Maharajganj News: निजी अस्पताल में युवक की मौत पर बवाल, इलाज से डॉक्टर की तैनाती तक कई सवाल

नौतनवा के एक निजी अस्पताल में 36 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत के बाद हंगामा हो गया। परिजनों ने लापरवाही का आरोप लगाया। डाइनामाइट न्यूज़ की ग्राउंड जीरो पड़ताल में अस्पताल के दस्तावेजों में दर्ज डॉक्टर और इलाज करने वाले चिकित्सक को लेकर सवाल सामने आए हैं। अस्पताल संचालन, सरकारी डॉक्टर की निजी अस्पताल में भूमिका और पैथोलॉजी सेंटर की व्यवस्था भी जांच के दायरे में है।

Post Published By: Asmita Patel
Updated : 2 September 2026, 2:55 PM IST

Maharajganj: महराजगंज के नौतनवा में मंगलवार की रात एक निजी अस्पताल में 36 साल के युवक की मौत के बाद ऐसा बवाल मचा कि अस्पताल के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया और देखते ही देखते मामला हंगामे से सड़क जाम तक पहुंच गया। आरोप है कि इलाज के दौरान इंजेक्शन लगाए जाने के बाद युवक की हालत बिगड़ी और उसके नाक-मुंह से खून आने लगा।

कुछ ही देर बाद उसने दम तोड़ दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह हालात संभाले, लेकिन इसके बाद डाइनामाइट न्यूज़ की ग्राउंड जीरो पड़ताल में अस्पताल के इलाज से लेकर डॉक्टरों की भूमिका और दस्तावेजों तक को लेकर कई ऐसे सवाल सामने आए हैं, जिनका जवाब अब स्वास्थ्य विभाग की जांच से ही मिल पाएगा।

मौत के बाद अस्पताल में हंगामा

मृतक की पहचान नौतनवा के मधुबन नगर वार्ड निवासी 36 वर्षीय विनोद के रूप में हुई है। परिजनों के मुताबिक तबीयत खराब होने पर विनोद को तहसील रोड स्थित निजी अस्पताल में इलाज के लिए लाया गया था। परिवार का आरोप है कि अस्पताल में उपचार शुरू होने के बाद उसे इंजेक्शन दिए गए। इसके बाद उसकी हालत अचानक बिगड़ने लगी।

परिजनों का कहना है कि युवक के नाक और मुंह से खून आने लगा और कुछ ही देर में उसकी मौत हो गई। युवक की मौत की खबर जैसे ही परिवार और आसपास के लोगों को मिली, अस्पताल में भीड़ जुटने लगी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा शुरू कर दिया।

इलाज करने वाले बताए गए डॉ. उमाकांत

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल अस्पताल के रिकॉर्ड और इलाज करने वाले डॉक्टर को लेकर सामने आया है। डाइनामाइट न्यूज़ की ग्राउंड जीरो पड़ताल में सामने आई जानकारी के मुताबिक अस्पताल के कागजात में चिकित्सक के तौर पर डॉ. अमित चौधरी का नाम दर्ज बताया गया है, जबकि मृतक विनोद का इलाज डॉ. उमाकांत त्रिपाठी द्वारा किए जाने की बात सामने आई है।

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हालत नाजुक थी तो रेफर करने में कितना समय लगा?

अब इस मामले में एक अहम सवाल यह भी है कि अगर मरीज की हालत अस्पताल पहुंचने के समय ही नाजुक थी तो उसे तत्काल किसी उच्च चिकित्सा केंद्र पर क्यों नहीं भेजा गया? मरीज को अस्पताल में किस समय भर्ती किया गया, जांच कब हुई, उपचार कब शुरू हुआ और रेफर करने का फैसला कितने समय बाद लिया गया- इन तमाम बिंदुओं को मेडिकल रिकॉर्ड से जांचना जरूरी है।

अस्पताल का संचालक कौन?

पड़ताल के दौरान अस्पताल के संचालन को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आईं। कुछ लोगों ने अस्पताल के संचालन को डॉ. अमित चौधरी से जुड़ा बताया। वहीं एक चिकित्सक के अनुसार अस्पताल संचालक संजय यादव हैं और डॉ. अमित चौधरी को जरूरत पड़ने पर अस्पताल बुलाया जाता है। अब सवाल यह है कि अस्पताल का वास्तविक संचालक कौन है और वहां डॉक्टरों की नियुक्ति या सेवाएं किस व्यवस्था के तहत ली जा रही हैं? अस्पताल के पंजीकरण दस्तावेजों में संचालक का नाम क्या दर्ज है और वहां कार्यरत चिकित्सकों की जानकारी स्वास्थ्य विभाग के रिकॉर्ड में क्या है? इन बिंदुओं की भी जांच जरूरी है।

निजी अस्पताल में भूमिका पर सवाल

सूत्रों के अनुसार डॉ. अमित चौधरी सिद्धार्थनगर जिले के लोटन सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में अधीक्षक पद पर तैनात हैं। ऐसे में निजी अस्पताल से उनके कथित जुड़ाव को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। अगर कोई डॉक्टर सरकारी सेवा में तैनात है तो निजी अस्पताल में उसकी भूमिका क्या है? क्या वह वहां मरीजों को देखने या उपचार करने के लिए अधिकृत हैं? क्या इसके लिए कोई नियमानुसार अनुमति है? इन सवालों का जवाब संबंधित विभागीय रिकॉर्ड और जांच से ही सामने आएगा।

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मेडिकल स्टोर और पैथोलॉजी सेंटर पर भी उठे सवाल

अस्पताल परिसर में संचालित मेडिकल स्टोर और बगल के कमरे में चल रहे पैथोलॉजी सेंटर को लेकर भी पड़ताल के दौरान सवाल सामने आए हैं। सूत्रों ने इनके पंजीकरण और निर्धारित मानकों के पालन को लेकर सवाल उठाए हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग की मौके पर जांच महत्वपूर्ण हो जाती है। निरीक्षण के दौरान लाइसेंस, पंजीकरण, जरूरी दस्तावेज और निर्धारित मानकों का पालन हो रहा है या नहीं, इसकी स्थिति स्पष्ट हो सकती है।

हंगामे के बाद सड़क पर लगा जाम

विनोद की मौत के बाद अस्पताल के बाहर जुटे परिजनों और समर्थकों का गुस्सा सड़क तक पहुंच गया। पुलिस मौके पर मौजूद रही और लोगों को समझाने का प्रयास किया गया। बताया गया कि रात करीब 10:30 बजे से 11:30 बजे तक तहसील की ओर जाने वाली सड़क पर जाम की स्थिति बनी रही। पुलिस के समझाने और कार्रवाई का आश्वासन दिए जाने के बाद लोगों ने जाम हटाया।

सीएमओ बोले- मामला संज्ञान में, जांच सौंपी गई

मामले को लेकर महराजगंज के सीएमओ ने बताया कि प्रकरण उनके संज्ञान में है और इसकी जांच सौंप दी गई है। अस्पताल के संचालन और संबंधित चिकित्सक की भूमिका से जुड़े पहलुओं की भी जांच किए जाने की बात कही गई है। अब स्वास्थ्य विभाग की जांच रिपोर्ट पर सबकी नजर है। रिपोर्ट से यह पता चल सकेगा कि युवक की मौत की वास्तविक वजह क्या थी और इलाज के दौरान किसी तरह की लापरवाही हुई थी या नहीं।

Location :  Maharajganj

Published :  2 September 2026, 2:55 PM IST