World Hypertension Day: स्क्रीन टाइम, तनाव और जंक फूड से युवाओं में बढ़ रहा मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा

आरएमएल अस्पताल और एबीवीआईएमएस के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि एडीएचडी वाले युवाओं में मोटापा और हाई ब्लड प्रेशर का खतरा अधिक है। स्क्रीन टाइम, तनाव और जंक फूड इसके प्रमुख कारण हैं। समय पर पहचान, व्यायाम और काउंसलिंग से जोखिम कम किया जा सकता है।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 17 May 2026, 9:36 AM IST

New Delhi: विश्व उच्च रक्तचाप दिवस के अवसर पर युवाओं की बिगड़ती मानसिक और शारीरिक सेहत को लेकर एक अहम अध्ययन सामने आया है। डॉ राम मनोहर लोहिया अस्पताल और अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एबीवीआईएमएस) के शोध में पाया गया है कि ध्यान की कमी और हाइपर एक्टिविटी डिसऑर्डर (एडीएचडी) से पीड़ित युवाओं में पेट के आसपास मोटापा बढ़ने का खतरा अधिक होता है, जो आगे चलकर हाई ब्लड प्रेशर की वजह बन सकता है।

युवाओं में तेजी से बढ़ रहा सेंट्रल ओबेसिटी का खतरा

अध्ययन के अनुसार, संयुक्त प्रकार की एडीएचडी से जूझ रहे युवाओं में कमर की चौड़ाई बढ़ने का खतरा सामान्य युवाओं की तुलना में 2.4 गुना अधिक पाया गया। वहीं, वेस्ट-हाइट रेशियो बढ़ने की आशंका 1.9 गुना ज्यादा देखी गई। शोध में यह भी सामने आया कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, एडीएचडी और मोटापे के बीच संबंध और मजबूत होता जाता है।

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हालांकि शोध में हाई ब्लड प्रेशर के साथ सीधा सांख्यिकीय संबंध नहीं मिला, लेकिन एडीएचडी से प्रभावित युवाओं में उम्र के साथ ब्लड प्रेशर बढ़ने की प्रवृत्ति स्पष्ट रूप से देखी गई। यह अध्ययन खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर के कॉलेज छात्रों और युवा वयस्कों पर किया गया। अध्ययन को अमेरिकन जर्नल ऑफ ह्यूमन बायोलॉजी में प्रकाशित किया गया है।

खराब जीवनशैली बना रही युवाओं को बीमार

अध्ययन के शोधकर्ता और आरएमएल अस्पताल के मनोरोग विभाग के प्रोफेसर डॉ लोकेश शेखावत ने बताया कि एडीएचडी के कारण युवाओं में बिना सोचे-समझे प्रतिक्रिया देने और आवेगपूर्ण व्यवहार की प्रवृत्ति बढ़ जाती है। इसका असर उनकी दिनचर्या और खानपान पर पड़ता है।

उन्होंने कहा कि ऐसे युवा अक्सर जंक फूड का अधिक सेवन करते हैं, शारीरिक गतिविधियां कम करते हैं और अनियमित जीवनशैली अपनाते हैं। यही कारण है कि मोटापा और भविष्य में हाई ब्लड प्रेशर का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। दिल्ली-एनसीआर जैसे शहरी इलाकों में बढ़ता स्क्रीन टाइम, तनाव और असंतुलित दिनचर्या भी स्थिति को गंभीर बना रहे हैं।

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समय पर पहचान और काउंसलिंग जरूरी

डॉ शेखावत ने कहा कि यदि एडीएचडी की समय पर पहचान कर सही तरीके से प्रबंधन किया जाए तो मोटापा और हाइपरटेंशन जैसी समस्याओं को काफी हद तक रोका जा सकता है। उन्होंने युवाओं को नियमित ब्लड प्रेशर जांच कराने, संतुलित आहार लेने और रोजाना व्यायाम करने की सलाह दी। साथ ही, ध्यान केंद्रित करने में परेशानी या हाइपर एक्टिविटी जैसे लक्षण दिखने पर डॉक्टर से परामर्श और जरूरत पड़ने पर काउंसलिंग कराने की भी सलाह दी गई है।

Location :  New Delhi

Published :  17 May 2026, 9:36 AM IST