Nagin Dance History: ‘मन डोले मेरा तन डोले’… जानें 72 साल पहले कैसे शुरू हुआ ‘नागिन डांस’ का सफर, आज भी बारात की है जान

भारतीय शादियों और बारातों की जान 'नागिन डांस' का इतिहास 72 साल पुराना है। साल 1954 की फिल्म 'नागिन' की धुन से शुरू हुआ यह सफर आज भी थमा नहीं है। मुंह में रुमाल दबाकर किया जाने वाला यह सिग्नेचर स्टेप आज भी हर जश्न को दोगुना कर देता है।

Post Published By: Tanya Chand
Updated : 26 June 2026, 2:58 PM IST

New Delhi: जरा कल्पना कीजिए कि बारात पूरी तरह सज चुकी है, चमचमाती लाइट्स के बीच डीजे वाले बाबू ने बेस बढ़ा दिया है, लेकिन क्या आपको इस माहौल में कुछ अधूरा सा नहीं लगता? जी हां, जब तक डीजे फ्लोर पर दो-चार दोस्त 'नागिन डांस' करने के लिए जमीन पर न उतर आएं, तब तक भारतीय शादी का जश्न पूरा ही नहीं माना जाता।

आप भले ही शादी में शगुन का लिफाफा देना भूल जाएं या पनीर टिक्का खाना मिस कर दें, लेकिन बारात के बीचो-बीच मुंह में रुमाल दबाकर, जमीन पर लोट-पोट होने वाले उस 'सिग्नेचर स्टेप' को आप चाहकर भी नहीं भूल सकते। आज यह सिर्फ एक डांस स्टेप नहीं, बल्कि भारतीय पॉप कल्चर का एक अटूट हिस्सा बन चुका है।

क्या है नागिन डांस का बॉलीवुड कनेक्शन?

बहुत कम लोग जानते हैं कि इस मजेदार और देसी डांस के पीछे पूरी तरह से भारतीय सिनेमा यानी बॉलीवुड का हाथ है। इस सिलसिले की शुरुआत आज से 72 साल पहले यानी साल 1954 में हुई थी, जब सिनेमा जगत टेक्नीकलर के नए दौर में कदम रख रहा था। उस वक्त मशहूर डायरेक्टर नंदलाल जसवंतलाल ने 'नागिन' नाम से एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म बनाई थी, जिसके गाने 'मन डोले मेरा तन डोले' की बीन धुन ने पहली बार दर्शकों पर अपना जादू चलाया था।

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हालांकि, इस पुरानी फिल्म ने हमें संगीत की जादुई धुन तो दे दी थी, लेकिन आज हम शादियों में जो स्टेप्स देखते हैं, उसका असली श्रेय साल 1986 में आई फिल्म 'नगीना' को जाता है, जिसमें श्रीदेवी ने अपनी कातिलाना आंखों और डांस से इतिहास रच दिया था।

कैसी सजती है नागिन डांस की महफिल?

इस देसी डांस की सबसे खूबसूरत बात यह है कि इसे करने के लिए आपको किसी प्रोफेशनल डांसर होने की बिल्कुल भी जरूरत नहीं है। इसके लिए बस आपको अपने दोनों हाथ सिर के ऊपर ले जाकर सांप का फन बनाना होता है, थोड़ा पेट मटकाना होता है और फुफकारने की मजेदार एक्टिंग करनी होती है।

असली महफिल तब जमती है जब ग्रुप का कोई एक शख्स घुटनों के बल जमीन पर बैठकर मुंह में रुमाल दबा लेता है। यह रुमाल एक काल्पनिक 'पुंगी' या बीन का काम करता है, और बाकी के लोग सपेरे की उस बीन पर मदहोश होकर चारों तरफ नागिन बनकर झूमने लगते हैं।

जेंडर स्टीरियोटाइप तोड़ते पुरुष और जश्न का बिंदास अंदाज

आमतौर पर भारतीय समाज में पुरुषों को खुलकर नाचने में थोड़ी झिझक होती है, लेकिन नागिन डांस शायद इकलौता ऐसा मौका होता है जहां भारतीय पुरुष किसी जेंडर स्टीरियोटाइप की रत्ती भर भी परवाह नहीं करते। महिलाएं तो खुशी-खुशी अपनी अंदर की 'नागिन' को बाहर लाती ही हैं, लेकिन शादियों में इस डांस को सबसे ज्यादा जंगली और मजेदार अंदाज में पुरुष ही परफॉर्म करते हैं।

जब लोग अपनी खुशी के चरम पर होते हैं, तो नागिन डांस ही उनकी पहली पसंद बनता है। बारात के डांस फ्लोर पर जितने ज्यादा सपेरे और नागिन होंगे, माहौल उतना ही खुशनुमा और यादगार बन जाता है।

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शादियों से निकलकर विरोध प्रदर्शन और सोशल मीडिया का बना हथियार

समय के साथ नागिन डांस का दायरा सिर्फ शादियों और बारातों तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसके इस्तेमाल के कई अनोखे तरीके सामने आए हैं। आजकल लोग प्रशासन के खिलाफ अपना अनोखा विरोध जताने के लिए, जैसे खराब सड़कों या गड्ढों के पास, बीच सड़क पर नागिन डांस करते नजर आते हैं।

इसके अलावा सोशल मीडिया के इस दौर में यह इंटरनेट का भी ऑल-टाइम फेवरेट मीम मटीरियल बन चुका है। इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब पर अमरीश पुरी या सपेरे के अंदाज की नकल करते हुए ढेरों फनी वीडियो हर दिन वायरल होते हैं, जो यह साबित करते हैं कि इस डांस का क्रेज आज भी कम नहीं हुआ है।

Location :  New Delhi

Published :  26 June 2026, 2:58 PM IST