
श्रीनगर से तुलना देख भड़का PoJK (Img- X)
New Delhi: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoJK) में इस वक्त जो हो रहा है, उसकी कल्पना न तो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने की थी और न ही खुफिया एजेंसी ISI ने। इतिहास में पहली बार, PoJK की जनता पाकिस्तानी हुकूमत और फौज के खिलाफ 'करो या मरो' की तर्ज पर सड़कों पर उतर आई है।
यह पिछले 78 सालों का सबसे लंबा और हिंसक विद्रोह बन चुका है, जिसमें रेंजर्स की गोलियां खाकर और 74 अपनों को खोकर भी जनता पीछे हटने को तैयार नहीं है। अब प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तान सरकार को 21 जुलाई (कल) तक का आखिरी अल्टीमेटम दे दिया है।
9 जून को बुनियादी हकों के लिए शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरी तरह आज़ादी के विद्रोह में बदल चुका है। इस गुस्से की बड़ी वजह सीमा पार भारतीय कश्मीर (श्रीनगर) में मिल रही सहूलियतें हैं। PoJK में जहां एक किलो आटा ₹178 में मिल रहा है, वहीं श्रीनगर में इसकी कीमत महज 30-40 रुपये है।
इसके अलावा, PoJK खुद 3029 मेगावाट बिजली पैदा करता है, लेकिन नेशनल ग्रिड के जरिए इसका 95% हिस्सा पाकिस्तान भेज दिया जाता है। खुद PoJK को उसकी 400 मेगावाट की जरूरत के बदले सिर्फ 151 मेगावाट बिजली देकर अंधेरे में रखा जा रहा है।
प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी मांग चुनाव व्यवस्था को लेकर है। पाकिस्तान ने तथाकथित शरणार्थियों के नाम पर 12 विधानसभा सीटें आरक्षित कर रखी हैं। आरोप है कि ISI इन सीटों का इस्तेमाल हिजबुल और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकियों को संसद पहुंचाने और वहां की सरकारें गिराने के लिए करती है।
जनता अब इस 'आतंकी कोटे' को खत्म करने, स्थानीय युवाओं को नौकरी देने और 78 साल से पिछड़े इस इलाके में इंटरनेशनल एयरपोर्ट और रेलवे लाइन बिछाने की मांग कर रही है।
इस विद्रोह की ताकत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 15 जुलाई को ढाई लाख से ज्यादा लोग मुज़फ़्फ़राबाद कूच के लिए इकट्ठा हो गए थे। घबराए आर्मी चीफ आसिम मुनीर ने अपने खास दूत कमर रज़ा को बातचीत के लिए भेजा, जिसने मुनीर का हवाला देकर कुछ समय मांगा और मार्च रुकवा दिया।
लेकिन 24 घंटे के भीतर ही कमर रज़ा अपने बयान से पलट गया और कहा कि उसे मुनीर ने नहीं भेजा था। इस धोखे के बाद प्रदर्शनकारियों का गुस्सा सातवें आसमान पर है और कल अल्टीमेटम खत्म होने के बाद हालात बेहद गंभीर हो सकते हैं।
Location : New Delhi
Published : 20 July 2026, 2:44 PM IST