
अंधेरे की कमी से घट रहा मेलाटोनिन स्तर (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: डॉक्टरों का कहना है कि जैसे शरीर को धूप और उजाला चाहिए, वैसे ही अंधेरा भी बहुत जरूरी है। लेकिन आजकल की भागदौड़ वाली जिंदगी में लोग रात देर तक मोबाइल, टीवी और लैपटॉप की रोशनी में काम करते रहते हैं। धीरे-धीरे ये आदत शरीर के लिए नुकसानदायक साबित हो रही है।
चिकित्सकों के मुताबिक हमारे शरीर की एक प्राकृतिक घड़ी होती है, जो बताती है कब सोना है और कब जागना है। लेकिन जब हम रातभर तेज रोशनी में रहते हैं, तो ये घड़ी बिगड़ जाती है। इससे कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं, जैसे नींद न आना, थकान और मानसिक तनाव।
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आजकल लोग अपने बेडरूम को भी सजाने के लिए अलग-अलग तरह की लाइट्स लगाते हैं, लेकिन डॉक्टर कहते हैं कि सोते समय पूरा अंधेरा होना चाहिए। अगर बाहर से रोशनी आती है तो मोटे पर्दे लगाना बेहतर रहता है ताकि शरीर को पूरा आराम मिल सके।
डॉक्टरों की सलाह है कि सोने से कम से कम एक घंटा पहले मोबाइल, टीवी और लैपटॉप बंद कर देना चाहिए। इससे दिमाग को आराम मिलता है और नींद अच्छी आती है।
हृदय रोग विशेषज्ञ बताते हैं कि अगर लोग रात 12 बजे से सुबह 6 बजे तक भी रोशनी में जागते रहते हैं, तो इससे दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। नींद पूरी न होने से तनाव बढ़ता है, जो दिल पर असर डालता है।
मनोचिकित्सकों के मुताबिक अंधेरे में शरीर मेलाटोनिन नाम का हार्मोन बनाता है, जो अच्छी नींद के लिए जरूरी होता है। लेकिन रोशनी में रहने से ये हार्मोन कम बनता है, जिससे नींद खराब होती है और शरीर की लय बिगड़ जाती है।
डॉक्टरों का कहना है कि शहरों में अनिद्रा, बेचैनी और डिप्रेशन के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। इसकी एक बड़ी वजह देर रात तक रोशनी में रहना और नींद की कमी है।
विशेषज्ञ बताते हैं कि मेलाटोनिन कम होने से शरीर की रोगों से लड़ने की ताकत भी कमजोर हो जाती है। इससे कुछ मामलों में कैंसर का खतरा भी बढ़ सकता है।
डॉक्टर सलाह देते हैं कि रात में मोबाइल और टीवी से दूरी बनाएं, कमरे को अंधेरा रखें और तय समय पर सोने की आदत डालें। इससे शरीर की प्राकृतिक घड़ी सही रहती है और बीमारियों का खतरा कम होता है।
Location : New Delhi
Published : 28 April 2026, 9:24 AM IST
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