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भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्तों की कड़वाहट किसी से छिपी नहीं है। दशकों से चले आ रहे विवादों और तनावपूर्ण घटनाओं ने दोनों देशों के संबंधों को हमेशा संदेह और टकराव की स्थिति में बनाए रखा है। लेकिन अब पाकिस्तान के सामने एक नई कूटनीतिक चुनौती खड़ी होती नजर आ रही है, जो उसके ईरान के साथ संबंधों को लेकर हैं।
ईरान समझ गया पाकिस्तान की पूरी चाल? (फोटो सोर्स- इंटरनेट)
New Delhi: भारत और पाकिस्तान के बीच रिश्ते कैसे हैं, इस पर ज्यादा लैक्चर देने की जरूरत नहीं है। पूरी दुनिया इस बात से वाकिफ है कि दोनों ही मुल्कों के बीच रिश्ते हमेशा से ही विवादों के गलियारों में ही डेरा जमाए रहे हैं। लेकिन, अब इस बार पाकिस्तान ईरान के साथ अपने रिश्तों को लेकर सवालों के घेरे में आ चुका है।
यह कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि पाकिस्तान ने हमेशा से ही यह बखूबी साबित किया है कि वो किसी का भी सगा नहीं है, ना ही भारत का और ना ही ईरान का। आखिर, ऐसा क्यों कहा जा रहा है? जानने के लिए पढ़िए ये खास रिपोर्ट।
अमेरिका-इजरायल की तरफ से ईरान पर किए गए हमले के बाद पाकिस्तान यह दावा करता हुआ नहीं थक रहा है कि वो दोनों मुल्कों के बीच में मध्यस्थता करने के लिए पूरी तरह से तैयार है। लेकिन, अब उसकी तैयारी शक के घेरे में आ चुकी है।
दरअसल, ईरान ने युद्ध के बीच अपने कुछ मित्र राष्टों को होर्मुज से तेल के जहाजों को गुजरने की अनुमति दे दी थी। जिसमें प्रमुख रूप से पाकिस्तान भी शामिल था। लेकिन, कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि हाल ही में पाकिस्तान ने कुछ ऐसे जहाजों को होर्मुज से गुजरने दिया है, जिससे अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को फायदा हो सकता है। यही नहीं, अब तो अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी सामने आकर इस बात को संकेत दे दिए हैं कि हाल ही में होर्मुज से गुजरे जहाजों से हमें फायदा हो सकता है। इसके बाद ईरान पाकिस्तान से खफा हो चुका है। कुल मिलाकर, ईरान को भी पाकिस्तान के चाल, चरित्र और चेहरे पर शक होने लगा है।
खैर, इस पूरी वस्तुस्थिति को समझने के बाद इसे कहने में कोई गुरेज नहीं होना चाहिए कि ईरान का पाकिस्तान से खफा होना स्वाभाविक है, क्योंकि कुछ दिनों पहले ही ईरान के विदेश मंत्री ने भारत और पाकिस्तान को अपना दोस्त बताया था। लेकिन, अब जिस तरह से पाकिस्तान ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को फायदा पहुंचाने का प्रयास किया है, उसे देखते हुए ईरान का खफा होना लाजिमी है।
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पाकिस्तान के इस कदम के बाद ईरान को ऐसा लग रहा है कि वो दोनों पक्षों से ही अपना हित साधने की कोशिश कर रहा है, जबकि ईरान चाहता है कि पाकिस्तान अपना रूख अच्छे से स्पष्ट करें, ताकि विश्व समुदाय के समक्ष पूरी तरह से उसकी भूमिका स्पष्ट हो सके कि आखिर वो किसके साथ है?