Ayurveda Lifestyle Tips: भागदौड़ भरी जिंदगी से हैं परेशान? तन-मन को सेहतमंद रखने के लिए अपनाएं आयुर्वेद की ये 9 आदतें

क्या आपकी सुबह भी हड़बड़ी और तनाव से शुरू होती है? आयुर्वेद के अनुसार अपनी जीवनशैली में ब्रह्म मुहूर्त में उठना, ओरल क्लेजिंग और सही खान-पान जैसी आदतों को शामिल कर आप शरीर और मन दोनों को पूरी तरह स्वस्थ रख सकते हैं।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 25 June 2026, 11:35 AM IST

New Delhi: आज के आधुनिक दौर में अधिकांश लोगों के दिन की शुरुआत अत्यधिक भागदौड़, तनाव और मानसिक दबाव के साथ होती है। सुबह उठते ही ऑफिस पहुंचने की जल्दबाजी, हड़बड़ी में नाश्ता तैयार करना और फिर बिना चबाए फटाफट उसे खा लेना आज की आम जीवनशैली बन चुकी है।

यह लाइफस्टाइल धीरे-धीरे हमारे शरीर को बीमारियों का घर बना देती है। यदि आप खुद को शारीरिक और मानसिक रूप से हमेशा सेहतमंद रखना चाहते हैं, तो आयुर्वेद इसमें आपकी बड़ी मदद कर सकता है। आयुर्वेद महज एक चिकित्सा पद्धति नहीं बल्कि जीवन जीने का एक संपूर्ण विज्ञान है, जिसमें प्रकृति के नियमों के अनुसार शरीर को ढालने की बात कही गई है।

सुबह की शुरुआत और शरीर की आंतरिक सफाई

आयुर्वेद के अनुसार, जिसे हम आज 'डेली रूटीन' कहते हैं, उसे शास्त्रों में 'दिनचर्या' नाम दिया गया है। एक आदर्श दिनचर्या के लिए व्यक्ति को सूर्योदय से कम से कम 90 मिनट पहले यानी 'ब्रह्म मुहूर्त' में बिस्तर छोड़ देना चाहिए। इस समय वातावरण में सात्विक ऊर्जा का प्रवाह सबसे अधिक होता है।

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सुबह उठने के बाद शरीर के विषैले तत्वों (अमा) को बाहर निकालने के लिए ओरल क्लेजिंग यानी जीभ की सफाई, ऑयल पुलिंग और दांतों को साफ करना बेहद जरूरी है। इसके तुरंत बाद पेट साफ करने और पाचन को दुरुस्त करने के लिए 1 से 2 गिलास गुनगुना पानी पीना चाहिए। बेहतर परिणाम के लिए इस पानी में नींबू, शहद या अदरक भी मिलाया जा सकता है।

योग, मालिश और स्नान का सही नियम

शरीर में दिनभर लचीलापन, स्फूर्ति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने के लिए आयुर्वेद सुबह के समय हल्की-फुल्की एक्सरसाइज या योग की सलाह देता है। इसमें विशेष रूप से प्राणायाम और सूर्य नमस्कार करना बहुत फायदेमंद माना गया है। इसके बाद, शरीर और बालों की तेल से मालिश (अभ्यंग) करनी चाहिए।

वात दोष वाले लोगों के लिए तिल का तेल, पित्त के लिए नारियल का तेल और कफ दोष के लिए सरसों का तेल सबसे उत्तम है। आयुर्वेद का नियम कहता है कि तेल मालिश के बाद ही हमेशा स्नान (नहाने) के लिए जाना चाहिए, जिससे त्वचा में नमी बनी रहती है।

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भोजन का समय और दोषों के अनुसार सावधानी

स्नान के बाद सुबह का नाश्ता हमेशा गरम, सुपाच्य और पोषक तत्वों से भरपूर होना चाहिए। वहीं, दोपहर के भोजन के लिए आयुर्वेद में सबसे सही समय 12 से 1 बजे के बीच का बताया गया है, क्योंकि इस दौरान हमारे शरीर में 'पित्त' (जठराग्नि) सबसे मजबूत स्थिति में होता है, जिससे भोजन आसानी से पच जाता है।

दोपहर के भोजन के बाद कुछ मिनटों का छोटा सा विश्राम (वामकुक्षी) सेहत के लिए अच्छा माना गया है। हालांकि, जिन लोगों के शरीर में कफ दोष की प्रधानता या कफ से जुड़ी समस्याएं हैं, उन्हें दोपहर में सोने से बचना चाहिए। इन छोटे लेकिन महत्वपूर्ण नियमों को अपनाकर कोई भी व्यक्ति एक दीर्घायु और निरोगी जीवन जी सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  25 June 2026, 11:35 AM IST