ छवि वाले अधिकारियों की नियुक्ति की जाए और परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाया जाए।

सुप्रिया सुले और रोहित पवार भी प्रदर्शन में पहुंचे

प्रदर्शन को विपक्षी दलों का भी समर्थन मिला। राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) के विधायक रोहित पवार, बारामती से सांसद सुप्रिया सुले और कांग्रेस विधायक विश्वजीत कदम प्रदर्शनकारियों के साथ पहुंचे।

सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार से प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के साथ बातचीत के लिए जिम्मेदार अधिकारी भेजने की अपील की। वहीं रोहित पवार ने छात्रों की मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि यह आंदोलन राजनीतिक नहीं, बल्कि युवाओं के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है।

‘20 घंटे पढ़ने वाले छात्रों के साथ अन्याय क्यों?’

रोहित पवार ने MPSC एक्साइज विभागीय परीक्षा से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने एक संयुक्त सचिव स्तर के अधिकारी पर परीक्षा के मार्किंग पैटर्न से जुड़ी जानकारी लीक करने के आरोपों का हवाला देते हुए आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि जिन उम्मीदवारों को परीक्षा की तैयारी के लिए दिन-रात मेहनत करनी पड़ती है, उनके सामने यदि परीक्षा से जुड़ी सामग्री के कथित लीक या बिक्री की बातें सामने आती हैं तो यह बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि मेहनती अभ्यर्थियों के साथ अन्याय स्वीकार नहीं किया जाएगा।

औषधि निरीक्षक परीक्षा को लेकर भी उठे सवाल

प्रदर्शनकारियों ने औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) परीक्षा को लेकर उठाई गई आपत्तियों पर आठ दिनों के भीतर आयोग से स्पष्टीकरण मांगा। इसके साथ ही कथित अनियमितताओं की जांच शुरू करने की मांग की गई।

छात्रों ने 2025 राज्य सेवा मुख्य परीक्षा और कृषि सेवा परीक्षा के वर्णनात्मक प्रश्नपत्रों के मूल्यांकन में कथित गड़बड़ियों की भी जांच कराने की मांग रखी। इसके अलावा मुंबई अपराध शाखा की ओर से MPSC को सौंपी गई प्रारंभिक जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने की मांग भी की गई।

सात गिरफ्तारियों के बाद और बढ़ा आक्रोश

मुंबई अपराध शाखा मार्च में आयोजित MPSC औषधि निरीक्षक (ग्रुप-बी) स्क्रीनिंग परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक मामले की जांच कर रही है। इस मामले में पुलिस ने सात लोगों को गिरफ्तार किया है। इनमें परीक्षा में सातवां स्थान हासिल करने वाली एक महिला अभ्यर्थी के शामिल होने की बात भी सामने आई है।

प्रदर्शनकारियों ने MPSC के अवर सचिव अभिजीत लेंडवे के कार्यकाल में आयोजित सभी परीक्षाओं का फॉरेंसिक ऑडिट कराने की मांग की। साथ ही लेंडवे और मामले में आरोपी दो अन्य सहायक अनुभाग अधिकारियों विश्वेश्वर दत्तात्रेय नकटे और गोपाल भट्टू मराठे के सेवा रिकॉर्ड तथा पदोन्नति के मानदंडों की विस्तृत जांच की मांग की।

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25 अक्टूबर की परीक्षा को लेकर भी बड़ी मांग

अभ्यर्थियों ने 25 अक्टूबर 2026 को प्रस्तावित ग्रुप-सी क्लर्क और टाइपिस्ट प्रारंभिक परीक्षा को पूरी तरह पारदर्शी तरीके से कराने की मांग की। इसके अलावा स्टेनोग्राफर पद को दोबारा बहाल करने की मांग भी उठाई गई।

वहीं, MPSC अध्यक्ष विवेक भीमनवार ने पिछले सप्ताह कहा था कि औषधि निरीक्षक परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक की घटना उनके अध्यक्ष पद संभालने से पहले की है। उनके मुताबिक ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए आयोग ने एक उच्चस्तरीय आंतरिक समिति बनाई है। राज्य सरकार ने भी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार के सुझाव देने के लिए अलग समिति गठित की है।

हजारों अभ्यर्थियों की भीड़ ने साफ संकेत दिया कि प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर युवाओं में असंतोष बढ़ रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती और भर्ती प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता नहीं आती, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है।

Location :  Mumbai

Published :  8 September 2026, 12:09 PM IST