
H-1B वीजा होल्डर्स के लिए अमेरिका में नया बिल (Img: Pinterest)
Washington: अमेरिका में इमिग्रेशन कानून को लेकर एक बार फिर बड़ी बहस शुरू हो गई है। एक तरफ राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अवैध इमिग्रेशन पर सख्ती बरत रहे हैं, वहीं दूसरी ओर डेमोक्रेटिक पार्टी ने लंबे समय से अमेरिका में रह रहे लाखों अप्रवासियों को राहत देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। कैलिफोर्निया से डेमोक्रेटिक सीनेटर एलेक्स पैडिला ने एक नया विधेयक पेश किया है, जिसे 1986 के बाद इमिग्रेशन सिस्टम में सबसे बड़ा बदलाव माना जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव कानून बनता है तो H-1B वीजा धारकों सहित करीब 80 लाख से ज्यादा लोगों के लिए स्थायी निवास यानी ग्रीन कार्ड हासिल करने का रास्ता आसान हो सकता है। इस प्रस्ताव को खास तौर पर भारतीय पेशेवरों के लिए बेहद अहम माना जा रहा है, क्योंकि H-1B वीजा धारकों में सबसे बड़ी संख्या भारतीयों की है।
सीनेटर एलेक्स पैडिला का यह प्रस्ताव अमेरिका के पुराने 'रजिस्ट्री' नियम में बदलाव करने की बात करता है। यह नियम पहली बार 1929 में लागू किया गया था और अब तक इसमें केवल चार बार संशोधन हुआ है। आखिरी बार 1986 में राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन के कार्यकाल के दौरान इसमें बदलाव किया गया था। मौजूदा नियम के अनुसार केवल वे लोग ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन कर सकते हैं जो 1 जनवरी 1972 से पहले अमेरिका में रह रहे हों। यह तारीख अब पूरी तरह अप्रासंगिक हो चुकी है। नए विधेयक में इस निश्चित तारीख को हटाकर 'सात साल की रोलिंग पात्रता' लागू करने का प्रस्ताव रखा गया है। यानी जो व्यक्ति कम से कम सात साल से लगातार अमेरिका में रह रहा है, उसका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह ग्रीन कार्ड की अन्य सभी शर्तें पूरी करता है, वह स्थायी रेजिडेंसी के लिए आवेदन कर सकेगा।
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इस प्रस्ताव का सबसे बड़ा असर भारतीय H-1B वीजा धारकों पर पड़ सकता है। अमेरिका में टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और रिसर्च सेक्टर में काम करने वाले लाखों भारतीय H-1B वीजा पर वर्षों से कार्यरत हैं। हालांकि, रोजगार-आधारित ग्रीन कार्ड पर लागू 'कंट्री कैप' यानी देशवार सीमा के कारण भारतीयों को स्थायी निवास पाने के लिए कई बार 10 से 20 साल या उससे भी अधिक समय तक इंतजार करना पड़ता है। नया प्रस्ताव उन लोगों को राहत देने की कोशिश करता है जो लंबे समय से कानूनी रूप से अमेरिका में रह रहे हैं लेकिन ग्रीन कार्ड की लंबी प्रक्रिया में फंसे हुए हैं। इससे भारतीय प्रोफेशनल्स को नौकरी बदलने, परिवार बसाने और भविष्य की योजना बनाने में अधिक स्थिरता मिल सकती है।
प्रस्तावित कानून केवल H-1B वीजा धारकों तक सीमित नहीं है। इसमें बचपन में अमेरिका लाए गए अप्रवासी यानी 'ड्रीमर्स', अस्थायी संरक्षित दर्जा (TPS) पाने वाले लोग, आवश्यक सेवाओं से जुड़े कर्मचारी, लंबे समय से वीजा पर रह रहे लोगों के बच्चे और कई अन्य पात्र अप्रवासी भी शामिल हैं। सीनेटर पैडिला का कहना है कि यह प्रस्ताव उन परिवारों को राहत देगा जिन्होंने वर्षों से अमेरिका में रहकर काम किया, टैक्स चुकाया और समाज में योगदान दिया है, लेकिन अब भी स्थायी कानूनी दर्जे का इंतजार कर रहे हैं।
सीनेटर पैडिला ने कहा कि उन्होंने यह विधेयक पहले भी पेश किया था ताकि मेहनती अप्रवासियों के साथ हो रहे कठोर व्यवहार का विरोध किया जा सके। उनका आरोप है कि ट्रंप प्रशासन की इमिग्रेशन नीतियों ने लाखों परिवारों के बीच असुरक्षा और अनिश्चितता का माहौल पैदा कर दिया है। हालांकि, अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक पार्टियों के बीच लंबे समय से गहरे मतभेद हैं। ऐसे में इस विधेयक का कांग्रेस से पारित होना आसान नहीं माना जा रहा। फिर भी डेमोक्रेटिक व्हिप डिक डर्बिन समेत कई वरिष्ठ सांसद इस प्रस्ताव का समर्थन कर रहे हैं। हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में भी इससे जुड़ा समान विधेयक पेश किया गया है।
Location : Washington
Published : 28 July 2026, 1:56 PM IST