अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप को बड़ा झटका देने की तैयारी में 25 राज्य, नए आयात करों के खिलाफ दायर किया कड़ा मुकदमा

ट्रंप की नई टैरिफ नीति के खिलाफ 25 अमेरिकी राज्यों ने मुकदमा दायर किया है। राज्यों का आरोप है कि नए आयात कर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रद्द किए गए शुल्कों को छिपाने का बहाना हैं। 10 से 12.5% तक के इन टैरिफ्स पर व्हाइट हाउस और राज्यों के बीच कानूनी संघर्ष तेज हो गया है।

Post Published By: सौम्या सिंह
Updated : 4 August 2026, 2:23 PM IST

Washington: अमेरिका में ट्रेड वॉर का नया मोर्चा खुल गया है, जहां एक तरफ व्हाइट हाउस अपनी नीतियों को सही ठहरा रहा है, तो दूसरी तरफ 25 अमेरिकी राज्यों ने प्रशासन के खिलाफ अदालत का दरवाजा खटखटाया है। सोमवार को सामने आए इस मुकदमे को लेकर न्यूयॉर्क की अटॉर्नी जनरल लेटिटिया जेम्स ने कड़े शब्दों में कहा कि प्रशासन पूरी तरह अवैध तरीके से देश के आम परिवारों और स्थानीय व्यवसायों पर करों का भारी बोझ बढ़ा रहा है।

दूसरी ओर, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का तर्क है कि ये कड़े टैरिफ अमेरिकी विनिर्माण क्षेत्र को फिर से पुनर्जीवित करने के लिए बेहद जरूरी हैं। इस नीति को लागू करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने शुरुआत में 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का हवाला दिया था। उन्होंने देश के व्यापार घाटे को एक राष्ट्रीय आपातकाल घोषित करते हुए लगभग हर देश से आने वाले आयात पर भारी-भरकम टैरिफ थोप दिए थे।

घुटनों पर आएगा तेहरान? डोनाल्ड ट्रंप के नए फरमान से दहली दुनिया, होर्मुज जलडमरूमध्य बंद होने से हाहाकार

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बदला दांव

यह पूरा विवाद तब और गहरा गया जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया कि IEEPA कानून राष्ट्रपति को इस तरह के व्यापक टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता है। इस अदालत के फैसले के बाद प्रशासन को मजबूरन उन आयातकों को पैसे वापस लौटने पड़े, जो पहले ही इन शुल्कों का भुगतान कर चुके थे।

अपने इस खोए हुए राजस्व की भरपाई करने के लिए ट्रंप प्रशासन ने पहले तो 10 प्रतिशत के अस्थायी वैश्विक टैरिफ लागू किए, जिनकी मियाद 24 जुलाई को समाप्त हो गई। इन अस्थायी शुल्कों के खत्म होने के बाद, अब प्रशासन ने 1974 के ट्रेड एक्ट की धारा 301 का सहारा लिया है। यह विशेष धारा राष्ट्रपति को किसी भी ऐसे देश के खिलाफ आयात कर लगाने की अनुमति देती है जो अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त पाया जाता है। अपने पहले कार्यकाल के दौरान भी ट्रंप ने चीन के खिलाफ इसी धारा का इस्तेमाल कर भारी टैरिफ लगाए थे, जो उस समय अदालती चुनौतियों में टिके रहने में सफल रहे थे।

सीजफायर के बीच ईरान पर बरसीं अमेरिकी मिसाइलें; सिरिक और क़ेश्म द्वीप पर भारी तबाही, ट्रंप की आख़िरी चेतावनी

नए टैरिफ और जबरन श्रम का विवाद

जुलाई के पिछले महीने में ही अमेरिका ने जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई न करने का हवाला देते हुए 59 देशों और यूरोपीय संघ पर दोहरे अंकों वाले भारी-भरकम टैरिफ थोप दिए थे। प्रशासन ने अब इन जबरन श्रम टैरिफ को सही ठहराने के लिए धारा 301 का आधिकारिक आह्वान किया है।

वर्तमान में लागू किए गए ये नए टैरिफ 10 प्रतिशत से लेकर 12.5 प्रतिशत तक हैं, जिनका दायरा इतना बड़ा है कि ये उन सभी देशों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं जो अमेरिका के कुल आयात का 99 प्रतिशत हिस्सा प्रदान करते हैं।

इस तमाम विरोध और मुकदमों के बीच व्हाइट हाउस के प्रवक्ता कुश देसाई ने अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि अमेरिका अपने पूरी तरह वैध अधिकारों का इस्तेमाल कर रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जबरन श्रम के जरिए तैयार किए जाने वाले सामानों के आयात पर प्रतिबंध न लगाना पूरी तरह अनुचित है और यह सीधे तौर पर अमेरिकी कारोबारियों पर अतिरिक्त दबाव डालता है। बहरहाल, 25 राज्यों के इस कानूनी कदम से यह साफ हो गया है कि आने वाले दिनों में ट्रंप प्रशासन की आर्थिक नीतियों को एक बार फिर कड़े न्यायिक संघर्ष का सामना करना पड़ेगा।

Location :  Washington

Published :  4 August 2026, 2:23 PM IST