आखिर बाबा बैद्यनाथ धाम के 49 लाख रुपये ‘कचरे’ में क्यों बह गए? पढ़ें पूरी खबर में..

देवघर में बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए बना 49 लाख का नीर फिल्ट्रेशन प्लांट प्रशासन की उपेक्षा के कारण कचरा स्थल में तब्दील। मंत्री हफीजुल हसन और उपमहापौर टिप चटर्जी ने दी प्रतिक्रिया। पढ़ें अतुल कुमार गौतम की विशेष ग्राउंड रिपोर्ट।

Post Published By: Rohit Goyal
Updated : 23 March 2026, 1:12 PM IST

Deoghar: विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ धाम की नगरी देवघर में करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को ध्यान में रखकर बनाई गई सरकारी योजनाएं किस कदर भ्रष्टाचार और प्रशासनिक उदासीनता की भेंट चढ़ती हैं, इसका ताजा उदाहरण शहर का 'नीर फिल्ट्रेशन प्लांट' है।

करीब 49 लाख रुपये की भारी-भरकम लागत से तैयार यह प्लांट आज अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा है। जिस प्रोजेक्ट का मकसद मंदिर के पवित्र नीर को शुद्ध कर पुन: उपयोग में लाना था, वह आज खुद गंदगी और उपेक्षा का केंद्र बन चुका है। विडंबना यह है कि शासन और प्रशासन के बड़े पदों पर बैठे जिम्मेदारों को इस महत्वपूर्ण योजना की वर्तमान स्थिति के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी तक नहीं है।

वर्षों से बंद पड़ा है प्लांट, जंग खा रही हैं मशीनें

इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला 29 मई 2019 को रखी गई थी। करीब तीन साल के लंबे इंतजार के बाद दिसंबर 2022 में इसका निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया था। उम्मीद थी कि इस प्लांट के शुरू होने से न केवल श्रद्धालुओं को स्वच्छ जल उपलब्ध होगा, बल्कि बाबा मंदिर से निकलने वाले जल का सही प्रबंधन होने से शहर की स्वच्छता व्यवस्था भी बेहतर होगी। लेकिन हकीकत इसके उलट है। निर्माण पूरा होने के वर्षों बाद भी यह प्लांट चालू नहीं हो सका। वर्तमान में यहां लगी महंगी मशीनें जंग खा रही हैं, टैंक सूखे पड़े हैं और पूरा ढांचा धीरे-धीरे खंडहर में तब्दील होता जा रहा है।

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आस्था के केंद्र पर कचरे का कब्जा, बीमारियों का खतरा

स्थानीय पंडा समाज और आसपास के निवासियों ने प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि जिस स्थान को पवित्र नीर के शुद्धिकरण के लिए चुना गया था, अब उसका उपयोग नगर निगम द्वारा कचरा डंप करने के लिए किया जा रहा है।

महीनों से कचरे का उठाव न होने के कारण पूरा इलाका डंपिंग यार्ड जैसा दिखने लगा है। चारों ओर फैली गंदगी और दुर्गंध से न केवल श्रद्धालुओं को परेशानी हो रही है, बल्कि स्थानीय लोगों में संक्रामक बीमारियों के फैलने का डर भी सता रहा है। लाखों रुपये खर्च करने के बाद भी जनता को लाभ मिलने के बजाय केवल गंदगी और परेशानी ही हाथ लगी है।

जिम्मेदारों की अनभिज्ञता: जांच के भरोसे टिकी उम्मीद

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इस गंभीर मुद्दे पर जब अल्पसंख्यक कल्याण सह पर्यटन मंत्री हफीजुल हसन अंसारी से सवाल किया गया, तो उन्होंने आश्चर्यजनक रूप से इस मामले में अनभिज्ञता जाहिर की। उन्होंने कहा कि उन्हें इस प्लांट की वर्तमान स्थिति की स्पष्ट जानकारी नहीं है, लेकिन वे इसे संज्ञान में लेकर व्यक्तिगत रूप से जांच कराएंगे।

दूसरी ओर, नवनिर्मित उपमहापौर टिप चटर्जी का भी यही कहना है कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है, हालांकि उन्होंने भी जांच और आवश्यक कार्रवाई का आश्वासन दिया है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 49 लाख रुपये की यह योजना सिर्फ फाइलों तक सीमित रहेगी या प्रशासन इसे धरातल पर उतारकर श्रद्धालुओं को राहत देगा?

 

Location : 
  • Deoghar

Published : 
  • 23 March 2026, 1:12 PM IST