एक फोन कॉल और डॉक्टर के उड़े 48 लाख रुपये; कानपुर पुलिस ने बेनकाब किया साइबर गैंग; 611 खातों में फैला था जाल

पहले फोन आया, फिर ईडी और सीबीआई अधिकारी बनकर डराया गया और डिजिटल अरेस्ट की धमकी देकर लाखों रुपये ट्रांसफर करा लिए गए। कानपुर साइबर पुलिस की जांच में अब 611 बैंक खातों तक फैले कथित नेटवर्क की जानकारी सामने आई है।

Post Published By: Pratibha Yadav
Updated : 30 September 2026, 7:04 PM IST

Kanpur: उत्तर प्रदेश के कानपुर जिले में डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर साइबर ठगी करने वाले गिरोह के खिलाफ कानपुर साइबर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। पुलिस ने गिरोह से जुड़े तीन आरोपियों वासु, आतिश कुमार और कंचन प्रजापति को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक गिरोह ने स्वरूपनगर निवासी बुजुर्ग चिकित्सक योगेश चंद्र मिश्रा को कानूनी कार्रवाई और जेल भेजने की धमकी देकर करीब 48 लाख 20 हजार रुपये की ठगी की। गिरोह का कथित सरगना मुकुल चौबे अभी फरार है।

फोन कॉल से शुरू होता था ठगी का खेल

पुलिस जांच के अनुसार, आरोपी पहले मोबाइल फोन पर पीड़ित से संपर्क करते थे और खुद को किसी बड़े अधिकारी के रूप में पेश करते थे। इसके बाद कॉल किसी दूसरे व्यक्ति को ट्रांसफर कर दी जाती थी। दूसरा आरोपी खुद को ईडी या सीबीआई अधिकारी बताकर पीड़ित को गंभीर कानूनी मामले में फंसाने की धमकी देता था। इसके बाद डिजिटल अरेस्ट का डर दिखाकर बैंक खातों में रकम जमा कराई जाती थी।

आधार से जुड़े मोबाइल नंबर का डर दिखाया

पुलिस के मुताबिक, योगेश चंद्र मिश्रा को भी इसी तरीके से निशाना बनाया गया। उन्हें फोन कर बताया गया कि उनके आधार से जुड़ा एक मोबाइल नंबर कथित तौर पर गैरकानूनी गतिविधियों में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद अलग-अलग लोगों से उनकी बात कराई गई। इन लोगों ने खुद को सीबीआई अधिकारी बताते हुए गंभीर अपराध में फंसाने और जेल भेजने की धमकी दी।

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48.20 लाख रुपये अलग-अलग खातों में जमा कराए

कानूनी कार्रवाई का डर दिखाकर आरोपियों ने चिकित्सक से अलग-अलग बैंक खातों में करीब 48 लाख 20 हजार रुपये जमा करा लिए। बैंक पहुंचने के बाद उन्हें ठगी का पता चला, जिसके बाद साइबर थाने में शिकायत की गई। पुलिस अब रकम के ट्रांजेक्शन की पूरी कड़ी खंगाल रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि पैसा किन खातों में पहुंचा और वहां से कहां भेजा गया।

फर्जी दस्तावेजों से बनाई कंपनी

एडीसीपी अरीबा नोमान के मुताबिक, जांच में सामने आया कि आरोपियों ने कथित तौर पर पहचान संबंधी दस्तावेजों में हेरफेर कर अपना पता प्रतापगढ़ का दर्शाया। इसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर BAUKOYO CONTRACTORS PRIVATE LIMITED नाम से कंपनी तैयार की गई। पुलिस के अनुसार कंपनी के बैंक खाते में 15 बार में करीब 25.98 लाख रुपये पहुंचे।

611 बैंक खातों तक पहुंची रकम

पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि कंपनी के खाते में आने वाली रकम को तेजी से दूसरे बैंक खातों में ट्रांसफर किया गया। पुलिस को करीब 611 बैंक खातों तक रकम पहुंचने की जानकारी मिली है। ये खाते अलग-अलग राज्यों में बताए जा रहे हैं। इससे पुलिस को साइबर ठगी के बड़े नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका है।

मोबाइल से मिले अहम डिजिटल साक्ष्य

गिरफ्तार आरोपियों के मोबाइल फोन की जांच में पुलिस को बैंक खातों से जुड़ी जानकारी, कंपनी के दस्तावेज, संदिग्ध कॉल रिकॉर्ड और व्हाट्सऐप चैट समेत कई इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य मिलने की बात कही गई है। पुलिस इन डिजिटल सुरागों के आधार पर गिरोह से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

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चार राज्यों की शिकायतों से सामने आया 1.42 करोड़ का नेटवर्क

पुलिस के मुताबिक, एनसीआरपी पर बैंक खातों की पड़ताल के दौरान अलग-अलग राज्यों से जुड़ी चार साइबर अपराध शिकायतें सामने आई हैं। इन मामलों को जोड़ने पर करीब 1.42 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े नेटवर्क की जानकारी मिली है। फरार आरोपी मुकुल चौबे की तलाश में पुलिस टीमें जुटी हैं और पूरे आर्थिक नेटवर्क की जांच की जा रही है।

पुलिस ने 1930 पर शिकायत करने की अपील की

साइबर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि फोन पर कोई व्यक्ति खुद को पुलिस, सीबीआई, ईडी या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताकर डराए और पैसे की मांग करे तो उसके झांसे में न आएं। ऐसी स्थिति में तुरंत साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं। पुलिस का कहना है कि किसी भी संदिग्ध कॉल पर व्यक्तिगत या बैंकिंग जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।

Location :  Kanpur

Published :  30 September 2026, 7:03 PM IST