
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Img: Google)
Washington: ईरान के साथ बढ़ते तनाव और युद्ध जैसी स्थिति का असर अब सीधे अमेरिका की आम जनता की जेब पर पड़ने लगा है। ऊर्जा संकट के चलते महंगाई ने ऐसा रूप ले लिया है कि पेट्रोल-डीजल से लेकर हवाई टिकट और डाक सेवाएं तक महंगी हो गई हैं। हालात ऐसे हैं कि लोग रोजमर्रा की जरूरतों पर भी ज्यादा खर्च करने को मजबूर हो रहे हैं।
अमेरिका में पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं और औसत कीमत 4.09 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है, जो पिछले कई महीनों का उच्चतम स्तर माना जा रहा है। वहीं डीजल की कीमतों में और भी ज्यादा उछाल देखने को मिला है, जो बढ़कर 5.53 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है। डीजल का उपयोग परिवहन, कृषि और उद्योगों में बड़े पैमाने पर होता है, इसलिए इसका असर व्यापक रूप से अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
ईंधन की कीमतों में इस उछाल का सीधा असर ट्रांसपोर्टेशन और सप्लाई चेन पर पड़ा है। माल ढुलाई महंगी होने से रोजमर्रा की चीजों के दाम भी बढ़ने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो महंगाई और अधिक बढ़ सकती है।
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बढ़ती लागत के चलते बड़ी कंपनियों ने भी अपने ग्राहकों पर अतिरिक्त बोझ डालना शुरू कर दिया है। ई-कॉमर्स कंपनी Amazon ने घोषणा की है कि वह 17 अप्रैल से थर्ड-पार्टी विक्रेताओं पर 3.5 प्रतिशत का ईंधन और लॉजिस्टिक्स सरचार्ज लगाएगी। कंपनी का कहना है कि अब तक वह इन बढ़ी हुई लागतों को खुद वहन कर रही थी, लेकिन मौजूदा हालात में यह संभव नहीं है।
इसी तरह, अमेरिकी डाक सेवा USPS ने भी पार्सल और एक्सप्रेस डिलीवरी पर 8 प्रतिशत तक ईंधन सरचार्ज लगाने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा UPS और FedEx जैसी बड़ी लॉजिस्टिक्स कंपनियों ने भी अपने शुल्क में बढ़ोतरी कर दी है।
हवाई यात्रा भी अब महंगी होती जा रही है। जेट फ्यूल की कीमतों में भारी उछाल के चलते एयरलाइंस कंपनियां टिकट के दाम बढ़ाने पर मजबूर हो गई हैं। Delta Air Lines, United Airlines और American Airlines जैसी बड़ी एयरलाइंस ने संकेत दिया है कि बढ़ती लागत को कवर करने के लिए किराए में इजाफा किया जा रहा है। हालांकि हैरानी की बात यह है कि कीमतें बढ़ने के बावजूद यात्रियों की मांग में कोई खास कमी नहीं आई है।
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इस आर्थिक दबाव की एक बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य में बना संकट है। यह दुनिया का एक अहम मार्ग है, जहां से करीब 20 प्रतिशत तेल की आपूर्ति होती है। यहां किसी भी तरह की बाधा वैश्विक तेल बाजार को प्रभावित कर सकती है, जिसका असर सीधे अमेरिका जैसे बड़े उपभोक्ता देशों पर पड़ता है।
आर्थिक विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो महंगाई और बढ़ सकती है। फिलहाल अमेरिका की कोर इंफ्लेशन दर करीब 2.5 प्रतिशत है, लेकिन अनुमान है कि यह 4 प्रतिशत या उससे अधिक तक पहुंच सकती है। इससे आम लोगों को ‘स्टिकर शॉक’ यानी कीमतें देखकर हैरान होने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
Location : Washington
Published : 7 April 2026, 10:40 AM IST