
कुदरत की मार के बीच नेपाल का आत्मनिर्भर कदम (Img- X)
Kathmandu: आपदा के कठिन समय में अमूमन देश अंतरराष्ट्रीय बिरादरी की ओर मदद का हाथ बढ़ाते हैं, लेकिन नेपाल ने इस बार एक बेहद साहसिक और अलग रास्ता चुना है। नेपाल सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उसे फिलहाल विदेशी रेस्क्यू टीमों की आवश्यकता नहीं है। सरकार का मानना है कि देश की अपनी सुरक्षा एजेंसियां इस कठिन घड़ी में हर मोर्चे को संभालने के लिए पूरी तरह मुस्तैद और सक्षम हैं।
नेपाल के भूगोल से मुकाबला करना हर किसी के बस की बात नहीं है। नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल (APF) को इन दुर्गम पहाड़ियों, संकरे रास्तों और अनिश्चित मौसम में काम करने का सालों का अनुभव है। सरकार को भरोसा है कि बाहरी टीमों की तुलना में देश के जवान इन मुश्किल परिस्थितियों में ज्यादा तेजी और सटीकता से काम कर सकते हैं।
जब विदेशी बचाव टीमें आती हैं, तो उनके साथ भाषा, संचार तकनीकों और भौगोलिक परिस्थितियों को समझने की चुनौतियां भी आती हैं। इसमें अक्सर शुरुआती और कीमती समय नष्ट हो जाता है। नेपाली एजेंसियों का मानना है कि खुद कमान संभालने से तालमेल बेहतर रहता है और राहत सामग्री सीधे जरूरतमंदों तक बिना किसी देरी के पहुंचाई जा सकती है।
यह फैसला केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं है, बल्कि देश की क्षमता और संप्रभुता को रेखांकित करता है। सरकार का यह संदेश साफ है कि हर संकट में दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी स्थानीय क्षमताओं को मजबूत करना जरूरी है। हालांकि, सरकार ने यह भी संकेत दिया है कि अगर हालात बहुत ज्यादा बेकाबू होते हैं, तभी अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपील की जाएगी।
Location : Kathmandu
Published : 28 August 2026, 8:56 AM IST