गोरखपुर में रिटायर्ड चिकित्साधिकारी से साइबर ठगी, जालसाजों ने ऐसे किया डिजिटल अरेस्ट

गोरखपुर जनपद में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोपों का भय दिखाकर एक सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी को करोड़ों का चूना लगा दिया। साइबर पुलिस तहकीकात में जुट गई है।

Post Published By: Jay Chauhan
Updated : 26 February 2026, 5:03 PM IST

Gorakhpur: जनपद में साइबर ठगी का बड़ा मामला सामने आया है। साइबर ठगों ने मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे आरोपों का भय दिखाकर एक सेवानिवृत्त आयुर्वेदिक चिकित्सा अधिकारी से  करोड़ों की ठगी कर दी। ठगों ने चिकित्सा अधिकारी से   1,57,99,952 रुपये की ठगी कर ली।

पीड़िता की पहचान डॉ. मंजुला श्रीवास्तव (पत्नी स्व. शैलेष कुमार श्रीवास्तव), निवासी सी-178/78, 5 कैनाल रोड, थाना कैंट के रूप में हुई है।

जालसाजों ने ऐसे किया डिजिटेल अरेस्ट

पीड़ित डॉक्टर  ने बताया कि 13 फरवरी 2026 को व्हाट्सएप वीडियो कॉल के जरिए एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को एटीएस/एनआईए/ईडी का अधिकारी बताया। कॉलर ने केनरा बैंक खाते में 50 लाख रुपये के कथित लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाते हुए डिजिटल अरेस्ट की धमकी दी।

ठगों ने पीड़िता को लगातार निगरानी में रखने, किसी से बात न करने और घर से बाहर न निकलने का दबाव बनाया। कहा गया कि सारा पैसा लीगलाइजेशन के लिए ट्रांसफर कराया जा रहा है और जांच पूरी होने पर वापस कर दिया जाएगा। तकनीकी रूप से दक्ष न होने की बात स्वीकारते हुए पीड़िता ने बताया कि इसी कमजोरी का फायदा उठाकर उन्हें मानसिक दबाव में रखा गया।

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एफडी तुड़वाकर करोड़ों की RTGS

13 से 21 फरवरी के बीच ठगों ने पीड़िता की सभी एफडी तुड़वाकर अलग-अलग खातों में रकम ट्रांसफर करा ली। 18 फरवरी को यूनियन बैंक खाते से 30 लाख रुपये आईसीआईसीआई बैंक खाते में RTGS।
20 फरवरी को 80 लाख रुपये आईसीआईसीआई बैंक खाते में RTGS। 21 फरवरी को एसबीआई खाते से 47,99,952.80 रुपये आईसीआईसीआई बैंक खाते में RTGS। कुल मिलाकर 1.57 करोड़ रुपये से अधिक की रकम हड़प ली गई।

ठगों ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की फर्जी रसीदें भेजीं, जिन पर एक जैसा नंबर दर्ज था। कॉलर खुद को पुणे से बात करने वाला बताता रहा और 24 फरवरी तक पैसा लौटाने का भरोसा देता रहा, लेकिन बाद में संपर्क पूरी तरह टूट गया।

पीड़िता के मुताबिक अलग-अलग मोबाइल नंबरों से कॉल आते रहे। उन्होंने आशंका जताई है कि इतनी बड़ी रकम के ट्रांसफर में किसी बैंक कर्मी की मिलीभगत भी हो सकती है।

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साइबर थाना गोरखपुर में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। मामले की जांच निरीक्षक कपिल देव चौधरी को सौंपी गई है। पुलिस का कहना है कि ट्रांजेक्शन ट्रेल, कॉल डिटेल्स और संबंधित खातों की पड़ताल कर रकम रिकवर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

 

Location : 
  • Gorakhpur

Published : 
  • 26 February 2026, 5:03 PM IST