
यूपी की पारंपरिक डिशेज (Img- AI)
Lucknow: कड़ाके की धूप और पसीने वाली गर्मी को बाय-बाय बोलकर यूपी में मानसून ने धमाकेदार एंट्री मार ली है। जैसे ही आसमान से ठंडी बूंदें गिरती हैं, यूपी वालों का दिल सबसे पहले एक ही बात बोलता है "चलो, कुछ गरमा-गरम बनाते हैं!" अवध के नवाबों की गलियों से लेकर पूर्वांचल और बुंदेलखंड के आंगनों तक, हर घर की रसोई से ऐसी खुशबू आने लगती है कि राह चलता आदमी भी रुक जाए।
वैसे, यूपी में बारिश का मजा सिर्फ मौसम से नहीं, बल्कि थाली के स्वाद से दोगुना होता है। यहां की मानसून स्पेशल डिशेज सिर्फ जीभ का स्वाद नहीं बढ़ातीं, बल्कि इस उमस भरे मौसम में पेट को भी खुश रखती हैं। तो चलिए, आज आपको सैर कराते हैं यूपी के उन 5 एवरग्रीन स्वादों की, जिनके बिना यहां के लोगों की बरसात एकदम अधूरा है!
पश्चिमी यूपी और ग्रामीण अंचलों में बारिश के दिनों में गुलगुले बनाने की प्राचीन परंपरा है। गेहूं के आटे, गुड़ और सौंफ के मिश्रण से बनने वाले ये मीठे पकौड़े मानसून के ठंडे मौसम में शरीर को जरूरी ऊर्जा देते हैं। हालिया फूड रिसर्च बताते हैं कि गुड़ में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स और मिनरल्स मानसून में होने वाले मौसमी संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं। रिमझिम बारिश में गर्मागर्म गुलगुले और चाय का कॉम्बिनेशन लाजवाब होता है।
वाराणसी की प्रसिद्ध टमाटर चाट का असली मजा मानसून में ही आता है। उबले टमाटर, आलू, देसी घी, और मसालों के गाढ़े मिश्रण पर जब गरम चीनी-जीरे का सीरा और सोंठ डाली जाती है, तो इसका तीखा-मीठा स्वाद रूह को तृप्त कर देता है। बारिश के दिनों में शरीर का मेटाबॉलिज्म धीमा हो जाता है, ऐसे में इस चाट में इस्तेमाल होने वाले अदरक, जीरा और हींग पाचन क्रिया को दुरुस्त रखने में मदद करते हैं।
नवाबों के शहर लखनऊ में मानसून की सुबह की शुरुआत बिना 'खस्ता कचौड़ी' के अधूरी है। उड़द दाल की पिट्ठी भरी करारी कचौड़ी को जब चटपटे आलू और उबले सफेद चने की सब्जी के साथ परोसा जाता है, तो स्वाद का एक अनोखा विस्फोट होता है। स्थानीय सर्वेक्षणों के अनुसार, बारिश के दिनों में लखनऊ के चाट और कचौड़ी भंडारों पर पर्यटकों और स्थानीय लोगों की भीड़ 40 फीसदी तक बढ़ जाती है।
ब्रज क्षेत्र (मथुरा-आगरा) में मानसून का स्वागत 'बेड़मी पूड़ी' से किया जाता है। मोटे पिसे गेहूं के आटे और सूजी में मूंठ डालकर तली गई ये पूड़ियां लंबे समय तक क्रिस्पी रहती हैं। इसे मसालेदार हींग वाले आलू या खट्टी-मीठी कद्दू (सीताफल) की सब्जी के साथ खाया जाता है। बारिश के सुहावने मौसम में यह भारी और तृप्त करने वाला नाश्ता बेहद लोकप्रिय है।
Deoria Rainfall: मानसून की पहली बारिश और देवरिया में पानी-पानी, गर्मी के बीच दफ्तर लबालब
चाहे यूपी का कोई भी कोना हो गोरखपुर, कानपुर या प्रयागराज बारिश शुरू होते ही हर नुक्कड़ पर कड़ाही चढ़ जाती है। प्याज, आलू, पनीर और हरी मिर्च के पकौड़े (मंगौड़े) और साथ में अदरक-इलायची वाली कुल्हड़ की चाय। रिसर्च के मुताबिक, मिट्टी के बर्तनों (कुल्हड़) में चाय पीने से मिलने वाले एल्कलाइन तत्व मानसून में एसिडिटी की समस्या को कम करते हैं, और चाय की गर्माहट कफ-सर्दी से राहत देती है।
Location : Lucknow
Published : 3 July 2026, 12:55 PM IST