ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी जंग छठे दिन और भी खतरनाक हो गई है। 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है और मिसाइल हमले खाड़ी देशों तक पहुंच गए हैं। होरमुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण तेल आपूर्ति प्रभावित हुई है और वैश्विक बाजारों में चिंता बढ़ गई है।

छह दिन की जंग में तबाही (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: मिडिल ईस्ट में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़ी भीषण जंग छठे दिन भी जारी है। 28 फरवरी को शुरू हुए इस सैन्य संघर्ष ने पूरे क्षेत्र को संकट में डाल दिया है। लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण अब तक 1000 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि कई देशों में भारी आर्थिक और मानवीय नुकसान हुआ है।
इस युद्ध में सिर्फ ईरान और इजरायल ही नहीं, बल्कि कई खाड़ी देश भी प्रभावित हो गए हैं क्योंकि वहां मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने लगातार निशाने पर हैं।
मिडिल ईस्ट मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस जंग में सबसे ज्यादा नुकसान ईरान को हुआ है। वहां अब तक 1,045 लोगों की मौत हो चुकी है।
इसके अलावा लेबनान में 50 से ज्यादा, इजरायल में 11, जॉर्डन में 5, कुवैत में 4, यूएई में 3, और बहरीन व ओमान में 1-1 व्यक्ति की मौत की खबर है।
कुवैत में स्थित अमेरिकी दूतावास पर हुए ईरानी हमले में 6 अमेरिकी सैनिक भी मारे गए हैं।
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संघर्ष के दौरान हिंद महासागर में एक बड़ा सैन्य घटनाक्रम सामने आया। अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से एक ईरानी युद्धपोत को निशाना बनाकर डुबो दिया।
इस जहाज से अब तक 87 शव बरामद किए जा चुके हैं। इस घटना के बाद समुद्री क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से ईरान के कई अहम सैन्य और सुरक्षा ठिकानों को निशाना बनाया है। हमलों में आंतरिक सुरक्षा कमांड और ‘बसीज’ बल से जुड़ी इमारतें तबाह होने की खबर है।
बताया जा रहा है कि इन हमलों का उद्देश्य ईरान के सुरक्षा ढांचे को कमजोर करना है ताकि उसकी सैन्य क्षमता कम की जा सके।
ईरान के धार्मिक शहर कौम (Qom) में भी एक अहम इमारत को निशाना बनाया गया। बताया जा रहा है कि यहीं मौलवियों का वह पैनल बैठक करने वाला था, जो अगले सुप्रीम लीडर के चयन से जुड़ा था।
तेहरान के सरकारी टीवी ने कई ध्वस्त इमारतों और तबाही के दृश्य भी दिखाए हैं।
रिपोर्ट्स के अनुसार, लगातार हो रहे हवाई हमलों से ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम और ड्रोन ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचा है। इससे उसकी जवाबी क्षमता प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए बहरीन, कुवैत और इजरायल पर मिसाइल हमले किए हैं।
इन हमलों के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में सुरक्षा अलर्ट बढ़ा दिया गया है और कई देशों ने अपने हवाई अड्डों और सैन्य ठिकानों की सुरक्षा मजबूत कर दी है।
जंग का असर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग होरमुज जलडमरूमध्य पर भी पड़ा है। एक मालवाहक जहाज पर मिसाइल हमले के बाद उसमें आग लग गई।
इस मार्ग से गुजरने वाले तेल टैंकरों की आवाजाही करीब 90 फीसदी तक कम हो गई है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित हो रही है।
तेल और गैस की आपूर्ति बाधित होने के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया है। दुनिया भर के शेयर बाजारों में भी गिरावट और अनिश्चितता का माहौल देखा जा रहा है।
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अमेरिकी रक्षा सचिव ने संकेत दिया है कि इस सैन्य अभियान की कोई तय समय सीमा नहीं है और यह तीन से आठ हफ्ते तक चल सकता है।
वहीं इजरायल के रक्षा मंत्री ने खुलासा किया कि यह ऑपरेशन मूल रूप से जून 2026 में शुरू होना था, लेकिन विशेष परिस्थितियों के कारण इसे फरवरी में ही शुरू कर दिया गया।
इस बीच मिडिल ईस्ट के कई देशों में लाखों यात्री फंसे हुए हैं और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग व्यवस्था भी गंभीर रूप से प्रभावित हो गई है।