धनबाद के सोनारडीह में जमीन धंसने की इस घटना ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। कुछ ही पलों में घर मलबे में बदल गए और कई जिंदगियां उसमें फंस गईं। हादसे के बाद लोगों में डर के साथ गुस्सा भी साफ दिख रहा है। जानें आखिर कैसे हुआ ये सब और क्यों बढ़ता जा रहा है तनाव?

विधायक ने बताया पूरा हाल (source: Dynamite News)
Dhanbad: झारखंड के कोयलांचल क्षेत्र से एक दुखद घटना सामने आई है, जहां सोनारडीह ओपी क्षेत्र के टांडाबाड़ी बस्ती में मंगलवार देर शाम जमीन धंसने से भारी तबाही मची। इस प्राकृतिक आपदा जैसे हादसे में कई घर देखते ही देखते जमींदोज हो गए, जिसके मलबे में एक ही परिवार के तीन सदस्यों-सरिता देवी, मनोहर उरांव और गीता कुमारी- के दबे होने की गंभीर आशंका है।
स्थानीय निवासियों के अनुसार, हादसा इतना भयावह था कि एक जोरदार धमाके के साथ जमीन फटी और घर उसमें समा गए, जिससे पूरे इलाके में चीख-पुकार और दहशत का माहौल बन गया।
इस घटना ने स्थानीय प्रशासन और बीसीसीएल प्रबंधन के प्रति ग्रामीणों के गुस्से को भड़का दिया है। हादसे के कई घंटों बाद भी रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू न होने से नाराज ग्रामीणों ने सोनारडीह ओपी का घेराव किया और राजगंज-बोकारो मुख्य मार्ग NH-32 को पूरी तरह जाम कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इस क्षेत्र में लंबे समय से बड़े पैमाने पर अवैध कोयला उत्खनन का कार्य चल रहा है, जिसने जमीन को भीतर से खोखला कर दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि समय रहते अवैध गतिविधियों पर रोक नहीं लगाने के कारण आज निर्दोष लोगों की जान जोखिम में पड़ी है।
हादसे की गंभीरता को देखते हुए बाघमारा विधायक शत्रुघ्न महतो ने तत्काल मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया कि यह हादसा अवैध कोयला चोरी का प्रत्यक्ष परिणाम है। विधायक ने बीसीसीएल के सीएमडी और धनबाद के उपायुक्त से बातचीत करने की मांग की है कि अत्याधुनिक मशीनों के जरिए बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जाए ताकि मलबे में दबे लोगों को बाहर निकाला जा सके।
फिलहाल, पूरे क्षेत्र में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सुरक्षा के मद्देनजर भारी पुलिस बल की तैनाती की गई है, जबकि परिजन मलबे के ढेर के पास किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे हैं।