
नेपाल से भारत पहुंचा जहरीला सैलाब (Img- X)
Kathmandu: नेपाल में आई कुदरती आफत के 12 दिन बीत जाने के बाद भी तबाही के निशान मिटने का नाम नहीं ले रहे हैं। एक तरफ जहां नेपाल मलबे के ढेर में अपनों की तलाश और जिंदगी को फिर से पटरी पर लाने की जंग लड़ रहा है, वहीं दूसरी तरफ इस प्रलय का खतरनाक असर अब भारतीय सीमा में दिखने लगा है।
नेपाल से बहकर भारत की ओर आए पानी ने कुशीनगर और महराजगंज के सीमावर्ती इलाकों में एक नई चिकित्सा आपातकाल जैसी स्थिति पैदा कर दी है। बाढ़ का पानी अब केवल तबाही का कारण नहीं, बल्कि जहरीला संक्रमण बनकर उभरा है।
कुशीनगर और महराजगंज के कई गांवों में बाढ़ का पानी संपर्क में आते ही त्वचा से संबंधित गंभीर बीमारियां फैला रहा है। आपदा के बाद जब बुजुर्ग और किसान अपने जलमग्न खेतों में काम करने उतरे, तो वे सबसे पहले इस बीमारी की चपेट में आए।
पीड़ित लोगों के शरीर पर लाल चकत्ते, दाने और असहनीय खुजली की शिकायत हो रही है। चिंताजनक बात यह है कि यह संक्रमण अब एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल रहा है, जिससे इसकी चेन तोड़ना स्वास्थ्य विभाग के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, बाढ़ के रुके हुए पानी में ई. कोलाई (E. coli) और फेकल बैक्टीरिया जैसे घातक जीवाणु अत्यधिक मात्रा में पनप रहे हैं। महराजगंज जिला अस्पताल के त्वचा रोग विशेषज्ञों का कहना है कि यह बैक्टीरिया त्वचा की ऊपरी सुरक्षात्मक परत को कमजोर कर देते हैं, जिससे चंद दिनों के भीतर ही मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। पीपरीघाट और सेवरही के दर्जनों ग्रामीण इस समय शरीर पर पड़ रहे निशानों और दानों के कारण इलाज कराने को मजबूर हैं।
सीमा पार नेपाल में भी हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। 12 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद नेपाली सेना और इंजीनियर अस्थायी पुलों के सहारे राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं। अब तक 1,344 से अधिक लोगों की मौत दर्ज की जा चुकी है, जबकि 5,000 लोग अब भी लापता हैं।
भारी भूस्खलन और सैलाब के कारण 7,500 से अधिक घर पूरी तरह तबाह हो चुके हैं और कई किलोमीटर लंबी सड़कें पानी में बह गईं। लोग मलबे में जीवन का सामान तलाश रहे हैं।
चीन ने 12 दिनों बाद अंतरराष्ट्रीय मीडिया को गिरयोंग काउंटी में प्रवेश की अनुमति दी, जहां तबाही का खौफनाक मंजर देखने को मिला। आव्रजन चौकी समेत बुनियादी ढांचा पूरी तरह जमींदोज हो चुका है।
इस विकट परिस्थिति के बीच नेपाल सरकार ने मित्र राष्ट्रों से अपील की है कि वे अपनी ट्रैवल एडवाइजरी केवल बाढ़ प्रभावित हिस्सों तक ही सीमित रखें, क्योंकि देश के बाकी पर्यटन क्षेत्र पूरी तरह सुरक्षित हैं।
Location : Kathmandu
Published : 7 September 2026, 8:33 AM IST
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