दिहाड़ी बचाने के लिए यूटेरस कटवाने को मजबूर महिलाएं, पढ़ें गन्ने की मिठास के पीछे की खौफनाक सच्चाई

महाराष्ट्र के बीड जिले में गन्ने के खेतों में काम करने वाली महिला मजदूर दिहाड़ी कटने के डर से अपना यूटेरस निकलवा रही हैं। ठेकेदारों की सख्ती, साफ सफाई की कमी और झोलाछाप डॉक्टरों के शोषण के बीच फंसी इन महिलाओं की दर्दनाक सच्चाई जानें।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 12 September 2026, 2:09 PM IST

New Delhi: सोचिए, अगर पेट भरने और रोज की मजदूरी बचाने के लिए किसी को अपने शरीर का जरूरी अंग ही सर्जरी कराकर कटवाना पड़ जाए? महाराष्ट्र के बीड जिले की शुगर बेल्ट में काम करने वाली हजारों महिला मजदूरों के लिए यह कोई डरावना सपना नहीं, बल्कि उनकी कड़वी जिंदगी का सच है। गरीबी, ठेकेदारों के शोषण और सैनिटेशन की कमी ने 20 से 25 साल की उम्र में ही इन महिलाओं को अपना गर्भाशय (यूटेरस) निकलवाने की बेबसी में ढकेल दिया है।

एक दिन की छुट्टी पर डबल जुर्माने का चाबुक

बीड जिले से हर साल लाखों परिवार पश्चिम महाराष्ट्र के चीनी कारखानों और गन्ने के खेतों में कटाई के लिए पलायन करते हैं। यहां काम पति-पत्नी की जोड़ी में मिलता है। ठेकेदारों का नियम बेहद क्रूर है अगर पीरियड्स या बीमारी के कारण महिला एक दिन भी काम पर न जाए, तो उसके साथ उसके पति की भी दिहाड़ी काट ली जाती है। खेतों के पास न शौचालय होते हैं और न ही साफ पानी। ऐसे में गंदे कपड़ों के इस्तेमाल से इन्फेक्शन बढ़ जाता है और छुट्टी लेने पर जुर्माने की मार झेलनी पड़ती है।

मजबूरी और अज्ञानता का धंधा बनाते झोलाछाप डॉक्टर

जब ये महिलाएं इलाज के लिए स्थानीय या झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाती हैं, तो उनकी मजबूरी का फायदा उठाया जाता है। मामूली इन्फेक्शन या दर्द होने पर भी उन्हें कैंसर या बड़ी बीमारी का डर दिखाकर डरा दिया जाता है। ठेकेदार का कर्ज लेकर ये महिलाएं कम उम्र में ही 'हिस्टेरेक्टॉमी' (गर्भाशय निकालने की सर्जरी) करा लेती हैं, ताकि पीरियड्स का झंझट ही खत्म हो जाए।

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सर्जरी के बाद समय से पहले बूढ़ा होता शरीर

कम उम्र में गर्भाशय निकल जाने से इन महिलाओं का शरीर सर्जिकल मेनोपॉज के दौर में चला जाता है। नतीजतन, 25-30 साल की उम्र में ही उन्हें जोड़ों में भीषण दर्द, लगातार कमजोरी, पेट में खिंचाव और चक्कर आने जैसी बीमारियां घेर लेती हैं। जिस दिहाड़ी को बचाने के लिए उन्होंने अपना अंग कटवाया, उसी शारीरिक कमजोरी के कारण वे आगे भारी काम करने लायक भी नहीं बचतीं।

Location :  New Delhi

Published :  12 September 2026, 2:09 PM IST