
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Img- Pinterest)
New Delhi: वैश्विक राजनीति में एक नया और चिंताजनक मोड़ देखने को मिल रहा है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की ने दावा किया है कि रूस, मिडिल ईस्ट में बने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और खाड़ी देशों पर हमले के लिए ईरान को सैटेलाइट इंटेलिजेंस (उपग्रह खुफिया जानकारी) दे रहा है। इस गंभीर आरोप के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान सामने आया है। ट्रंप ने बहुत ही बेफिक्र लेकिन सख्त लहजे में कहा है कि वह इस मामले पर सीधे रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से बात करेंगे।
यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की के मुताबिक, उनकी खुफिया एजेंसियों ने जुलाई के शुरुआती दिनों से ही अमेरिकी ठिकानों और खाड़ी देशों के बुनियादी ढांचों पर रूसी उपग्रहों की असामान्य हलचल रिकॉर्ड की है। उनका आरोप है कि रूस इन ठिकानों की तस्वीरें लेकर ईरान को सौंप रहा है ताकि वहां हमले किए जा सकें।
जेलेंस्की ने बताया कि 19 और 20 जुलाई को बहरीन, जॉर्डन और कुवैत के चार प्रमुख हवाई अड्डों पर रूसी सैटेलाइट्स की पैनी नजर थी। इसके अलावा उन्होंने यह भी दावा किया कि रूस अपनी सेना को मजबूत करने के लिए 30,000 उत्तर कोरियाई सैनिकों की भर्ती की तैयारी में है।
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जेलेंस्की के इस दावे पर जब एयर फोर्स वन में पत्रकारों ने डोनाल्ड ट्रंप से सवाल किया, तो उन्होंने बेहद ही अलग अंदाज में जवाब दिया। ट्रंप ने कहा, "हम पता लगाएंगे कि इसमें कितनी सच्चाई है। मैं खुद पुतिन से इस बारे में बात करूंगा।" ट्रंप का यह बयान दिखाता है कि वह किसी तीसरे देश के दावे पर तुरंत भरोसा करने के बजाय रूसी नेतृत्व से सीधे संवाद की रणनीति अपना रहे हैं।
ट्रंप ने साफ कहा कि अगर रूस, ईरान की मदद कर भी रहा है, तो उसका कोई असर नहीं पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना ने ईरान को बुरी तरह से पछाड़ दिया है। ट्रंप के शब्दों में "ईरान के पास अब न तो मजबूत थलसेना बची है, न वायुसेना और न ही नौसेना। ऐसे में रूस चाहे जितनी भी मदद कर ले, उसका कोई नतीजा नहीं निकलने वाला।"
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अपनी बात को साबित करने के लिए ट्रंप ने वेनेजुएला का उदाहरण दिया। उन्होंने याद दिलाया कि वेनेजुएला को भी रूस ने अपने सबसे अत्याधुनिक हथियार और उपकरण दिए थे, लेकिन जब अमेरिकी कार्रवाई की बात आई तो वे हथियार काम नहीं आए। ट्रंप का मानना है कि रूसी सैन्य मदद का जमीनी हकीकत पर कोई खास असर नहीं पड़ता।
इस पूरे घटनाक्रम से स्पष्ट है कि महाशक्तियों के बीच की जंग अब केवल एक मोर्चे तक सीमित नहीं रही। यूक्रेन युद्ध की आंच अब मिडिल ईस्ट (खाड़ी देशों) तक पहुंच रही है। एक तरफ जहां जेलेंस्की पश्चिमी देशों को एकजुट करने के लिए रूस-ईरान-उत्तर कोरिया के गठजोड़ को उजागर कर रहे हैं, वहीं ट्रंप इस खतरे को अपनी सैन्य ताकत के दम पर खारिज कर रहे हैं। अब देखना यह होगा कि ट्रंप और पुतिन की भावी बातचीत में इस मुद्दे पर क्या मोड़ आता है।
Location : New Delhi
Published : 28 July 2026, 8:30 AM IST