Valentine’s Day पर बढ़ता खर्च Gen Z के लिए प्यार को दबाव में बदल रहा है। सोशल मीडिया, महंगे गिफ्ट्स, EMI ट्रेंड और तुलना की संस्कृति ने रिश्तों को आर्थिक तनाव से जोड़ दिया है। आईये जानते हैं कि आज की युवा पीढ़ी प्यार और पैसों के बीच कैसे संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है।

वैलेंटाइन डे पर जेन-जी पर बढ़ता दबाव
New Delhi: Valentine’s Day कभी प्यार जताने का एक सादा-सा मौका हुआ करता था, जहां एक गुलाब, एक कार्ड या साथ बिताया गया वक्त ही काफी माना जाता था। लेकिन आज की Gen Z पीढ़ी के लिए यह दिन सिर्फ भावनाओं का नहीं, बल्कि खर्च, तुलना और सामाजिक दबाव का प्रतीक बनता जा रहा है।
सोशल मीडिया, ब्रांड मार्केटिंग और “परफेक्ट कपल” की छवि ने प्यार को धीरे-धीरे एक ऐसे पैमाने में बदल दिया है, जहां भावनाओं से ज्यादा जेब की हैसियत मायने रखने लगी है।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर Valentine’s Day से पहले ही कपल रील्स, लग्जरी डेट वीडियो और महंगे गिफ्ट्स की झड़ी लग जाती है। Instagram और Snapchat पर दिखाई जाने वाली ये चमकदार तस्वीरें अनजाने में Gen Z के मन में यह सवाल खड़ा कर देती हैं कि अगर उन्होंने कुछ “खास” या “महंगा” नहीं किया, तो क्या उनका प्यार अधूरा रह जाएगा।
विशेषज्ञ मानते हैं कि इसी तुलना के चलन ने प्यार को एक निजी एहसास से ज्यादा शो ऑफ बना दिया है।
इसका सीधा असर Valentine’s Day पर होने वाले खर्च में साफ दिखाई देता है। कैफे और रेस्टोरेंट्स स्पेशल कपल मेन्यू के नाम पर कीमतें बढ़ा देते हैं, मूवी टिकट, होटल और ट्रैवल पैकेज अचानक महंगे हो जाते हैं और ऑनलाइन गिफ्ट प्लेटफॉर्म्स पर भी दाम सामान्य दिनों के मुकाबले कई गुना बढ़ जाते हैं।
ऐसे में एक सामान्य Gen Z कपल के लिए Valentine’s Day मनाने का खर्च दो से तीन हजार से बढ़कर कई बार दस हजार रुपये तक पहुंच जाता है, जो खासतौर पर मिडिल-क्लास युवाओं के लिए भारी पड़ता है।
वैलेंटाइन डे पर जेन-जी पर बढ़ता दबाव
खर्च के इस दबाव के साथ एक नया ट्रेंड भी तेजी से उभर रहा है, EMI और “Buy Now Pay Later” के जरिए प्यार जताने का। स्मार्टवॉच, ईयरबड्स, महंगे परफ्यूम और ब्रांडेड गिफ्ट्स अब ऐसे विकल्प बन चुके हैं, जिन्हें युवा बिना पूरी रकम चुकाए खरीद लेते हैं। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स चेतावनी देते हैं कि इस तरह की भावनात्मक खरीदारी युवाओं को कर्ज के ऐसे चक्र में फंसा सकती है, जहां रिश्तों की खुशी कुछ समय की और आर्थिक तनाव लंबे समय का बन जाता है।
इस आर्थिक दबाव का मानसिक असर भी गहरा है। Gen Z पहले ही करियर की अनिश्चितता, महंगाई और जॉब स्ट्रेस से जूझ रही है। ऐसे माहौल में Valentine’s Day का अतिरिक्त खर्च कई युवाओं में guilt, anxiety और self-doubt पैदा करता है। कई लोग मानते हैं कि सिंगल होना या कम खर्च करना उन्हें समाज में कमतर साबित कर देता है। मनोवैज्ञानिक इस स्थिति को “Romantic Financial Anxiety” का नाम देते हैं, जहां प्यार की उम्मीदें मानसिक और आर्थिक दोनों तरह का बोझ बन जाती हैं।
Gen Z and Valentine’s Day: जानें क्यों रिश्तों से ज्यादा एक्सपीरियंस को यह पीढ़ी दे रही अहमियत
Valentine’s Day पर रिश्तों में एक अनकहा दबाव भी देखने को मिलता है, “अगर प्यार है तो साबित करो।” यह सोच कई बार रिश्तों को मजबूती देने के बजाय उनमें तनाव पैदा कर देती है। खासकर वे युवा, जिनकी आमदनी सीमित है, इस दबाव में खुद को असहज महसूस करते हैं। प्यार को साबित करने की यह दौड़ कई बार रिश्तों की सच्चाई से ज्यादा बाहरी दिखावे पर टिक जाती है।
हालांकि, इसी माहौल के बीच Gen Z का एक बड़ा हिस्सा इस ट्रेंड के खिलाफ भी खड़ा हो रहा है। कई युवा अब Valentine’s Day को सादगी से मनाने या पूरी तरह नजरअंदाज करने लगे हैं। “Self-Love Day”, “Low-Key Dates” और बिना खर्च के साथ समय बिताने जैसे विचार लोकप्रिय हो रहे हैं। हाथ से लिखा नोट, ईमानदार बातचीत और इमोशनल कनेक्शन को फिर से महत्व दिया जाने लगा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार और ब्रांड्स ने Valentine’s Day को एक बड़े कमर्शियल इवेंट में बदल दिया है, जहां प्यार को एक प्रोडक्ट की तरह पेश किया जाता है। ऐसे में जरूरी है कि युवा खुद तय करें कि उनके रिश्ते की कीमत क्या है। क्योंकि सच्चा रिश्ता महंगे गिफ्ट्स या EMI पर नहीं, बल्कि समझ, सम्मान और ईमानदारी पर टिका होता है।
अंत में सवाल वही है, क्या प्यार सच में महंगा हो गया है, या हमने उसे महंगा बना दिया है? शायद अब वक्त आ गया है कि Gen Z प्यार को फिर से उसकी सादगी में तलाशे, जहां भावनाएं खर्च से नहीं, जुड़ाव से मापी जाएं।