
मिडिल ईस्ट में जंग तेज (Img- Internet)
New Delhi: मिडिल ईस्ट की जंग 28 फरवरी 2026 से शुरू हुई अभी तक किसी अंतिम नतीजे पर नहीं पहुंची है। एक तरफ ईरान और अमेरिका के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है, तो दूसरी ओर कूटनीतिक प्रयास भी विफल होते दिख रहे हैं।
ईरान अमेरिका से सीधे बातचीत करने को तैयार नहीं है, जबकि अमेरिका अपने रुख पर अड़ा हुआ है। अमेरिका की मांग है कि ईरान अपना परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह रोक दे। वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला मान रहा है और पीछे हटने को तैयार नहीं है।
NBC की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर कई बार हमला किया है, जिससे उन्हें अनुमान से कहीं अधिक नुकसान हुआ है। इन हमलों में सैन्य उपकरण और एयर डिफेंस सिस्टम को गंभीर क्षति पहुंची है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुए नुकसान की मरम्मत में अरबों डॉलर खर्च हो सकते हैं। कई बेसों पर बुनियादी ढांचा भी प्रभावित हुआ है, जिससे संचालन क्षमता पर असर पड़ा है।
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विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने अपनी मिसाइल क्षमता का प्रभावी इस्तेमाल किया है और यह उसके लिए रणनीतिक बढ़त साबित हो सकता है। हमलों ने खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
पाकिस्तान के इस्लामाबाद में चल रही कूटनीतिक बातचीत की कोशिशें उस समय टूट गईं जब Iran ने सीधे बातचीत से इनकार कर दिया। इसके बाद ईरानी प्रतिनिधिमंडल वापस लौट गया, जिससे शांति प्रयासों को झटका लगा। अमेरिका की ओर से कहा गया है कि ईरान को अपने परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह बंद करना होगा। साथ ही युद्ध समाप्ति के लिए कई सख्त शर्तें भी रखी गई हैं।
तनाव के बीच एक राहत भरी खबर यह भी है कि तेहरान से कमर्शियल फ्लाइट्स फिर से शुरू हो गई हैं। हालांकि सुरक्षा स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं मानी जा रही है। मिडिल ईस्ट में बढ़ता यह संघर्ष वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो यह तनाव और अधिक गंभीर रूप ले सकता है।
Location : New Delhi
Published : 26 April 2026, 11:45 AM IST