
सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान (Img- AI)
New Delhi: धनतेरस और दिवाली पर सोना खरीदना शुभ माना जाता है। इस मौके पर लोग सिक्कों से लेकर सोने के आभूषणों तक की खरीदारी करते हैं। हालांकि, सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बीच खरीदारी करते समय थोड़ी सी लापरवाही जेब पर भारी पड़ सकती है। गहनों की कीमत, मेकिंग चार्ज, नगों और शुद्धता से जुड़ी कुछ बातें ऐसी हैं, जिन पर ध्यान नहीं दिया तो बाद में नुकसान उठाना पड़ सकता है।
सोने की कीमत हर शहर में एक जैसी नहीं होती। इसलिए खरीदारी से पहले अपने शहर के साथ आसपास के बड़े बाजारों में भी सोने का भाव पता कर लें। कई बार छोटे शहरों में डिलीवरी या अन्य खर्चों का हवाला देकर प्रति 10 ग्राम कीमत 200 से 300 रुपये तक ज्यादा बताई जाती है। अगर भाव में बड़ा अंतर दिखाई दे तो ज्वैलर से इसकी वजह पूछें और उचित कीमत पर खरीदारी करने की कोशिश करें।
सोने के गहनों की कीमत में मेकिंग चार्ज भी बड़ा हिस्सा होता है। आमतौर पर ज्वैलर्स गहनों पर 7 से 20 प्रतिशत तक मेकिंग चार्ज ले सकते हैं। डिजाइन जितना जटिल और कारीगरी वाला होगा, यह शुल्क उतना बढ़ सकता है। हालांकि, साधारण डिजाइन वाले आभूषणों पर अधिक मेकिंग चार्ज देने से बचें। स्थानीय ज्वैलर्स से इस पर मोलभाव जरूर करें। अलग-अलग दुकानों पर मेकिंग चार्ज की तुलना करने से भी खर्च कम हो सकता है।
कम कीमत का दावा सुनकर न खरीदें सोना (Img- Pinterest)
नग या स्टोन लगे आभूषण खरीदते समय विशेष सावधानी बरतें। कई बार साधारण नगों की कीमत भी सोने के भाव के हिसाब से जोड़ दी जाती है, जबकि पुराने गहने वापस करने पर नगों का पूरा मूल्य नहीं मिलता। इसलिए सोने और नगों की कीमत बिल में अलग-अलग दर्ज करवाएं। इससे भविष्य में गहने बेचने या बदलने के समय हिसाब स्पष्ट रहेगा। कम नगों वाले आभूषण चुनना भी नुकसान का जोखिम घटा सकता है।
अगर पुराने सोने के बदले नए गहने खरीद रहे हैं तो पुराने आभूषण का वजन, शुद्धता और उसकी कीमत बिल में साफ-साफ लिखवाएं। सोने की शुद्धता की जांच कराए बिना एक्सचेंज का सौदा न करें। वहीं, हीरे खरीदते समय प्रमाणित हीरों को प्राथमिकता दें। नौ कैरेट सोने और लैब ग्रोन डायमंड की ज्वैलरी अपेक्षाकृत कम कीमत में मिल सकती है, लेकिन भविष्य में उसकी वापसी या एक्सचेंज की शर्तें पहले ही लिखित में ले लें।
सोने के आभूषण खरीदते समय हॉलमार्किंग की जांच करना बेहद जरूरी है। हॉलमार्क वाले गहने पर छह अंकों का HUID यानी हॉलमार्क यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है। ग्राहक इस नंबर को BIS Care ऐप में डालकर आभूषण से जुड़ी जानकारी जांच सकते हैं। हाथ से बने गहनों में अलग-अलग हिस्सों की शुद्धता में अंतर हो सकता है, इसलिए केवल सुनार के मौखिक दावे पर भरोसा न करें। पक्का बिल लें और उसमें वजन, कैरेट, मेकिंग चार्ज तथा अन्य शुल्क स्पष्ट दर्ज करवाएं।
Location : New Delhi
Published : 1 November 2026, 3:52 PM IST