
बरसात की बूंदें और विरह-मिलन का संगीत (Img: AI)
New Delhi: जब भी बिहारी गानों का जिक्र होता है, तो सबसे पहले 'लगावे लू जब लिपस्टिक' जैसे गानों के बोल जुबां पर सबसे पहले आते हैं। ऐसे गाने हर खास मौकों में जान डाल देते हैं और गाने की शुरूआत होते ही लोगों के पैर थिरकने पर मजबूर हो जाते हैं।
कई लोगों को लगती है कि यही कुछ गाने बिहार के मशहूर गाने हैं, लेकिन आपको बता दें कि जैसे चैत्र महीने में चैती गीत गाए जाते हैं, इसी तरह तपती गर्मी के बाद जब बारिश के फुहार के साथ सावन की शुरुआत होती है, तब पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार के गांवों में कजरी के बोल हर तरफ गुंजते हैं।
क्या आप जानते हैं कि कजरी सिर्फ एक लोकगीत नहीं, बल्कि महिलाओं की खुशियों और सावन की सुंदरता की कहानी है। जब सावन और भादो के महीने में बरसात अपने सुहाने मौसम के साथ धरती को खुशहाल करती है, तब महिलाएं झूला झूलते हुए कजरी गीत गाकर सावन के आगमन का स्वागत करती हैं।
कई बार लोग शब्द का बिना अर्थ जाने अनुवाद करते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि कजरी शब्द का मतलब क्या होता है? अगर नहीं, तो बता दें कि कजरी का अर्थ कजरी या काजल से मिलकर बना है, जिसका सीधा संबंध काले-काले बादलों से है।
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आपको जानकर हैरानी होगी कि कजरी गीत की शुरुआत यूपी के मिर्जापुर से हुई थी, जिसके बाद यह गीत भोजपुर, बनारस और मिथिलांचल तक जा पहुंची। आज के समय में कजरी गीत ने बिहार की संस्कृति में अपनी जगह बना ली है और इसको गाए बिना सावन की पावन महीना अधूरा माना जाता है।
कजरी गीत सावन की शुरुआत की खुशियों के रूप में महिलाएं गाती हैं। तपती गर्मी के खत्म होने के बाद जब बारिश की बूंदें धरती को ठंडा करती है, तब महिलाएं अपनी खुशियों को कजरी के जरिए बयां करती हैं।
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कजरी सिर्फ खुशियों के लिए ही नहीं, बल्कि विरह की व्यथा को बताने के लिए भी गाया जाता है। पहले के समय में जब कामकाज को लेकर पति अपनी पत्नी से दूर शहर जाते हैं, तब सावन के सुहावने मौसम में उनकी याद में महिलाएं कजरी गाती थीं। ऐसे माहौल में गांवों की महिलाएं सावन और बारिश का आनंद लेने के लिए अपने इलाकों में झूला लगाकर झूला झूलती हैं और साथ मिलकर कजरी भी गाया करती हैं।
कजरी को धार्मिक मान्यताओं से भी जोड़ा जाता है। बता दें कि इसे देवी विंध्यवासिनी के गुणगान और राधा-कृष्ण की लीलाओं से जोड़कर कजरी में रे हरी की तान के रूप में गाया जाता है। कजरी गीत बिहार की ऐसी लोकसंस्कृति है, जिसे सदियों से गीत के रूप में गाया जाता है। यह परंपरा पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही है।
Location : New Delhi
Published : 6 August 2026, 6:47 PM IST