ईरान का सऊदी की सबसे बड़ी तेल कंपनी पर हमला! क्या अमेरिका और इजराइल हैं इसके पीछे?

सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी पर अचानक हमला हुआ। धमाके की आवाज़ इतनी जोरदार थी कि पास के इलाकों में भी हड़कंप मच गया।

Post Published By: Nitin Parashar
Updated : 2 March 2026, 4:57 PM IST
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सऊदी अरब की सरकारी तेल कंपनी सऊदी अरामको की रास तनूरा रिफाइनरी पर अचानक हमला हुआ। धमाके की आवाज़ इतनी जोरदार थी कि पास के इलाकों में भी हड़कंप मच गया। आग लग गई और सुरक्षा कारणों से रिफाइनरी को अस्थायी रूप से बंद करना पड़ा। सऊदी रक्षा मंत्रालय ने बताया कि कई अतिरिक्त ड्रोन हवा में ही मार गिराए गए, लेकिन यह हमला खाड़ी क्षेत्र में तनाव की नई लकीर खींच गया है।

ईरान की चाल

अब सवाल उठता है कि आखिर ईरान ने अरामको को क्यों निशाना बनाया। इस कंपनी और सऊदी अरब का अमेरिका और इजराइल से क्या कनेक्शन है? अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ईरान के खिलाफ सख्त कदम उठाने के लिए सऊदी अरब और इजराइल ने अमेरिकी प्रशासन पर दबाव बनाया था। पूर्व राष्ट्रपति के कार्यकाल में ईरान पर की गई सैन्य कार्रवाई से तेहरान पहले ही नाराज़ था।

रणनीति या धमाका?

अरामको पर हमला ईरान के “ट्रू प्रॉमिस 4” अभियान का हिस्सा माना जा रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ सैन्य हमला नहीं, बल्कि एक रणनीतिक संदेश है। ईरान यह दिखाना चाहता है कि जो भी देश अमेरिका और इजराइल के साथ खड़े होंगे, उन्हें इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

क्षेत्रीय समीकरण

कतर यूनिवर्सिटी की शोधकर्ता सिनेम चेंगिज ने बताया कि पहली बार खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के लगभग सभी देश एक ही समय में निशाने पर हैं। बहरीन, कुवैत, कतर, यूएई और सऊदी अरब में अमेरिकी सैन्य अड्डे मौजूद हैं। ईरान का संदेश साफ है कि जो भी अमेरिकी मौजूदगी की मेजबानी करेगा, वह संभावित लक्ष्य बन सकता है।

तेल बाजार और भारत पर असर

रास तनूरा की रिफाइनिंग क्षमता लगभग 5.5 लाख बैरल प्रतिदिन है। अगर यह रिफाइनरी लंबे समय तक बंद रहती है, तो वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ सकता है। ब्रेंट क्रूड की कीमत पहले ही 90 डॉलर प्रति बैरल पार करने की ओर बढ़ रही है। भारत के लिए यह स्थिति संवेदनशील है। खाड़ी से आने वाला कच्चा तेल भारत की जरूरत का बड़ा हिस्सा पूरा करता है। रास तनूरा में रुकावट से पेट्रोल, डीजल और एलपीजी की कीमतों में उछाल आ सकता है।

आगे का रास्ता

विश्लेषक क्रिस्टियन अलेक्जेंडर के मुताबिक, अगर ईरान हमले जारी रखता है तो सऊदी अरब और यूएई भी जवाबी कार्रवाई में शामिल हो सकते हैं। इससे क्षेत्रीय संघर्ष व्यापक युद्ध में बदल सकता है।

Location : 
  • New Delhi

Published : 
  • 2 March 2026, 4:57 PM IST

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