Prayagraj: नन्ही बेटी आई घर, मगर मां की मुस्कान छिन गई… वजह ने झकझोरा

प्रयागराज में एक महिला बेटी को जन्म देने के बाद पोस्टपार्टम डिप्रेशन की शिकार हो गई। आरोप है कि ससुराल वालों ने उसे निकाल दिया और मायके ने भी सहारा नहीं दिया। पढ़िए पूरी कहानी।

Post Published By: Suresh Prajapati
Updated : 22 June 2026, 5:21 PM IST

Prayagraj: उत्तर प्रदेश के प्रयागराज मंडल से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने रिश्तों और समाज की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बेटी को जन्म देने के बाद एक महिला मानसिक बीमारी का शिकार हो गई। आरोप है कि गर्भ में बेटी होने की जानकारी मिलने पर उसे ससुराल से निकाल दिया गया, जबकि मायके वालों ने भी उसे अपनाने से इनकार कर दिया। आज हालत यह है कि महिला उपचार के लिए आश्रय गृह में रह रही है और उसकी नवजात बेटी भी उपेक्षा का शिकार है।

लावारिस हालत में मिली थी गर्भवती महिला

जानकारी के अनुसार अगस्त 2025 में कौशाम्बी के मंझनपुर क्षेत्र में एक गर्भवती महिला लावारिस अवस्था में मिली थी। सूचना मिलने पर पुलिस ने उसे वन स्टॉप सेंटर पहुंचाया, जहां उसका इलाज शुरू कराया गया। महिला की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी और वह अपने बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ थी। इलाज के दौरान उसने एक बच्ची को जन्म दिया, लेकिन प्रसव के बाद वह अपनी ही बेटी से दूरी बनाने लगी। स्थिति को देखते हुए उसकी मनोचिकित्सकीय काउंसलिंग कराई गई।

जांच में सामने आया पोस्टपार्टम डिप्रेशन

विशेषज्ञों की जांच में महिला के पोस्टपार्टम डिप्रेशन (प्रसवोत्तर अवसाद) से पीड़ित होने की पुष्टि हुई। चिकित्सकों के अनुसार गर्भावस्था और प्रसव के बाद अत्यधिक तनाव, सामाजिक उपेक्षा और पारिवारिक दबाव इस बीमारी के प्रमुख कारण हो सकते हैं। काउंसलिंग के दौरान महिला ने बताया कि पति और ससुराल पक्ष उस पर बेटे को जन्म देने का दबाव बनाते थे। बेटी होने की आशंका के बाद उसे घर से निकाल दिया गया था।

मायका और ननिहाल ने भी नहीं दिया सहारा

जांच में पता चला कि महिला का बचपन भी संघर्षों से भरा रहा। कम उम्र में मां की मृत्यु हो गई थी और बाद में पिता ने दूसरी शादी कर ली। नाना-नानी ने उसका पालन-पोषण किया, लेकिन उनके निधन के बाद मायके से भी उसका संबंध लगभग खत्म हो गया। महिला का एक 12 वर्षीय बेटा भी है, लेकिन ससुराल पक्ष ने उसे वापस रखने से इनकार कर दिया है। वहीं पिता और अन्य रिश्तेदारों ने भी जिम्मेदारी लेने से मना कर दिया।

इलाज जारी, बच्ची का भविष्य चिंता का विषय

वन स्टॉप सेंटर की टीम और चिकित्सक महिला की काउंसलिंग और थेरेपी कर रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि महिला की स्थिति पहले से बेहतर हुई है, लेकिन उसे अभी लगातार इलाज और पारिवारिक सहयोग की आवश्यकता है।फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला और उसकी नवजात बेटी का भविष्य क्या होगा। कानूनी और सामाजिक स्तर पर समाधान तलाशने की कोशिश की जा रही है।

Location :  Prayagraj

Published :  22 June 2026, 5:21 PM IST