गांव बनाम शहर: कैसे बदल गई होली की तस्वीर, जानें परंपरा से ट्रेंड तक का सफर

गांव और शहर में होली का अंदाज़ कैसे अलग है? जानें परंपरागत ग्रामीण होली से लेकर मॉडर्न शहरी इवेंट कल्चर तक, क्या बदला और क्या आज भी वही है। होली 2026 के बदलते ट्रेंड्स पर खास रिपोर्ट।

Post Published By: Sapna Srivastava
Updated : 16 February 2026, 3:42 PM IST

New Delhi: होली का रंग हर जगह एक सा चमकता है, लेकिन उसका अंदाज़ गांव और शहर में अलग-अलग रूप ले लेता है। समय के साथ परंपराएं, तौर-तरीके और उत्सव की शैली बदल गई है। आज की होली, बीते दशकों की सादगी भरी होली से काफी अलग नजर आती है।

गांव की होली

ग्रामीण भारत में होली सिर्फ रंगों का त्योहार नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सामूहिकता का प्रतीक है। कई गांवों में होलिका दहन पूरे समुदाय की भागीदारी से होता है। लोग मिलकर लकड़ियां इकट्ठा करते हैं और पूरे गांव के सामने अग्नि प्रज्वलित की जाती है। यहां होली के दिन घर-घर जाकर रंग लगाने की परंपरा अब भी जीवित है। बड़े-बुजुर्गों के चरण छूकर आशीर्वाद लिया जाता है। ढोलक, चंग और फाग के गीत माहौल को पारंपरिक रंग में रंग देते हैं।

प्राकृतिक रंगों का उपयोग अब भी कई जगह देखने को मिलता है। घरों में गुजिया, दही-बड़े और पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं और लोग मिल-बैठकर भोजन करते हैं। गांव की होली में रिश्तों की गर्माहट और सादगी का अलग ही आकर्षण है।

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मॉडर्न ट्रेंड और इवेंट कल्चर

मेट्रो शहरों में होली का रूप बदला है। अपार्टमेंट सोसाइटी, क्लब और रिसॉर्ट में डीजे पार्टी, रेन डांस और थीम बेस्ड इवेंट आम हो चुके हैं। सोशल मीडिया पर लाइव वीडियो और इंस्टाग्राम रील्स के जरिए त्योहार को डिजिटल मंच मिल गया है।

ऑर्गेनिक रंगों की मांग बढ़ी है और कई जगह ‘ड्राई होली’ का ट्रेंड भी दिखता है। पानी की कमी और पर्यावरणीय चिंता के चलते लोग सीमित संसाधनों में त्योहार मनाने की कोशिश कर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था भी शहरों में बड़ा मुद्दा है। पुलिस निगरानी, सीसीटीवी और गाइडलाइन के बीच होली अब एक संगठित आयोजन बन चुकी है।

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क्या बदला, क्या बचा?

गांवों में होली आज भी मेल-मिलाप और परंपरा का प्रतीक है, जबकि शहरों में यह एक दिन के इवेंट की तरह सिमटती दिखती है। पहले फाग और होली गीत कई दिनों तक चलते थे, अब अधिकतर लोग एक दिन रंग खेलकर अपनी दिनचर्या में लौट आते हैं।
हालांकि बदलाव के बावजूद एक चीज नहीं बदली है और वह है खुशियों को साझा करने की भावना। चाहे गांव की चौपाल हो या शहर का क्लब, रंगों के इस पर्व में लोगों के चेहरे पर मुस्कान आज भी वही है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 16 February 2026, 3:42 PM IST