पानी उतरा तो सामने आया कड़वा सच: नेपाल में 3 फीट गाद के नीचे दबी जिंदगी, अब भुखमरी का मंडराया बड़ा खतरा

नेपाल में ग्लेशियर टूटने से आई तबाही के बाद अब भुखमरी का नया संकट खड़ा हो गया है। बाढ़ का पानी घटने के बाद खेतों और दुकानों पर 3 फीट तक सिल्ट (गाद) जमा हो गई है, जिससे आजीविका पूरी तरह ठप हो चुकी है। जानिए जमीनी हालात

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 5 September 2026, 11:18 AM IST

Kathmandu: नेपाल में लांगटांग नेशनल पार्क के पास हुए भयानक ग्लेशियर धमाके के बाद तबाही का स्वरूप अब बदलने लगा है। 1,300 से अधिक मौतों और हजारों लापता लोगों के गम के बीच अब जीवित बचे लोगों के सामने पेट भरने की सबसे बड़ी चुनौती आन पड़ी है।

बाढ़ का पानी तो धीरे-धीरे पीछे हट रहा है, लेकिन सड़कों, खेतों और बाजारों में अपने पीछे 2 से 3 फीट मोटी सिल्ट (बालू और गाद) की चादर छोड़ गया है। इस गाद ने लोगों के आशियाने ही नहीं, बल्कि उनकी रोजी-रोटी को भी जिंदा दफन कर दिया है।

3 फीट गाद ने खेतों को बनाया रेगिस्तान

रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जैसे पहाड़ी जिलों में उपजाऊ जमीन पर मलबे की इतनी मोटी परत चढ़ चुकी है कि कृषि विशेषज्ञों ने इसके अगले 2-3 सालों तक पूरी तरह अनुपजाऊ होने की आशंका जताई है।

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खरीफ और हरी फसलें तो पहले ही पानी में बह गई थीं, अब मिट्टी के बंजर होने से किसानों को आने वाले सालों में भी भुखमरी का डर सता रहा है। जो किसान कभी दूसरों का पेट भरते थे, वे आज राहत शिविरों में कटोरी लेकर खड़े होने को मजबूर हैं।

व्यापार और पर्यटन पूरी तरह ठप

काठमांडू-मुग्लिन हाईवे और त्रिशूली बाजार जैसे व्यस्त आर्थिक केंद्रों पर दुकानें, होटल और पेट्रोल पंप सिल्ट के नीचे दबकर मलबे का ढेर बन चुके हैं। मुख्य सड़कों और पुलों के नष्ट हो जाने से पर्यटन व्यवसाय पूरी तरह ध्वस्त हो गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस मलबे के कारण स्थानीय अर्थव्यवस्था कम से कम 10 साल पीछे खिसक गई है। न केवल व्यापारी बल्कि दिहाड़ी मजदूर भी पूरी तरह बेरोजगार हो चुके हैं।

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हेलिकॉप्टर से बट रहा दाना, पुनर्निर्माण की बड़ी चुनौती

फिलहाल बेघर हुए लोग राहत शिविरों, स्कूलों और अस्पतालों में रातें काट रहे हैं और पूरी तरह से रेड क्रॉस व स्वयंसेवी संस्थाओं के राशन पैकेटों पर आश्रित हैं। कई इलाके अब भी पूरी तरह कटे हुए हैं, जहां नेपाली सेना और निजी हेलिकॉप्टरों की मदद से राशन की आपूर्ति की जा रही है।

सरकार ने शुरुआती राहत पैकेज का एलान तो किया है, लेकिन इस तबाही से उबरने और बुनियादी ढांचे को फिर से खड़ा करने के लिए नेपाल को अरबों डॉलर की अंतरराष्ट्रीय सहायता की जरूरत होगी।

Location :  New Delhi

Published :  5 September 2026, 11:18 AM IST