IPS Success Story: 1000 रुपये से शुरू हुआ सफर, पहली महिला IPS किरण बेदी ने ऐसे रचा इतिहास

भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने 1972 में इतिहास रचा। शुरुआती पोस्टिंग में उनकी सैलरी 1000-2000 रुपये थी। अपने करियर में उन्होंने कई बड़े सुधार किए और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान बनाई।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 19 April 2026, 2:30 PM IST

New Delhi: क्या आप जानते हैं कि भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी की पहली सैलरी कितनी थी? 1000 रुपये से शुरू हुआ किरण बेदी का सफर आज भी मिसाल है, जिसने समाज की सोच बदली और महिलाओं को बड़े सपने देखने की हिम्मत दी।

किरण बेदी का जन्म 9 जून 1949 को अमृतसर में हुआ था। उनके माता-पिता ने बचपन से ही उन्हें शिक्षा और खेल दोनों में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वह पढ़ाई में होशियार होने के साथ-साथ एक बेहतरीन टेनिस खिलाड़ी भी थीं और उन्होंने कई राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं जीतीं। उन्होंने अपनी शिक्षा अमृतसर और चंडीगढ़ से पूरी की। आगे चलकर उन्होंने कानून की डिग्री और पीएचडी हासिल की, जिससे उनका व्यक्तित्व और मजबूत बना।

1972 में रचा इतिहास

साल 1972 में किरण बेदी ने एक ऐसा इतिहास रचा, जिसने पूरे देश की सोच बदल दी। वह भारत की पहली महिला आईपीएस अधिकारी बनीं। उस समय पुलिस सेवा को पुरुषों का क्षेत्र माना जाता था, लेकिन उन्होंने इस धारणा को तोड़ दिया। उनकी पहली पोस्टिंग दिल्ली के चाणक्यपुरी में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में हुई, जहां उन्होंने अपनी काबिलियत का परिचय दिया।

शुरुआती सैलरी कितनी थी?

जब किरण बेदी ने अपनी सेवा की शुरुआत की, उस समय आईपीएस अधिकारियों की सैलरी आज के मुकाबले काफी कम थी। शुरुआती पोस्टिंग में उन्हें बेसिक पे और भत्तों सहित लगभग 1000 से 2000 रुपये प्रतिमाह मिलते थे। हालांकि यह रकम आज के हिसाब से कम लगती है, लेकिन उस दौर में यह एक सम्मानजनक आय मानी जाती थी। इसके बावजूद जिम्मेदारियां बेहद बड़ी और चुनौतीपूर्ण थीं।

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करियर की बड़ी उपलब्धियां

किरण बेदी अपने सख्त फैसलों और ईमानदारी के लिए जानी जाती हैं। 1979 में उन्हें राष्ट्रपति पुलिस पदक से सम्मानित किया गया। उन्होंने तिहाड़ जेल में बड़े सुधार किए, जहां कैदियों के लिए शिक्षा, योग और सुधार कार्यक्रम शुरू किए गए। उनके इन प्रयासों के लिए उन्हें 1994 में रेमन मैग्सेसे पुरस्कार से सम्मानित किया गया, जिसे एशिया का नोबेल पुरस्कार भी कहा जाता है।

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान

किरण बेदी ने संयुक्त राष्ट्र में भी काम किया और कई शांति मिशनों में योगदान दिया। उन्होंने विभिन्न देशों में कानून व्यवस्था और सामाजिक सुधार से जुड़े कार्य किए और अपनी अलग पहचान बनाई। साल 2007 में उन्होंने स्वेच्छा से नौकरी छोड़ दी और समाज सेवा में सक्रिय हो गईं।

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राजनीति और समाज सेवा में योगदान

नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने नशा मुक्ति, शिक्षा और सामाजिक सुधार के क्षेत्र में कई अभियान चलाए। 2011 में वह भ्रष्टाचार विरोधी आंदोलन में भी सक्रिय रहीं। बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और पुडुचेरी की उपराज्यपाल बनीं।

प्रेरणा की मिसाल

किरण बेदी की कहानी आज भी लाखों युवाओं, खासकर महिलाओं के लिए प्रेरणा है। उन्होंने साबित किया कि मेहनत, लगन और आत्मविश्वास से किसी भी बाधा को पार किया जा सकता है।

Location :  New Delhi

Published :  19 April 2026, 2:30 PM IST