
गोरखपुर में वायरल वीडियो का सच आया सामने (IMG: AI)
Gorakhpur: सोशल मीडिया पर इन दिनों वायरल हो रहे एक वीडियो ने गोरखपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच विवाद को लेकर हलचल मचा दी। वीडियो में पुलिस की वर्दी पहने एक व्यक्ति और अधिवक्ता के रूप में दिख रहे दूसरे व्यक्ति के बीच बहस और विवाद होता नजर आ रहा था। वीडियो तेजी से वायरल होने के बाद जब पुलिस ने इसकी जांच की तो पूरी कहानी ही अलग निकली।
सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में एक व्यक्ति पुलिस की वर्दी में नजर आ रहा था, जबकि दूसरा व्यक्ति अधिवक्ता के रूप में दिखाई दे रहा था। दोनों के बीच विवाद और बहस होती दिख रही थी। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से फैलने लगा। इसे देखकर लोगों के बीच यह संदेश जाने लगा कि शाहपुर क्षेत्र में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ है।
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पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान सामने आया कि वीडियो में पुलिसकर्मी के रूप में दिखाई दे रहा व्यक्ति पुलिस विभाग का कर्मचारी नहीं है। इसी तरह अधिवक्ता के रूप में दिखाई दे रहा व्यक्ति भी वास्तविक अधिवक्ता नहीं निकला। जांच में यह भी सामने आया कि वीडियो में दिखाई गई कथित घटना वास्तविक नहीं थी। पुलिस के अनुसार, दोनों व्यक्तियों ने जानबूझकर ऐसी स्थिति तैयार की थी, जिससे वीडियो देखने वालों को यह वास्तविक पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के बीच हुआ विवाद लगे।
वीडियो की जांच के बाद शाहपुर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो लोगों को हिरासत में लिया है। दोनों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि वीडियो बनाने के पीछे उनका वास्तविक उद्देश्य क्या था और इसे सोशल मीडिया पर सबसे पहले किसने अपलोड या प्रसारित किया। इसके अलावा वीडियो को वायरल कराने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
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पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सोशल मीडिया पर इस तरह के फर्जी वीडियो वायरल होने से आम लोगों में भ्रम की स्थिति पैदा हो सकती है। खासकर जब वीडियो में पुलिस या न्याय व्यवस्था से जुड़े किरदार दिखाए जाते हैं, तो लोग बिना पुष्टि किए उसे वास्तविक घटना मान सकते हैं। ऐसे वीडियो से संबंधित विभागों और संस्थानों की छवि भी प्रभावित हो सकती है।
पुलिस अधीक्षक नगर निमिष पाटील ने बताया कि शाहपुर क्षेत्र से संबंधित वायरल वीडियो की जांच कराई गई थी। जांच में वीडियो फर्जी पाया गया। उनके मुताबिक, वीडियो में पुलिसकर्मी और अधिवक्ता के रूप में दिखाई दे रहे दोनों व्यक्ति वास्तविक पुलिसकर्मी या अधिवक्ता नहीं हैं। एसपी सिटी के अनुसार, वीडियो में दिखाई गई घटना भी बनावटी थी और इसे सोशल मीडिया पर व्यूज बढ़ाने तथा वायरल कराने के उद्देश्य से बनाया गया था।
Location : Gorakhpur
Published : 27 September 2026, 7:09 PM IST