
इलाहाबाद हाईकोर्ट (Img : pinterest)
Prayagraj: किराये के मकान में रहने वाले किसी व्यक्ति की दुर्घटनावश मौत हो जाए तो क्या इसके लिए मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाया जा सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस सवाल पर अहम टिप्पणी करते हुए साफ किया है कि सिर्फ मकान में मौत हो जाने के आधार पर मालिक को आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने कहा कि मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई के लिए अभियोजन को ऐसी विशिष्ट लापरवाही या चूक का प्रथमदृष्टया साक्ष्य पेश करना होगा, जिसका मृतक की मौत से सीधा और निकट संबंध हो।
मामला कानपुर नगर के काकादेव थाना क्षेत्र का है। यहां छात्र करीब आठ महीने से अवधेश सिंह के मकान में किराये पर रहकर IIT की तैयारी कर रहा था। एक दिसंबर 2025 को परिवार को छात्र की मौत की सूचना मिली। परिजन मौके पर पहुंचे तो छात्र का शव मकान के बाथरूम में मिला। इसके बाद मामले को लेकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई और मकान मालिक के खिलाफ FIR दर्ज हो गई।
मामले की जांच के बाद पुलिस ने मकान मालिक के खिलाफ लापरवाही से मौत के मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी। इसके बाद ट्रायल कोर्ट ने चार्जशीट का संज्ञान लेते हुए समन आदेश जारी कर दिया। मकान मालिक अवधेश सिंह ने ट्रायल कोर्ट के इस आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी। याची की ओर से दलील दी गई कि उसके खिलाफ ऐसा कोई ठोस साक्ष्य नहीं है, जिससे यह साबित हो कि छात्र की मौत उसकी किसी आपराधिक लापरवाही या चूक के कारण हुई।
हाईकोर्ट ने कहा कि छात्र की मौत निश्चित रूप से दुर्भाग्यपूर्ण घटना है, लेकिन किसी किराये के मकान में मौत हो जाने मात्र से मकान मालिक को भारतीय न्याय संहिता यानी BNS की धारा 106 के तहत आपराधिक रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने यह भी देखा कि रिकॉर्ड में ऐसा कोई प्रथमदृष्टया साक्ष्य नहीं था, जिससे यह साबित हो कि गैस गीजर सुरक्षा मानकों के खिलाफ लगाया गया था।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में साफ किया कि आपराधिक मुकदमा केवल अनुमान या आशंका के आधार पर नहीं चलाया जा सकता। अभियोजन को आरोपी की ऐसी स्पष्ट लापरवाही या चूक दिखानी होगी, जिसका घटना और मौत के बीच सीधा संबंध हो। इस मामले में कोर्ट को ऐसा कोई पर्याप्त आधार नहीं मिला, जिससे मकान मालिक के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई जारी रखने का औचित्य साबित हो सके।
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इन परिस्थितियों को देखते हुए अवधेश सिंह के खिलाफ दर्ज आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। इसके साथ ही ट्रायल कोर्ट की ओर से जारी संज्ञान और समन आदेश भी प्रभावी नहीं रह गया। इस फैसले में कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण कानूनी बात स्पष्ट की है कि किराये के मकान में होने वाली हर दुर्घटना के लिए मकान मालिक को स्वतः जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। जिम्मेदारी तय करने के लिए यह देखना जरूरी होगा कि मकान मालिक की कोई ऐसी विशिष्ट लापरवाही थी या नहीं, जिसका घटना से सीधा संबंध हो।
Location : Prayagraj
Published : 9 September 2026, 1:14 PM IST
Topics : Allahabad High Court Gas Geyser Death Landlord Liability Rental House Accident Uttar Pradesh News